रविवार, 9 सितंबर 2012

करते वे तफरीह, ढूँढती माँ को मोटर-रविकर

करते वे तफरीह, ढूँढती माँ को मोटर-

 मोटर में लिख घूमते, माँ का आशिर्वाद ।
जय माता दी बोलते, नित पावन अरदास ।

नित पावन अरदास, निकल माँ बाहर घर से ।
रोटी को मुहताज, कफ़न की खातिर तरसे ।

कह रविकर पगलाय, कहीं खाती माँ ठोकर ।
करते वे तफरीह, ढूँढती माँ को मोटर ।।

1 टिप्पणी:

शिखा कौशिक 'नूतन ' ने कहा…

dukhad v marmik hai yah sthiti par sach me aisa hi ho raha hai .sarthak prastuti hetu aabhar