बुधवार, 5 जून 2013

बहन जी फोबिया आखिर क्या है ?

Kareena with a mission in Satyagraha

मैंने प्रकाश झा से कहा था कि मुझे बहन जी टाइप मत
 बनाना।क्यों कहा करीना ने ऐसा ?

  बहन  जी फोबिया  आखिर  क्या  है  -

जब  कोई पुरुष  सड़क पर या किसी अन्य जगह पर  किसी महिला को संबोधित करते हुए कहता है -बहन जी और महिला को महसूस होता है कि ये उसकी सुन्दरता -स्मार्टनेस को कलंकित करने जैसा है तब उसे बहन जी फोबिया का शिकार  कहा जा सकता  है .

बहन जी फोबिया का शिकार आयु-वर्ग-

इस आयु वर्ग में १५ वर्ष से ६५ वर्ष तक की महिला को रखा जा सकता है .

क्या है कारण  इस फोबिया का -

अक्सर हम देखते हैं कि अभिनेत्रियाँ उम्र बढ़ जाने पर भी मेक अप के माध्यम से कम उम्र का दिखना चाहती हैं अमूमन ऐसी ही स्थिति कुछ आम महिलाओं की भी है .'बहन जी ' कहे जाने पर उनको एतराज इसलिए भी हो सकता है कि उन्हें महसूस होता उनका आकर्षण कम हो रहा है और पुरुष वर्ग उनकी खिल्ली उड़ा रहा है .

बहन जी फोबिया से बचने के लिए क्या उपाय करती हैं -

आजकल यह प्रचलन है कि शादीशुदा महिलाये भी साड़ी व् परम्परागत स्त्री वस्त्रों की जगह कम उम्र की दिखने के लिए जींस-टीशर्ट पहनना पसंद कर रही हैं .दूर से दिखने पर वे स्कूल गर्ल नज़र आती हैं और पास पहुँचने पर स्कूल गर्ल की माता जी .बस उदेश्य एक ही कोई उन्हें 'बहन जी ' न कह दे .मैडम कहलाना वे सर्वाधिक पसंद करती हैं और अब तो उनके बच्चे भी अपनी मॉम को आधुनिक परिधानों में देखना पसंद करते हैं .

कैसे बचें इस बहन जी फोबिया से ?

महिलाओं को चाहिए कि 'बहन जी ' कहे जाने पर गौरवान्वित महसूस करें .वर्तमान में जब लोग अपनी बहन तक का लिहाज़ नहीं करते तब कोई पुरुष जब आपको बहन का दर्ज़ा दे रहा है तब आपको शुक्रगुज़ार होना चाहिए उसका .साथ ही बहन जी का दर्ज़ा देने वाला पुरुष आपके प्रति गलत धारणा नहीं रखेगा -इस विचार को मस्तिष्क में स्थान दे .आप ऐसे सज्जनों का दिल से सम्मान करें .यदि कोई चिढाने के लिए भी ऐसा कर रहा है तो भी आपका तो सम्मान ही है .बहन का दर्ज़ा आकर्षण का केंद्र बनने वाली स्त्री से कहीं ऊपर है .

शिखा कौशिक 'नूतन '

8 टिप्‍पणियां:

Shalini Kaushik ने कहा…

you are right .nice post

Shanti Purohit ने कहा…

absolutly right mem

रविकर ने कहा…

आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति शुक्रवारीय चर्चा मंच पर ।।

चरखा चर्चा चक्र चल, सूत्र कात उत्कृष्ट ।

पट झटपट तैयार कर, पलटे नित-प्रति पृष्ट ।

पलटे नित-प्रति पृष्ट, आज पलटे फिर रविकर ।

डालें शुभ शुभ दृष्ट, अनुग्रह करिए गुरुवर ।

अंतराल दो मास, गाँव में रहकर परखा ।

अतिशय कठिन प्रवास, पेश है चर्चा-चरखा ।

shikha kaushik ने कहा…

shalini ji v shanti ji hardik aabhar .charcha manch par sthan pradan karne hetu ravikar ji ka hardik dhnyvad

राहुल ने कहा…

जी बहनजी, हम आपकी बात से सहमत हैं ...

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

सही कह रही हैं आप !

पूरण खण्डेलवाल ने कहा…

बहनजी शब्द तो एक आदरसूचक शब्द है और इससे आकर्षण का भी कोई लेना देना नहीं होता है ! फिर भी कुछ लोग इसको आकर्षण से जोड़ते हैं तो गलत है !!
सुन्दर आलेख !!

ana ने कहा…

मन के विकार है ।।दूर नही हो पाता।। सत्य वचन