गुरुवार, 10 मई 2012

बाल गीत...हनुमान जी...डा श्याम गुप्त.....

औषधियों  का  पर्वत लाकर,
लखन-लाल के प्राण बचाए।
श्री राम से आशिष पाकर ,
वे संकट-मोचन कहलाये |

बचपन में जब सूरज निगला,
लाल गैस का  गोला भाया |
टूटा जबड़ा  इंद्र -वज्र से,
हनुमान तब नाम कहाया ।

तीव्र वायु की भांति दौड़ते ,
पवन-पुत्र भी कहलाते हैं ।
वानर सेना के नायक वे,
कपीश भी बोले जाते हैं ।

अतुलित बलशाली भी वे हैं ,
औ ज्ञान-गुणों के सागर भी ।
मातु सिया के वर-प्रभाव से ,
हैं ऋद्धि-सिद्धि के नागर भी|

ये अपने बजरंग-बाली हैं,
श्री राम के भक्त दुलारे ।
सब दुष्टों को मार भगाते ,
सीता-राम ह्रदय में धारे ।।

5 टिप्‍पणियां:

रविकर फैजाबादी ने कहा…

जर हनुमान |
सादर प्रणाम ||
आभार |

Ayodhya Prasad ने कहा…

बहुत सुन्दर वर्णन ..
जय हनुमान ||
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आत्मविश्वास की महत्ता ..

शिखा कौशिक ने कहा…

shayam gupt ji -baal geet bahut sundar hai .badhai .
par bhartiy nari blog par ise prakashit karne ka uddeshay batayen .

डा. श्याम गुप्त ने कहा…

धन्य्वाद शिखाजी, रविकर व अयोध्या प्रसाद जी...
---अयोध्या का प्रसाद मिलगया और क्या चाहिये

डा. श्याम गुप्त ने कहा…

ताकि महिलायें बच्चों को हनुमान जी के गुण बताकर उन्हें हनुमान के समान सर्वगुण सम्पन्न बनाने का प्रयत्न करें....