मंगलवार, 26 मार्च 2013

कैसी रंग तरंग ??????????... डा श्याम गुप्त ...


                                           
                                     सूनी सब गलिया पडीं,अब कित रंग तरंग |
                                   बस कविता औ ब्लॉग पर, दिखते होली-रंग ||  


बाट  जोहता सुबह से, कोई तो आजाय |
होरी है कहता हुआ, मुख पे रंग लगाय |


                              नल में पानी है नहीं, कैसे रंग घुल पाय  |
                              सूखे सूखे ही चलो अब  रंग लेउ  उड़ाय |


 घर से निकले सोचते, लौटें भीगे अंग |
 अपने अपने  मस्त सब,लौटे हम बेरंग |

                                     घूरत ही पूरे भये, तुरत बीस सेकिंड |
                                अब रंग कैसे डालते, कानूनी प्रतिबन्ध | 

घूरन की का जरूरत, दो क्षण रंग उड़ाय |
 हाथ जहां चाहे परे,  बस रंग देऊ चढ़ाय |

4 टिप्‍पणियां:

शालिनी कौशिक ने कहा…

.बहुत सुन्दर भावनात्मक प्रस्तुति आपको होली की हार्दिक शुभकामनायें होली की शुभकामनायें तभी जब होली ऐसे मनाएं .महिला ब्लोगर्स के लिए एक नयी सौगात आज ही जुड़ें WOMAN ABOUT MAN

Rajput ने कहा…

बहुत खूबसूरत रचना म होली के रंगों से सरोबर।आपको होली की ढेरों शुभकामनाए

डॉ शिखा कौशिक ''नूतन '' ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति | हार्दिक आभार हम हिंदी चिट्ठाकार हैं

डा. श्याम गुप्त ने कहा…

धन्यवाद शिखा जी,,नूतन जी व राजपूत जी....