रविवार, 22 अप्रैल 2012

आज पौत्र को पालती, पहले पाली पूत-

 

समय के साथ

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ज़िंदा  है  माँ  जानता, इसका मिला सुबूत ।
आज पौत्र को पालती, पहले पाली पूत ।

पहले पाली पूत, हड्डियां घिसती जाएँ ।
करे काम निष्काम, जगत की सारी माएं ।

 किन्तु अनोखेलाल, कभी तो हो शर्मिन्दा ।
दे दे कुछ आराम, मान कर मैया ज़िंदा ।। 

6 टिप्‍पणियां:

डा. अरुणा कपूर. ने कहा…

ऐसा ही सब जगह देखने में आ रहा है!...गहन विषय , सार्थक पोस्ट!

शिखा कौशिक ने कहा…

bilkul sahi likha hai aapne .aabhar

sangita ने कहा…

dil ke behad kareeb |

SM ने कहा…

touchy nice poem

रविकर फैजाबादी ने कहा…

बहुत बहुत आभार ।।

डा. श्याम गुप्त ने कहा…

क्या बात है...क्या बात है...सत्यं..शिवम..सुन्दरं..