शुक्रवार, 7 अक्तूबर 2011

तिरस्कृत होती ‘‘भारतीय नारी’’ में महिलाओं का योगदान भाग -2

पिछली पोस्ट में हमने जाना था कि किस प्रकार सिर्फ महिलाओं के लिये बने एक ऐसे अस्पताल में अपनी कुछ कारस्तानियों के कारण इलाज के लिये सुश्री शिखा कौशिक द्वारा भरती करायी गयी एक मरीज को ‘नारी का कविता ब्लाग’ नामक महिलाओं के अस्पताल से धकियाकर बाहर निकाल दिया गया और इस घटना से तिलमिलाकर रह गयीं सुश्री शिखा जी ने ऐसी महिला मानसिक रोगियों का इलाज करने के लिये ‘भारतीय नारी ’ नामक एक नये अस्पताल की नींव 23 जुलाई 2011 को रखते हुये उसमें पहली मरीज के रूप मे ‘पूनम पाण्डे से पूछे गये कुछ प्रश्न’ भरती कराया था ।

जैसा कि इस सामूहिक ब्लाग पर अंकित था भारतीय नारी के सरोकारों से संबंधित कोई भी सदस्य इसमें प्रतिभाग करने हेतु सदस्यता आवेदन कर सकता था और उसे व्यवस्थापिका महोदया द्वारा सदस्यता लिंक भी प्रेषित किये गये।

इस प्रकार इस सामूहिक चिट्ठे से कुल 34 योगदानकर्ता जुडे जिनमें से 19 महिला सदस्या थी ं और 15 पुरूष सहयोगी। हम पिछली पोस्ट में यह जान चुके है कि इससे जुडने वाले 15 पुरूष सहभागियों में से 12 ने अलग अलग समय पर कोई न कोई पोस्ट लिखकर इस सामूहिक ब्लाग में अपना सक्रिय योगदान दिया परन्तु तीन पुरूष योगदानकर्ता ऐसे रहे जिन्होंने ब्लाग में योगदानकर्ता के रूप मे जुडने के बाद अपने कर्तब्य /नैतिक उत्तरदायित्व की इतिश्री समझ ली।

आज चर्चा कर रहे हैं इस सामूहिक ब्लाग से जुडने वाली महिला योगदानकर्ताओ की और उनकी कारस्तानियों की।
इस सामूहिक ब्लाग से जुडने वाली कुल महिलाओं की संख्या 19 है जिसमें से मात्र 7 महिलाओं ने ही इसमें जुडने के बाद इसमें कभी न कभी कोई पोस्ट अथवा टिप्पणी देकर अपना सक्रिय योगदान अंकित कराया है । शेष 12 महिला योगदानकर्ताओं के द्वारा अब तक इसमें कोई भी पोस्ट नहीं लगायी है अतः उनका योगदान मात्र इस ब्लाग से जुडने भर तक ही सीमित रहा है। इसके बाद उन्होंने भी अपने कर्तब्य /नैतिक उत्तरदायित्व की इतिश्री समझ ली।

यह आवश्यक नहीं है कि आप किसी सामूहिक चिट्ठे पर नयी पोस्ट लगाकर ही उसमें सहयोग करें । आप प्रकाशित पोस्टों पर टिप्पणी के रूप में अपने अभिमत अंकित करते हुये भी उसके विकास में सहयोग कर सकते हैं परन्तु इस मोर्चे पर भी ये बारह महिला साथी कभी नहीं दिखलाई पडी है।

इस प्रकार आंकडों के आधार पर यह तथ्य स्वतः सिद्ध है कि इस सामूहिक ब्लाग पर इसके जन्म के समय से ही इससे जुडने वाली कुछ महिला योगदानकर्ताओं ने इसे तिरस्कृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह किया है।

भारतीय नारी ब्लाग से जुडने वाली कुछ महिला योगदानकर्ताओं में नैतिकता की यह सीमा है कि कुछ ब्लागरों की अनेक शोधपूर्ण प्रयासों से संग्रहीत सामग्री की कापी पेस्टिंग करते हुये अपने निजी ब्लाग पर गौरवपूर्ण ढंग से नयी पोस्ट लिखी और उसमें मूल योगदानकर्ताओं द्वारा किये गये श्रम की महत्ता को सम्मानित करने के उद्देश्य से उस सामग्री संग्रहकर्ता का नाम तक लिखना उचित नहीं समझा। ( अनावश्यक विवाद को टालने के उद्देश्य से उनके नाम का अंकन नहीं कर रहा हूँ इस ब्लाग पर विख्यात महिला लेखिकाओं के संबंध में किश्तों में लिखे मेरे आलेखों की टिप्पणियों में आपको इसका आभास हो जायेगा )

इस ब्लाग की स्थापना के तुरंत बाद माह अगस्त के लिये व्यवस्थपकों द्वारा ‘मेरी बहन’ विषय निर्धारित किया गया और माह सितम्बर के लिये महिला भ्रूण हत्या सहित अनेक विषय निर्धारित किये गये । प्रारंभिक सक्रियता के कारण इस ब्लाग की सौ पोस्ट बहुत कम समय में ही जारी हो गयी ं परन्तु योगदानकर्ताओ की निरन्तर बढती उदासीनता के कारण माह सितम्बर में निर्धारित विषय पर सामग्री का ही अभाव रहा।

आज उदासीनता की स्थिति यह है कि माह अक्टूबर का भी लगभग एक सप्ताह ब्यतीत हो चुका हे परन्तु अब तक इस माह के विषय का चयन /निर्धारण भी नहीं हो सका है। आज भी ब्लाग के मुख पृष्ठ पर अगस्त और सितम्बर माह के विषय की ही चर्चा दिखलायी पडती है।

इन सारे तथ्यों का ब्यौरा देने का आशय मात्र इतना है कि आप सभी योगदानकर्ताओ ने जिस उत्साह के साथ 23 जुलाई 2011 को इस ब्लाग को जन्म दिया था उस शिशु की उम्र अभी मात्र ढाई माह की है । किसी भी ढाई माह के शिशु की देखभाल में अगर इतनी कोताही बरती जायेगी तो निश्चित ही उस नवजात का भविष्य प्रश्नों के घेरे में ही रहेगा।

यह सत्य है कि किसी नवजात शिशु की देखभाल करने का प्रथम दायित्व उसके जन्तदाता का ही होता है परन्तु जन्मदाता की व्सस्तता या अन्य कार्यो से निजात न पाने का खामियाजा नवजात शिशु से भरवाने की बजाय किसी केयर टेकर की ब्यवस्था करना मुझे तो उचित जान पडता है।

अतः यह मेरी सहृदय इच्छा है कि किसी वािश्ठ सम्मानित महिला ब्लागर को इस ब्लाग के ब्यवस्थापकीय अधिकार प्रदान करते हुये ‘भारतीय नारी ’ नामक इस नवजात शिशु की परवरिष सुचारू रूप से करने की व्यवस्था की जाय अन्यथा यह नवजात ‘भारतीय नारी’ नामक ब्लाग भी भारतीय ब्लाग जगत में लावारिस के बिखरे पडे सैकडों नवजात ब्लागों की गति को प्राप्त हो सकता है।

ईश्वर करे ऐसा न हो! इसी शुभकामना के साथ विश्वाश करता हूँ कि पूर्व मे अंकित सुझाओं की ओर कोई न कोई महिला ब्लागर योगदानकर्ता अवश्य विचार करेगी।
आमीन!!

8 टिप्‍पणियां:

anshumala ने कहा…

किसी भी सामूहिक ब्लॉग पर सदस्यों के बिच कई समस्याए होती है अच्छा हो उन्हें अन्दर ही अन्दर एक दूसरे को मेल आदि कर सुलझा लेने चाहिए कभी भी ब्लॉग को इन सब चीजो का अड्डा नहीं बनाना चाहिए | इससे ब्लॉग बनाने के उद्देश्य प्रभावित होते है जो ठीक नहीं है और कभी कभी शुरू की ज्यादा रफ़्तार बाद में थका देती है इसलिए हमेसा एक माध्यम चाल से चलनी चाहिए इतने काम समय में इतनी पोस्ट |

रविकर ने कहा…

afsosnaak paristhiti ||

Atul Shrivastava ने कहा…

परिस्थिति चिंताजनक... पर शुभकामनाएं.... बेहतर भविष्‍य के लिए

Unlucky ने कहा…

Thank you very much for your post! I am very interested in your points.

A few snaps dont belong to India, there's much more to India than this...!!!.
Take a look here India

S.N SHUKLA ने कहा…

सार्थक पोस्ट, सादर

मलकीत सिंह जीत ने कहा…

badhiya sujhav diye hai par koi dhyan de to

मलकीत सिंह जीत ने कहा…

bahut badhiya sujhav diye hai aapne

veerubhai ने कहा…

इस शिशु लाग को इन्क्युबेटर (ऊष्मायन )में रखिए .कुछ करिए.