सोमवार, 16 जनवरी 2012

दांपत्य में अल्पविराम के बाद...


                                                        
                                                             


 हिन्दुओ में विवाह को एक ऐसा संस्कार माना गया है जिससे कई महत्वपूर्ण संस्कार छुपे हुए है यह जन्म जन्मान्तर का अथार्त सात जन्मों का नाता है। विवाह से पहले प्यार प्रथम होता है ,विवाह के बाद प्राथमिकताए बदल जाती है। पति-पत्नि मन-प्राण से दूध में पानी की तरह घुल जाते है। धीरे -धीरे इस संबधो में परिपक्वता आ जाती है। पति-पत्नि नौकरी पेशा है तो दोनों इतने व्यस्त हो जाते है कि उन्हें अपने वैवाहिक संबधों कंे बारे में सोचने का समय ही नहीं मिलता ,लेकिन इन संबधो को मजबूत बनाने के लिए निरतंर कोशिश करने की आवश्यकता है।

विवाह के बाद जिंदगी में जब अल्पविराम आ जाये तो  इन नुस्खो को अपनाकर दांपत्य जीवन में इन्द्रधनुषी रंग भर सकते है।

ऽ आपसी विश्वास ही विवाह की सफलता  की कुंजी है,इस रिश्ते में गर्माहट आपसी समझदारी व विश्वास के बल पर आ सकती है।

ऽ दोनो एक दूसरे  को उसके नजरिये से समझे इससे टकराव व विरोध की स्थिति पैदा नही होगी ।

ऽ एक दूसरे की भावनाओं को समझने में दांपत्य की सफलता छिपी है ,एक दूसरे की खुशी को अहमियत दे,एक दूसरे को दुख न पहुचे ,छोटी -छोटी बातो को तुल न दे वरन दोस्त बनकर एक दूसरे का सहयोग करे ।

ऽ एक दूसरे के व्यक्तित्व को उसकी खुबियो व खामियो के साथ स्वीकार करे ,सराहना व सम्मान करे क्योंकि कोई भी व्यक्ति अपने आप में पूर्ण नहीं होता है ।

ऽ शिकायतो से दांपत्य जीवन में कडवाहट घुलती है ,इसलिए हमेशा जीवन साथी की प्रंशसा के अवसर तलाशिये ।

ऽ दोनो एक दूसरे के परिवार को अपना समझकर अपनत्व व सम्मान दे ।

ऽ जीवन साथी के आत्म-सम्मान को बढाने की कोशिश करे, न की ठेस पहुचाने की ।

ऽ दोनो एक दूसरे की रूचियों को समान महत्व देते हुए उसे प्रोत्साहित करे ।

ऽ यदि नौकरी पेशा दंपती है तो घरेलु व अन्य कार्यो में एक दूसरे का सहयोग करे ।

ऽ दोनो परिवार की समस्या को आपसी विचार विर्मश के द्धारा समाधान करने की कोशिश करे ।

ऽ भावुकता में बहकर भूलकर भी अपने शादी के पूर्व संबधों की चर्चा न करे ।कभी -कभी ईमानदारी से सब कुछ बता देने का परिणाम बहुत बुरा हो सकता है।

ऽ नौकरी पैशा दंपती अपने पुरूष या महिला कर्मियो से अपने जीवन साथी से शालीनता पूर्वक मिलाए व संबधो में मर्यादा बनाए रखे।

ऽ तृप्त यौन कुदरत की सर्वाधिक आंनदायी क्रिया व सुखी दांपत्य की कुंजी है, इसे नजरअंदाज करना दांपत्य संबधो को कमजोर करने जैसा है। दांपत्य को पुरा समय दे ताकि एक दूसरे प्रति विवाह के बाद भी शारीरिक आकर्षण बना रहे ।

ऽ झगडे या बहस की स्थिति मे गलती का अहसास होने पर साॅरी प्यार की अभिव्यक्ति के साथ कहिये ।

ऽ दांपत्य की सफलता के लिए हर पल इस रिश्ते को नवीनता के साथ जीये और अपने साथी को सरप्राइज दे। जैसे खान-पान ,पहनावा ,सौदर्य, घर की सजावट, घूमने का कार्यक्रम बनाके,बचत करक,े उपहार देके ।

ऽ एक दूसरे को जन्मदिन,शादि की वर्षगांठव या अन्य सफलता के अवसर पर तोहफा या प्यार भरी बधाई देने में कंजूसी न दिखाये ।

ऽ संवादहीनता दांपत्य जीवन को नीरस बना देती है इसलिए दोनो दउन सार्थक मुद्दों घर,समाजराजनीति पर जिनासे आप जुडे हैो विचार विर्मश करे ।

ऽ शक्की मिजाज दांपत्य में दरार पैदा कर सकता है,इसलिए छोटी-छोटी बातों में शक को बीच में न आने दे ।

ऽ बहुुत ज्यादा नजदीकी दूरी पैदा कर सकती है,इसलिए दांपत्य को आंनद-दायक व सुखी बनाने के लिए समय समय प र कुठछ दिनों के लिए एक दूसरे से दूर रहे ,लेकिन दूरी इतनी लम्बी न करे की वियोग का मारा साथी आपको छोड कही और भटक जाय।

ऽ दांपत्य में लज्जा अथवा संकोच ,दुराव को कोई स्थान नहीं होना चाहियं।


           प्यार के धरातल से विवाह की सीढीया चढने में वक्त लग सकता है,लेकिन वैवाहिक बंधन की पवित्र उॅचाई से तलाक की गहरी खाई मे कूदने में जराभी वक्त नहीं लगता है, इसलिए रिश्ते में हम दो होते हुए भी हम एक है,इस बात को हमेशा दिमाग में रखनी चाहिए क्योंकि दांपत्य का रिश्ता सृष्टि का संुदरतम् रिश्ता है ,छोट-मोटी  समस्या तो हर वैवाहिक जीवन में आती है इन समस्याओं से निकलना ही जिंदगी है, हमेशा इस रिश्ते में प्यार, सम्मान, गरिमा व भरोसे की मजबूत दीवार को कायम रखे ।












 भुवनेश्वरी मालोत
                       


11 टिप्‍पणियां:

sangita ने कहा…

सार्थक व् सारगर्भित पोस्ट है ,जीवन के सत्य को परिभाषित करती हुई| आभार |

vidya ने कहा…

शुक्रिया...
सार्थक रचना..

वन्दना ने कहा…

सार्थक व् सारगर्भित पोस्ट

Vikram Singh ने कहा…

सारगर्भित रचना
vikram7: महाशून्य से व्याह रचायें......

RITU ने कहा…

शिखा ,बहुत अच्छा लिखा है तुमने..!
kalamdaan.blogspot.com

डा. श्याम गुप्त ने कहा…

सत्यं शिवं सुन्दरम...

amrendra "amar" ने कहा…

बहुत सुन्दर !

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

वाह!
बहुत बढ़िया!
अपनी सुविधा से लिए, चर्चा के दो वार।
चर्चा मंच सजाउँगा, मंगल और बुधवार।।
घूम-घूमकर देखिए, अपना चर्चा मंच
लिंक आपका है यहीं, कोई नहीं प्रपंच।।
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल बुधवार के चर्चा मंच पर भी होगी!

Dimple Maheshwari ने कहा…

nice

Dimple Maheshwari ने कहा…

nice

bhuneshwari malot ने कहा…

subko aabhar