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रविवार, 22 अप्रैल 2012

आज पौत्र को पालती, पहले पाली पूत-

 

समय के साथ

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ज़िंदा  है  माँ  जानता, इसका मिला सुबूत ।
आज पौत्र को पालती, पहले पाली पूत ।

पहले पाली पूत, हड्डियां घिसती जाएँ ।
करे काम निष्काम, जगत की सारी माएं ।

 किन्तु अनोखेलाल, कभी तो हो शर्मिन्दा ।
दे दे कुछ आराम, मान कर मैया ज़िंदा ।। 

शुक्रवार, 23 मार्च 2012

फिर से देता क्लेश, हुई मैं क्यूँ न ऊढ़ा --


*ऊढ़ा हो जाती अगर, दैहिक सुख को चाह ।
इन बच्चों की परवरिश,  करता के परवाह । 

करता के परवाह,  उड़ाती मैं गुलछर्रे ।
पर बच्चों की चाह, चली ना तेरे ढर्रे ।

कर पौरुष नि:शेष, लौट आया क्यूँ बूढ़ा ।
फिर से देता क्लेश, हुई मैं क्यूँ न ऊढ़ा ।। 
*  अपने पति को छोड़ दूसरे पुरुष के पास चली जाने वाली व्याहता ।

शुक्रवार, 16 मार्च 2012

तन मन को देती जला, रहा दूसरा ताप-

रमिया का एक दिन.... (महिला दिवस के बहाने)


खटे सदा रमिया मगर, मिया बजाएं ढाप ।
तन मन को देती जला, रहा दूसरा ताप ।  

रहा दूसरा ताप, हाथ पे हाथ धरे है ।
जीवन का अभिशाप, मगर ना आह करे है ।

रमिया दारु लाय, पिलाती नाग नाथ को ।
साड़ी अगली बार, मीसती चली हाथ को ।।

शुक्रवार, 9 मार्च 2012

2- लिंक और मेरी टिप्पणी


संजय की दृष्टी सजग, जात्य-जगत जा जाग ।
जीवन में जागे  नहीं, लगे पिता पर दाग ।
लगे पिता पर दाग, पालिए सकल भवानी।
भ्रूण-हत्या आघात, पाय न पातक पानी ।
निर्भय जीवन सौंप, बचाओ पावन सृष्टी ।
कहीं होय न लोप, दिखाती संजय दृष्टी ।।

प्रतियोगी बिलकुल नहीं, हैं प्रतिपूरक जान ।
इक दूजे की मदद से, दुनिया बने महान ।
दुनिया बने महान, सही आशा-प्रत्याशा ।
पुत्री बने महान, बाँटता पिता बताशा ।
बच्चों के प्रतिमोह, किसे ममता ना होगी ।
पति-पत्नी माँ-बाप, नहीं कोई प्रतियोगी ।। 

रविवार, 4 मार्च 2012

कन्या-देवी पूज, जुल्म उनपर ही ढाये-

बाहर की क्या बात, आज घर में ही डरती

प्यार मिले परिवार का, पुत्र-पिता पति साथ ।
देवी मुझको मत बना, झुका नहीं नित माथ ।
झुका नहीं नित माथ, झूठ आडम्बर छाये ।
कन्या-देवी पूज, जुल्म उनपर ही ढाये ।
दुग्ध-रक्त तन प्राण, निछावर सब कुछ करती ।
बाहर की क्या बात, आज घर में ही डरती ।। 


अधूरी कुंडली

एक समाचार रूस से

रुसी पुत्र अबोध से, रुसी माता एक ।
खलल नींद में जो पड़ा, पुत्र  को देती फेंक । 
पुत्र  को देती फेंक, रही चौदहवीं मंजिल ।
तनिक नहीं अफ़सोस, खूब सोई फिर बेदिल ।
इस अफसोसनाक घटना पर --
आगे की दो पंक्तियाँ आप पूरी करें --
मुझसे नहीं लिखी जाती  

आदरणीय डा. श्याम जी गुप्त ने यह पंक्तियाँ जोड़ी हैं अधूरी कुंडली में--
जबरदस्त ।
बहुत बहुत आभार --
है अभागा समाज वह,यह राक्षसी चरित्र ।
गलत जगह पैदा हुआ, है वह रूसी पुत्र ॥