गुरुवार, 28 जुलाई 2011

बर्तनों पर लगी हिन्दू और मुसलमान की मोहर और बालिका अमृता ! भाग 1



अमृता  प्रीतम का जन्म 1919 में पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त के लाहौर शहर में हुआ । इनके माता पिता पंचखंड भसोड़ के स्कूल में पढाते थे। इनका बचपन अपनी नानी के घर बीता जो रूढिवादी विचारधारा की महिला थी। अमृता बचपन से ही रूढियों के विरूद्व खडी होने वाली बालिका थीं ।
बचपन में अमृता ने देखा कि उनकी नानी की रसोई में कुछ बरतन और तीन गिलास अन्य बरतनों से अलग रखे रहते थे परिवार में सामान्यतः उन बर्तनों का उपयोग नहीं होता था । अमृता के पिता के मुसलमान दोस्तों के आने पर ही उन्हें उपयोग में लाया जाता था। बालिका अमृता ने अपनी नानी से जिद करते हुये उन गिलासों में ही पानी पीने की जिद की और फिर कई दिन की डांट-फटकार और सत्याग्रह के बाद अंततः अपने पिता के मुसलमान दोस्तों के लिये अलग किये गये गिलासों को सामान्य रसोई के बरतनेां में मिलाकर रूढियों के विरूद्व खडी होने का पहला परिचय दिया।
जब ये ग्यारह वर्ष की हुयीं तो इनकी मॉ की मृत्यु हो गयी । मां के साथ गहरे भावनात्मक लगाव के कारण मृत्यु शैया पर पडी अपनी मां के पास यह अबोध बालिका भी बैठी थीं। बालिका ने घर के बडे बुजुगों से सुन रखा था कि बच्चे भगवान का रूप होते हैं और भगवान बच्चों की बात नहीं टालते सेा अमृता भी अपनी मरती हुयी मां की खाट के पास खड़ी हुयी ईश्वर से अपनी मां की सलामती की दुआ मांगकर मन ही मन यह विश्वास कर बैठीं थीं कि अब उनकी मां की मृत्यु नहीं होगी क्योंकि ईश्वर बच्चों का कहा नहीं टालता..... पर मां की मृत्यु हो गयी, और उनका ईश्वर के उपर से विश्वास हट गया।
ईश्वर के प्रति अपने विश्वास की टूटन को उन्होने अपने उपन्यास ‘एक सवाल’ में कथानायक जगदीप के माध्यम से हूबहू व्यक्त किया है जब जगदीप अपनी मरती हुयी मां की खाट के पास खड़ा हुआ है, और एकाग्र मन होकर ईश्वर से कहता है-
‘ मेरी मां केा मत मारो।’
नायक को भी ठीक उसी तरह यह विश्वास हो गया कि अब उसकी मां की मृत्यु नहीं होगी क्योंकि ईश्वर बच्चों का कहा नहीं टालता..... पर मां की मृत्यु हो गयी, और , अमृता की तरह कथा नायक जगदीप का भी ईश्वर के उपर से विश्वास हट गया।
इन्होंने अपना सृजन मुख्य रूप से पंजाबी और उर्दू भाषा में किया है। अपनी आत्म कथा में अमृता ने अपने जीवन के संदर्भ में लिखा हैः-
‘‘ ---इन वर्षो की राह में, दो बडी घटनायें हुई। एक- जिन्हें मेरे दुःख सुक्ष से जन्म से ही संबंध था, मेरे माता पिता, उनके हाथों हुई। और दूसरी मेरे अपने हाथों । यह एक-मेरी चार वर्ष की आयु में मेरी सगाई के रूप में, और मेरी सोलह सत्तरह वर्ष की आयु में मेरे विवाह के रूप में थी। और दूसरी- जो मेरे अपने हाथों हुई- यह मेरी बीस-इक्कीस वर्ष की आयु में मेरी एक मुहब्बत की सूरत में थी।---’’
अपने विचारों को कागज पर उकेरने की प्रतिभा उनमें जन्मजात थी। मन की कोरें में आते विचारों को डायरी में लिखने से जुडे एक मजेदार किस्से को उन्होंने इस प्रकार लिखा हैः-
‘‘--पृष्ठभूमि याद है-तब छोटी थी, जब डायरी लिखती थी तो सदा ताले में रखती थीं। पर अलमारी के अन्दर खाने की उस चाभी को शायद ऐसे संभाल-संभालकर रखती थी कि उसकी संभाल किसी को निगाह में आ गयी (यह विवाह के बाद की बात है)। एक दिन मेरी चोरी से उस अलमारी का वह खाना खेाला गया और डायरी को पढा गया। और फिर मुझसे कई पंक्तियों की विस्तार पूर्ध व्याख्या मांगी गयी। उस दिन को भुगतकर मेने वह डायरी फाड दी, और बाद में कभी डायरी न लिखने का अपने आपसे इकरार कर लिया।---’’

अभी जारी है ..अगली पोस्ट में चर्चा करेंगें अमृता के प्यार की जो उनके समकालीन समालोचकों का पसंदीदा विषय था

8 टिप्‍पणियां:

शिखा कौशिक ने कहा…

अशोक जी -अमृता जी के बारे में कई अनजाने तथ्यों से परिचित कराती आपकी पोस्ट सराहनीय है .अगली पोस्ट का बेसब्री से इंतजार .आभार

रविकर ने कहा…

बहुत-बहुत आभार ||

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

बच्चों को सही जानकारी ज़रूर देनी चाहिए इसी लिए जब मेरी बेटी अनाम की मौत हुई तो मैंने अपने बच्चों को जीवन और मौत के अटल विधान के बारे में बताया और इस तरह उनका विश्वास ईश्वर के प्रति और बढ़ गया .

kanupriya ने कहा…

bahut khoob.

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

http://blogkikhabren.blogspot.com/
आपकी पोस्ट लाजवाब है .
आज की आपकी इस पोस्ट का लिंक हमने 'ब्लॉग की ख़बरें' में शामिल किया है और उसे सैकड़ों ब्लॉगर्स को भेजा है . आशा है आज आपके पास कुछ नए पाठक अवश्य पहुंचेंगे.

(ब्लॉग की ख़बरें)

HBFI पर
१- ब्लॉग लिखने का तरीक़ा Hindi Blogging Guide (20)
http://hbfint.blogspot.com/2011/07/hindi-blogging-guide-20.हटमल

और यह भी
२- ब्लॉगर्स मीट वीकली : एक ऐतिहासिक आयोजन
http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_8924.html
३- दोस्तों आज मेरे बढे भाई समीर लाल जी का जन्म दिन है http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_4407.html

मुबारक हो समीर लाल जी को बहुत बहुत .


४- मनी मैटर? नो टेंशन, स्कॉलरशिप है न ! -Sapna Kushwaha http://hbfint.blogspot.com/2011/07/sapna-kushwaha.html

५- प्रतिभा का सम्मान है स्कॉलरशिप -Anurag Mishra

६- बर्तनों पर लगी हिन्दू और मुसलमान की मोहर और बालिका अमृता ! भाग १http://bhartiynari.blogspot.com/2011/07/1.html

७- प्रकृति की पीड़ा कौन सुनेगाhttp://dpmishra-tiger.blogspot.com/2009/09/blog-post_7731.html

८- क्या हम सेक्स जनित विसंगतियों पर काबू पा सकते हैं?
http://www.amankapaigham.com/2011/07/blog-post_28.html

९- ब्लॉगर्स मीट अब ब्लॉग पर आयोजित हुआ करेगी और वह भी वीकली Bloggers' Meet Weekly

१०- ये मेरी किस्मत
http://www.hamarivani.com/redirect_post.php?blog_id=1701&post_id=92867&url=mymaahi.blogspot.com%2F2011%2F07%2Fblog-post_29.html

११- अपना आईक्यू जानना है तो...खुशदीप http://www.hamarivani.com/redirect_post.php?blog_id=42&post_id=92863&url=feedproxy.google.com%2F%7Er%2Fdeshnama%2FiZss%2F%7E3%2F3abRCjTlMgk%2Fblog-post_29.html

१२- कार्टून:- क्या आपकी नौकरी का भविष्य ऐसा गोल्डन है ? http://www.hamarivani.com/redirect_post.php?blog_id=84&post_id=92872&url=

*हिंदी ब्लॉगिंग को बढ़ावा देने के मक़सद से ही
आपको यह लिंक प्रेषित किए जाते हैं जिन्हें आप अपने मित्रों को फ़ॉरवर्ड कर दिया
करें ताकि नए लोग हिंदी ब्लॉगिंग से जु़ड़ें। अगर आपको इन लिंक्स के आने से
परेशानी होती है तो कृप्या सूचित करें ताकि आपका नाम सूची से हटाया जा सके।
हमारा मक़सद आपको परेशान करना नहीं है। अगर आप भी अपना ब्लॉग संचालित करते हैं
या आप सामान्य नेट यूज़र हैं और हिंदी ब्लॉगर्स से कोई विचार साझा करना चाहते
हैं तो आप भी अपनी पोस्ट का लिंक या कंटेंट भेज सकते हैं। उसे ज़्यादा से
ज़्यादा हिंदी ब्लॉगर्स तक पहुंचा दिया जाएगा। शर्त यह है कि यह कंटेंट
देशप्रेम की भावना को बढ़ाने वाला और समाज के व्यापक हित में होना चाहिए। हिंदी
ब्लॉगिंग को सार्थक दिशा देना ही ‘ब्लॉग की ख़बरें‘ का मक़सद है।

धन्यवाद !

Rajesh Kumari ने कहा…

Amrata preetam ke vishaya me achchi jankari dene vaali post.padhkar achchi lagi aage ka intjaar rahega.

शालिनी कौशिक ने कहा…

amrita ji ke bare me jankar bahut achchha laga .bartanon ke liye to ye sthiti to aaj bhi kuchh gaon me dekhne lo mil jayegi.aashok ji bahut sarthak post prastut ki hai aapne aabhar

Dorothy ने कहा…

सुंदर प्रस्तुति. आभार.
सादर,
डोरोथी.