गुरुवार, 12 सितंबर 2013

वो पुरुष ही क्या जिसमे पौरुष के न हो दर्शन


वो पुरुष ही क्या जिसमे पौरुष के न हो दर्शन ,

विवश हो जिसके समक्ष नारी स्वयं कर दे समर्पण !

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नीच दुष्ट राक्षस पिशाच की श्रेणी के नर ,

पौरुषहीन ही हैं करते बलात स्त्री का हरण !

विवश हो जिसके समक्ष नारी स्वयं कर दे समर्पण !

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जिसका बुद्धि और भुजबल आकृष्ट कर ले नारी चित्त ,

उत्सुक सरिता बह चले अर्णव से करने को मिलन !

विवश हो जिसके समक्ष नारी स्वयं कर दे समर्पण !

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जिस नर में हो धीरता ,उदारता व् वीरता ,

उसके प्रति नारी उर में पनप जाता है आकर्षण !

विवश हो जिसके समक्ष नारी स्वयं कर दे समर्पण !

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पुरुषों में उत्तम कहे जाते हैं श्री राम क्यूँ ?

नारी के सम्मान हेतु काट देते हैं दशानन !

विवश हो जिसके समक्ष नारी स्वयं कर दे समर्पण !

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कृष्णा की पुकार पर दौड़कर पधारते ,

पूर्ण-पुरुष कहलाते है इसीलिए राधेकृष्ण ,

विवश हो जिसके समक्ष नारी स्वयं कर दे समर्पण !



शिखा कौशिक 'नूतन '

3 टिप्‍पणियां:

Shalini Kaushik ने कहा…

very nice expression .

Lalit Chahar ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति..

क्या बतलाऊँ अपना परिचय ..... - हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल - अंकः004

थोडी सी सावधानी रखे और हैकिंग से बचे

shyam Gupta ने कहा…

क्या बात है...क्या बात है ...अति-सुन्दर ..व सार्थक-सटीक...