सोमवार, 21 मई 2012

दहेज मांगने वाले गधे और कुत्ते से भी बदतर हैं

गधा और कुत्ता दो जानवरों का नाम है। इन्हें गाली के तौर पर भी इस्तेमाल किया जाता है।
गधे का अर्थ बेवक़ूफ़ लिया जाता है और कुत्ते का अर्थ लालची लिया जाता है।
गधे और कुत्ते, दोनों की ज़िंदगी इस बात की गवाह है कि वे दहेज कभी नहीं मांगते।
दहेज एक बुरी रस्म है। जिसने इसकी शुरूआत की उसने एक बड़ी बेवक़ूफ़ी की और जिसने भी सबसे पहले दहेज मांगा, उसने लालच की वजह से ही ऐसा किया। आज भी यह रस्म जारी है। एक ऐसी रस्म, जिसने लड़कियों के जीवन का नर्क बना दिया और लड़कों को आत्म सम्मान से ख़ाली एक बिकाऊ माल।
यही बिकाऊ दूल्हे वास्तव में गधे और कुत्ते से बदतर हैं। इनके कारण ही बहुत सी बहुएं जला दी जाती हैं और बहुत से कन्या भ्रूण मां के पेट में ही मार दिए जाते हैं।
ये केवल दहेज मांगने की ही मुल्ज़िम नहीं हैं बल्कि बहुत हत्याओं में भी प्रत्यक्ष और परोक्ष इनका हाथ होता है।
20 मई 2012 को आमिर ख़ान के टी. वी. प्रोग्राम ‘सत्यमेव जयते‘ का इश्यू दहेज ही था। उन्होंने दहेज के मुददे को अच्छे ढंग से उठाया। उन्होंने कई अच्छे संदेश दिए।
अभिनय प्रतिभा का सार्थक इस्तेमाल यही है।

5 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बिल्कुल सही कहा आपने!
सार्थक पोस्ट!

शिखा कौशिक ने कहा…

sach me aise doohle inse se badtar hain .sarthak post .aabhar

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

Shukriya .

Rajesh Kumari ने कहा…

अनवर जमाल जी बहुत सटीक और सार्थक बात कही है आजकल इन दहेज़ के लालचियों को इसी भाषा ऐसे ही शब्दों की जरूरत है मेरा बस चले तो इस पोस्ट के कई हजार पोस्टर बनवाकर देश की हर दीवार पर चिपका दूं बहुत बहुत हार्दिक आभार

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

शुक्रिया राजेश कुमारी जी।
अच्छी बातों का प्रचार ज़्यादा से ज़्यादा होना ही चाहिए।
देखिए
http://ahsaskiparten.blogspot.com/2012/05/evil.html