मंगलवार, 26 जुलाई 2011

यह कैसी निराली रीत


यह कैसी निराली रीत

यह कैसी निराली रीत 
दो साल से देश के बाहर रहने के कारण काफी परिवार के कार्यक्रमों में शामिल नहीं हो पाई /जिसका मुझे हमेशा अफ़सोस रहेगा ,और उस समय मुझे अपने देश से दूर रहना बहुत अखरा /देश से दूर रहकर ही मैं हमारे देश के सस्कारों और सस्कृति की कीमत अच्छी तरह जान सकी /पर जब मैं अपने देश में वापस आई और मुझे नई पीदियों की शादियों में शामिल होने का अवसर मिला तो मुझे ये देख कर बहुत दुःख हुआ की हमारे देश की कुरीतियाँ नहीं बदली/ आज जब लडकियां लड़कों के बराबर पढ़ रही हैं उनके कंधे से कन्धा मिलाकर काम कर रही हैं / लड़की के माता -पिता भी लड़कियों की पढाई -लिखाई पर उतना ही खर्च कर रहे हैं जितना लड़के के माता-पिता /फिर भी लड़की वालों से कुछ लडके वाले दहेज़ की मांगे रख रहे हैं /लड़की के माता-पिता को उनके हर जायज-नाजायज मांगों को पूरा करने को मजबूरकर रहें हैं  /उनके हर रिश्तेदारों के सामने झूक कर उनका मान करने को कह रहे हैं / उनको इतना परेशान कर रहे हैं की खुले विचारों वाले माता-पिता भी अपनी लड़की की शादी के समय ये सोचने लगे की काश आज हम लड़कीवाले नहीं होते /क्योंकि हम अपनी लड़की उनके घर भेज रहे हैं तो क्या उनको अपनी बेज्जती करने का अधिकार दे रहे हैं / उनको मांग के अनुसार दहेज़ दें,वो जैसा चाहें वैसे ही उनके रिश्तेदारों ,बारातियों के स्वागत का इंतजाम करें /हर बात में ये डरते रहें की कही हमसे कोई गलती ना हो जाए ,कही लड़केवाले नाराज ना हो जाएँ /क्यों भई क्या लड़कीवाले हैं तो  डराने और दबाने के लिए ही हैं क्या /आज जब हर कदम पर लड़की लड़कों के बराबर हैं तो शादी में ये लडके वाले ऊँचे और लड़कीवाले नीचे कैसे हो सकतें हैं /सिर्फ इसलिए की लड़की विदा होकर लडके के घर जा रही है./ये तो एक तरह की  blackmailing  होगई की अगर आप ने हमारी बात नहीं मानी तो हम आपकी  लड़की को परेशान करेंगे , उसको ताना देंगे , उसके  साथ  दुर्बेब्हार करेंगे  /फिर तो kidnepping और शादी में अंतर क्या हो गया  kidnepper भी पैसे के लिए ये सब  करता है /अगर  kidneper की बात नहीं मानते तो वो kidnep किये गए  ब्यक्ति  को मार भी देता है /इसी  तरह कई  लड़कियों के ससुरालवाले  भी जब उनकी  मांगे पूरी नहीं होती तो वो लड़की को मार भी देते हैं /विवाह को हमारे समाज में अपनी परम्पराओं और संस्कारों में काफी ऊँचे स्थान पर रखा है /इसको साथ जन्मों का बंधन माना गया है / ऐसी पवित्र भावना से बनाई हुई इस रीति को हमने अपने  लालच में अंधे होकर blackmailing में परिवर्तित कर दिया /आज जब हम २२वि सदी में जी रहे हैं /नए  ज़माने और नई सोच को अपना  रहे हैं तो अपने समाज की इन  सड़ी-गली  कुरीतियों  को क्यों नहीं छोड़ पा रहे हैं/लड़की के माता-पिता पर तो अब दोहरी मार पढ़ रही है/ लड़कियों को लड़कों के बराबर पढ़ा भी रहे हैं और इस कुरीति  के कारण लड़केवालों की जायज -नाजायज मांगों को भी पूरा कर रहे हैं /और नोकरी करने वाली लड़की के पैसे पर भी शादी के बाद ससुराल वालों का हक हो जाता है .जिसका फायदा भी लड़के और उसके घर वाले उठा रहे हैं/मतलब यह कैसी 
निराली रीति है कमाऊ लड़की भी दें,.दहेज़ भी दें,और लड़केवालों के सामने झुकें भी,मतलब लड़केवालों के दोनों हाथ में लड्डू और लड़कीवालों के दोनों हाथ खाली  /अगर ये कुरीतियाँ नहीं बदली गईं तो लड़की को गर्भ में मारने की संख्या में और बढोतरी ही होगी /एक समय ऐसा आयेगा की समाज में लड़कियों की संख्या ना के बराबर हो जायेगी /फिर कैसे ये दुनिया चलेगी और कैसे लोगों का वंश आगे बढेगा/इसलिए जागो समाज के कर्ता-धर्ताओं जागो /समाज की इन कुरीतियों को बदलो /अपनी सोच बदलो / रीति-रिवाजों में परिवेर्तन जरुरी है /इसको बदलने में सबको आगे आना चाहिए /और ऐसी कुरीतियों को बदलना ही चाहिए /विवाह जैसी प्यारी परम्परा दो जिंदगियों और दो परिवार को जोड़ने के लिए बनी है /इसे अपने अहम् मान -अपमान ,लालच जैसी बुराइयों के कारण युद्ध का मैदान मत बनाओ /जो लड़की आपके घर आ रही है वो आपका घर ,आपके बेटे का संसार सजाने और आपका वंश बढ़ाने के लिए बहुत अरमानों के साथ आई है / अगर उसके माता-पिता का अपमान करोगे या परेशान करोगे तो उससे भी प्यार और मान की आशा कैसे करोगे//प्यार और इज्जत दोगे तभी प्यार और इज्जत पाओगे /यही जमाने की रीत है /
विवाह जैसी प्यारी रस्म को अपने 
लालच के कारण ब्यापार मत बनाओ 
यह दो जिंदगियों और दो परिवारों का मेल कराती है 
अपना अहम् छोडकर सबको दिल से अपनाओ 
तभी आप और आपका परिवार खुश रहेगा 
 लड़की तथा उसके परिवार से दिल से इज्जत पायेगा       

    

4 टिप्‍पणियां:

शालिनी कौशिक ने कहा…

sarthak aalekh .blog par aapka hardik swagat hai

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

आपका लेख बहुत सटीक और अच्छा है । माँ बाप समझते थे कि जैसे जैसे समाज में शिक्षा का स्तर बढ़ेगा वैसे वैसे दहेज परंपरा का सफाया होता चला जाएगा लेकिन हुआ इसका ठीक उल्टा । अब ससुराल वाले अपनी बहुओं से घर का काम तो लेते ही हैं साथ ही उससे बाहर से रुपये कमा कर लाने को भी कहते हैं और नए नए अविष्कारों के बाद दहेज की लिस्ट भी लंबी हो गई है । इस तरह लड़की पर शिक्षित होने के बाद सिर्फ बोझ ही बढ़ा है और लड़की का माँ बाप होना पहले के मुकाबले और ज्यादा कठिन हो गया है ।
इस तरह इस समस्या का ख़ात्मा शिक्षा से होता तो क्या बल्कि इसने तो इसे और बढ़ा दिया है ।

तब इस समस्या का हल क्या है ?

इसका हल कोई तो बताए !

...क्योंकि इसका हल हम बताते हैं तो वह कुछ लोगों को अखर जाता है ।

शिखा कौशिक ने कहा…

प्रेरणा जी -एक एक बात सटीक है पर मेरा मानना है कि यदि लड़की के माता पिता उसका साथ दें तो स्थिति सुधर सकती है .मेरी एक सहेली ने एम्.ए.बी.एड तक की शिक्षा पाई थी .उसका विवाह एक इंजिनियर से हुआ था .विवाह के बाद से ही वे उसे pareshan करने लगे और अंततः एक दिन उसकी हत्या फांसी लगाकर कर दी गयी .विवाह और हत्या में मात्र दस माह का समय laga पर इस बीच में सहेली के पिता sasural वालों की मांगे पूरी करते रहे .यदि पहली ही मांग पर बेटी को अपने घर वापस बुला लेते तो मेरी सहेली का मनोबल भी badhta और ससुराल वालो को सबक भी mil जाता .वे कभी उसे गर्म दूध डाल कर जला देते थे कभी ताने देकर .बेटी को विदा करने के बाद भी माता पिता का कर्तव्य है कि वे उसका साथ दें तभी इस समस्या का समाधान संभव है .

शालिनी कौशिक ने कहा…

प्रेरणा जी समाज बदले तो tab जब जो लड़की वाले हैं वे केवल लड़की वाले हों और लड़के वाले केवल लड़के वाले हों लड़की की शादी के अवसर पर तो जो माता -पिता रोते दीखते हैं और वे ही माता पिता जब लड़के की शादी का अवसर आता है तो सज-धज कर खड़े हो जाते हैं और उनके मुहं kafi बड़े खुल जाते हैं यदि बदलना है तो हमें अपनी सोच को बदलना होगा और ये बात मन में बिठानी होगी कि न हम दहेज़ देंगे न लेंगे .