मंगलवार, 23 अगस्त 2011

अन्न जल त्याग कर विरोध प्रदर्शन की एतिहासिकता और मेधा पाटेकर

                                                   
Free imprisoned Lankan doctors: Medha Patkar by senthil5000
    [now public se sabhar ]

एक अन्ना हजारे का अनशन समूचे देश में ऐसी हलचल मचा देगा शायद इसका अनुमान शासकों को नही था। वास्तव में अनशन की की सार्थकता पर कभी भी प्रश्नचिन्ह लगाया ही नहीं जा सकता। हमारे देश में ही नहीं वरन यह विदेशों में भी यही विरोध प्रदर्शित करने का अनूठा अस्त्र रहा है। भारतीय नारी ब्लाग पर प्रखर महिला सामाजिक कार्यकत्री किरण वेदी को भारत के भावी प्रधान मंत्री के रूप में प्रस्तुत करने संबंधी पोस्ट ने मुझे इस विषय में सोचने की ओर अग्रसर किया कि अन्न जल त्याग कर अनशन करते हुये विरोध प्रदर्शित करने की दिशा में ऐतिहासिक तथ्यों और महिलाओं द्वारा किये गये प्रयासों को भी सूचीबद्ध किया जाय । इस पडताल के दौरान जो कुछ सामने आया उसे आपके सामने परोस रहा हूँ।इस संबंध में वैश्विक स्तर पर एतिहासिक तथ्यों को खंगालने पर यह पाया कि सबसे पहले इस अहिंसक तरीके से विरोध प्रदर्शन को ईसा से सैकडों साल पहले आरंभ हो चुके थे। एक उदाहरण आयरलैंड में अन्याय के प्रति विरोध दर्ज कराने का है जहाँ इसके लिये उपवास रखा जाता था। वहाँं अन्याय के प्रति विरोध दर्ज कराने हेतु अन्न त्यागने का कार्यक्रम अन्याय करने वाले के सामंती के दरवाजे पर किया जाता
था।अपने देश में भी ईसा से 400-750 वर्ष पूर्व उपवास का उल्लेख बाल्मीकि रामायण में मिलता है जब वनवास के लिये गये राम को वापिस बुलाने के लिये गये भरत वन में जाते हैं और उनसे अयोध्या लौटने की अनुनय विनय करते हैं। अत्यधिक अनुनय विनय करने पर भी जब राम के द्वारा इसे स्वीकार नहीं किया जाता तो अंत में भरत अन्न त्यागने की बात कहते हैं। (इसे तात्कालिक संदर्भ में भूख हडताल ही कहा जायेगा
)।
इसके उपरांत मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान रामचंद्र द्वार भरत जी को इसे ब्राह्मण का कार्य बताकर अन्न जल न त्यागने की सलाह दी जाती है जिसे आज्ञाकारी भरत द्वारा इस प्रतिबंध के साथ स्वीकार किया जाता है कि वे अयोध्या में राजसिंहासन पर भगवान की चरण पादुकाऐं रखकर स्वयं प्रतीकात्मक प्रशासक बनकर शासन चलायेगें ।
1995 में टिहरी बांध विरोध में 45 दिन तक भूख हडताल करने वाले सुन्दरलाल बहुगुणा के अनशन का साक्षी मैं स्वयं रहा हूँ जिसके समर्थन में सामाजिक कार्यकर्ता सुश्री मेधा पाटेकर जी के आने पर अपने पदेन दायित्यों के चलते उन्हे मैने गिरिफ्तार भी किया था और उत्तर प्रदेश राज्य की सीमा से दूर लेजाकर नई दिल्ली के राजघाट पर सम्मानपूर्वक पहुँचाया था। (इसका विस्तृत विवरण मैं किसी अन्य पोस्ट में पृथक से लिखकर आप सुधी पाठकजनों के साथ अवश्य बांoa
टूँगा)
आदरणीय मेघा जी द्वारा इसके उपरांत 2006 में पुनः सरोवर बांध की उंचाई न बढाने के लिये भूख हडताल की जिसे उनके द्वारा 28 मार्च 2006 को प्रारंभ किया गया था और लगातार अनशन के बीस दिन बीतने पर 17 अप्रैल 2006 केा भारत के उच्चतम न्यायालय ने सरदार सरोवर के विस्थापन और पुर्नवास के कार्यक्रम को अपनी देखरेख में करवाने का आदेश दिया तब जाकर मेंधा जी का अनशन समाप्त हो सका था

अन्न जल त्याग कर विरोध प्रदर्शित करने के अनेक उदाहरण हैं यथा सुन्दरलाल बहुगुणा द्वारा 1997 में महात्मा गांधी की समाधि पर किया गया 74 दिनों तक उपवास, 13 जून 2008 को उत्तरकाशी में भागीरथी के प्रवाह को रोककर बनायी जाने वाली परियोजना को हटाने की मांग पर उपवास आदि आदि। आज इतना ही बताना चाहता हूँ कि भारतीय नारी आज किसी भी क्षेत्र में पुरूषों से पीछे नहीं है भले ही वह क्षेत्र कितना ही बीहड क्यों न हो जैसे अन्न जल त्याग कर अपने विरोध को प्रदर्शित करने का आदरणीय मेघा पाटेकर जी का उदाहरण।

5 टिप्‍पणियां:

शिखा कौशिक ने कहा…

अशोक जी
आपके इस आलेख से अनेक नए तथ्यों से परिचित हुए .मेधा पाटकर जी जैसी भारतीय महिलाओं के प्रति सभी का मस्तक आदर से झुक जाता है .आभार

अशोक कुमार शुक्ला ने कहा…

Shikha bahan
dhanyawad.
Mai jaldi hi woh special article bhi post karunga
jab maine megha ji ko arrest kiya tha.
(sarkaari noukar hu na)
Aapko ascharya hoga us din megha ji ne meri pith thapthpaai thi.

veerubhai ने कहा…

अशोक शुक्लाजी ,अच्छी इतिहास बोध से वाकिफ करवाती ,मेधा जी और सुन्दल लाल बहुगुणा के योगदान से वाकिफ करवाती जानकारी आपने मुहैया करवाई .आभार .....इफ्तियार पार्टी का पुण्य लूटना चाहती है रक्त रंगी सरकार ./ http://kabirakhadabazarmein.blogspot.com
Tuesday, August 23, 2011
इफ्तियार पार्टी का पुण्य लूटना चाहती है रक्त रंगी सरकार .
जिस व्यक्ति ने आजीवन उतना ही अन्न -वस्त्र ग्रहण किया है जितना की शरीर को चलाये रखने के लिए ज़रूरी है उसकी चर्बी पिघलाने के हालात पैदा कर दिए हैं इस "कथित नरेगा चलाने वाली खून चुस्सू सरकार" ने जो गरीब किसानों की उपजाऊ ज़मीन छीनकर "सेज "बिछ्वाती है अमीरों की ,और ऐसी भ्रष्ट व्यवस्था जिसने खड़ी कर ली है जो गरीबों का शोषण करके चर्बी चढ़ाए हुए है .वही चर्बी -नुमा सरकार अब हमारे ही मुसलमान भाइयों को इफ्तियार पार्टी देकर ,इफ्तियार का पुण्य भी लूटना चाहती है ।
अब यह सोचना हमारे मुस्लिम भाइयों को है वह इस पार्टी को क़ुबूल करें या रद्द करें .उन्हें इस विषय पर विचार ज़रूर करना चाहिए .भारत देश का वह एक महत्वपूर्ण अंग हैं ,वाइटल ओर्गेंन हैं .

http://kabirakhadabazarmein.blogspot.com//......
गर्भावस्था और धुम्रपान! (Smoking in pregnancy linked to serious birth defects)
Posted by veerubhai on Sunday, August 21
२३ अगस्त २०११ १:३६ अपराह्न

शालिनी कौशिक ने कहा…

bharatiy नारी पर आपकी har पोस्ट sangrahniy है और ये भी सत्य है कि भारत में नारी की शक्ति और महानता को महत्व देने वाले आज भी मौजूद हैं सार्थक पोस्ट आभार

veerubhai ने कहा…

अशोक जी चिपको आन्दोलन की "गौरा देवी "और बाँध बचाओ धारा की मेधा जी पाटेकर एक अप्रतिम नाम हैं ,ये लोग संस्थाएं हैं महज़ नाम नहीं .मेधाजी पर तो विकास की धारा को मोड़ने के ,अवरुद्ध करने के आरोप भी लगे लेकिन ये अपना काम करतीं रहीं .रुकी नहीं .आभार आपका ,अभिषेक जी का ब्लोगिया दस्तक और .उत्साह -वर्धन ..के लिए .