शुक्रवार, 30 मार्च 2012

जिसे बीस साल पत्नी के रूप में रखा था वह दुल्हन बनी

married father of a daughters marriage
हरदोई/एजेंसी ! बेटी के हाथ पीले करने की खातिर किसी बाप को अगर पहले अपने हाथ पीले करने पडे़ तो यह सुनने में ही अजीब लगेगा लेकिन उत्तरप्रदेश के एक जिले में बेटी की शादी के लिए पहले पिता के विवाह करने का मामला प्रकाश में आया है।
मामला उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के एक गांव का है। शादी करने वाले बुजुर्ग पिता की दस संतानों में सात जीवित हैं। हरदोई के बेनीगंज थाने के बक्सापुर गांव की दो बहुए उषा वर्मा समाजवादी पार्टी की सांसद और राजेश्वरी देवी विधायक हैं। इस गांव के रहने वाले दलित बिरादरी के रामौतार ने करीब बीस साल पूर्व अपने बडे़ भाई की साली को गरीबी के कारण विवाह नहीं कर पाने के कारण अपने साथ रख लिया था तब से दोनों एक साथ पति-पत्नी के रूप में रहते थे और दोनों के दस बच्चे भी हुए जिनमें से सात जीवित हैं। एक पुत्र सबसे बड़ा और बाकी छह बेटियां हैं।
दोनों इतने साल एक साथ पति-पत्नी के रूप में रहते रहे लेकिन शादी करने की जो वजह बनी वह इनकी बेटी थी। दर असल रामौतार जब अपनी बेटी का विवाह करने के लिए रिश्ता देखने गया तो लोगों ने उससे उसके विवाह को लेकर सवाल किया । चूंकि विवाह नहीं किया है। इसलिए वह अपनी बेटी का कन्यादान नहीं कर सकेगा। इस समस्या को जब उसने अपने परिवार में बताया तो उसके सगे संबंधियों ने मिलकर उसे विवाह करने की सलाह दे डाली ।
शुभ मुहूर्त में विवाह का आयोजन किया जिसमें रामौतार दूल्हा बना और जिसे उसने बीस साल पत्नी के रूप में रखा था वह दुल्हन बनी। उसके बाद गांव के लोग रामौतार को दूल्हा बनाकर उसी के घर बारात लेकर पहुंचे जहां लंबे समय से साथ रह रही राजरानी दुल्हन के रूप में सजी उसका इंतजार कर रही थी । बारात में रामौतार का लड़का बाहर होने के कारण नहीं शामिल हुआ जबकि उसकी बेटियां बाप की बारात में शामिल हुई उसके बाद सगे संबंधियों की मौजूदगी में शादी की सारी रस्में अदा की गई और लोगों को दावत दी गई। 
Source : http://pyarimaan.blogspot.in/2012/03/blog-post_30.html

7 टिप्‍पणियां:

शालिनी कौशिक ने कहा…

vaidh santan ka hak pana har santan ka hak hai .yadi ko maryada ko langhta hai to use isi tarah bad me uski paridhi me aana hi padta hai .live in -hamari sanskriti me vaidh nahi hai to nahi hai .

Pallavi ने कहा…

क्या कहूँ अपने इंडिया में तो जो हो वो कम है।

veerubhai ने कहा…

लिविंग टुगेदर और परम्परा का एक और आयाम .

डा. अरुणा कपूर. ने कहा…

बिलकुल सही किया...अब वह स्त्री,कानूनन पत्नी बन गई!

S.N SHUKLA ने कहा…

सार्थक पोस्ट , आभार.

मेरे ब्लॉग" meri kavitayen" की नयी पोस्ट पर भी पधारने का कष्ट करें.

sangita ने कहा…

सार्थक पोस्ट , आभार.

डा. श्याम गुप्त ने कहा…

----यह लिव इन रिलेशन ..पश्चिम आज ढूंढ रहा है और उसकी नकल में हम....यह बात भारतीय समाज में कब की होकर गुजर भी गयी...अपनी सामाजिक-कमियों के कारण मान्यता प्राप्त न हो सकने के कारण....
--- गलत प्रथा तो गलत ही रहेगी...चाहे कोई भी उसे चोरी-चोरी करता रहे....और चोरी कभी वैध नहीं होती .... क्या हमारी सरकार, कोर्ट, समाज सोचेगा...