रविवार, 12 मई 2013

मेरा ब्लड ग्रुप है -वन्देमातरम और आपका ?



   

मेरा ब्लड ग्रुप है -वन्देमातरम और आपका ?

कल हमने मनाया  मदर्स  डे पर  हमारी भारत माता के प्रति क्यों बढ़ रहा अपमान का भाव धर्म-विशेष में ?वे क्यों जोड़ रहे हैं माँ को किये जाने वाले अभिवादन से अपने मजहब को ? हम हिंदुस्तानी हैं और हमारा एक ही ब्लड  ग्रुप है-वन्देमातरम !







हिंदुस्तानी दिल पाता है गाकर इसे सुकून !
'वन्देमातरम' बहता है मेरी रगों में बनकर खून !

वन्देमातरम वन्देमातरम गूंजे मेरे कानों में ,
वन्देमातरम वन्देमातरम रहता है मेरे अधरों पे ,
वन्देमातरम बन सुगंध सांसों को है महकता ,
वन्देमातरम अमृत सम जीवन में है घुल जाता ,
वन्देमातरम बिन गाये जीवन में सब कुछ सून ! 
'वन्देमातरम' बहता है मेरी रगों में बनकर खून !



वन्देमातरम आजादी की  जंग  की  याद  दिलाता  ,
वन्देमातरम वतन परस्ती की  है जोत  जगाता  ,
वन्देमातरम गाकर जिह्वा  पाती है आराम ,
वन्देमातरम में अल्लाह  इसमें है श्री राम ,
देशभक्त का यही है मजहब ये ही है कानून !
'वन्देमातरम' बहता है मेरी रगों में बनकर खून !


धरा से लेकर अम्बर तक हम आज गूंजा देंगें ,
वन्देमातरम का परचम जग में फहरा देंगें ,
वन्देमातरम पर आपत्ति जिस गद्दार को होगी ,
ऐसे हर दुश्मन का हम दिल दहला देंगें ,
वन्देमातरम का सर चढ़कर बोले आज जूनून !
'वन्देमातरम' बहता है मेरी रगों में बनकर खून !

   शिखा कौशिक 'नूतन '



11 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
साझा करने के लिए आभार!

शालिनी कौशिक ने कहा…

बहुत सुन्दर भावनात्मक अभिव्यक्ति बधाई

महेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा…

बहुत बढिया..
काश यही ब्लडग्रुप देश का हो जाए !

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

कुछ लोग नेता नहीं होते लेकिन अपनी पूंजी या ज़ोरदार भाषणबाज़ी के बल पर वे संसद या विधान सभा के लिए चुन लिये जाते हैं। उन्हें समस्याओं को हल करना नहीं आता और उन्हें हल करना भी नहीं होता। उनके क्षेत्र के लोगों से पूछिए तो वे उनसे नाराज़ मिलेंगे। ठोस काम न करने वाले ऐसे नेता हमेशा चुनाव में जनता द्वारा ठुकरा दिए जाते हैं। लिहाज़ा तुरूप के पत्ते के तौर पर वे भावनात्मक मुददे उठाते हैं। जनता को एक दूसरे के खि़लाफ़ नफ़रत दिलाते हैं।
‘वंदे मातरम्‘ पर विवाद ऐसे ही लोगों की देन है। जनता को ऐसे नेताओं से होशियार रहना चाहिए। जिनके अमल से समाज कां आपसी सद्भाव ख़त्म होता हो और नफ़रत बढ़ती हो।
See:
http://readerblogs.navbharattimes.indiatimes.com/BUNIYAD/entry/mudda

vandana gupta ने कहा…

होना तो यही चाहिये।

Rajesh Kumari ने कहा…

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल १४ /५/१३ मंगलवारीय चर्चा मंच पर राजेश कुमारी द्वारा की जायेगी आपका वहां स्वागत है ।

punita singh ने कहा…

sikhaajee
vnde maatarm sabhee ko pyaaraa honaa chaahiye magar aphsos esaa nahee hotaa.sundar kavitaa .dhnyvaad.

Kailash Sharma ने कहा…

बहुत सुन्दर और सटीक प्रस्तुति...वन्दे मातरम..

Devdutta Prasoon ने कहा…

शालिनी जी,राष्ट्रीयता की भावना का यह जुनून सराहनीय है !
जय भारत 'वंदे मातरम'

डॉ शिखा कौशिक ''नूतन '' ने कहा…

सच में हम सभी का ब्लड ग्रुप वन्देमातरम ही है .हम एक मत हैं यही इसका प्रमाण है .

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" ने कहा…

शिखा जी वाकई इस जज्वे की ही जरूरत है ..मजहब देश से बड़ा नहीं हो सकता ..बहुत सुंदर ..मेरे ब्लॉग पे भी आपका स्वागत है