शुक्रवार, 4 मई 2012

छोट छोट शहरों में पैदा, बड़े बड़े शैतान

भ्रूण भ्रान्तवश भंगकर, भटके भट भकुवान । 
पुत्र-मोहवश पापधी,  बूढ़ भये अकुलान ।

घर से मार-भगाए  बेटे  ।
बहना आगे आय समेटे  ।

छोट छोट शहरों में पैदा,  बड़े बड़े शैतान ।। 

5 टिप्‍पणियां:

प्रेम सरोवर ने कहा…

बहुत सुंदर । मेरे नए पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा । । धन्यवाद ।

डा. श्याम गुप्त ने कहा…

घर से मार-भगाएं बेटे ।
बहना आगे आय समेटे ।

----बढिया.... पर मेरे विचार से बहना की जगह बिटिया नहीं होना चाहिये...

डा. अरुणा कपूर. ने कहा…

पुत्र मोह क्यों?..पुत्री मोह क्यों नहीं?...जब कि पुत्री के मनमें प्रेम-भाव भरा पड़ा है!

शिखा कौशिक ने कहा…

SATEEK LIKHA HAI AAPNE .AABHAR

रविकर फैजाबादी ने कहा…

@----बढिया.... पर मेरे विचार से बहना की जगह बिटिया नहीं होना चाहिये...

जी |
बिटिया तो पैदा होने से पहले ही मार दी गई थी |
पिता के पुण्य ही काम आये ||
सादर ||

आप सभी का आभार ||