सोमवार, 2 जनवरी 2012

घर की इज़्ज़त वो भी है और मैं भी हूँ


मुहब्बत  में घायल वो भी है और मैं भी हूँ,
वस्ल के लिए पागल वो भी है और मैं भी हूँ,
तोड़ तो सकते हैं सारी बंदिशें ज़माने की,
लेकिन घर की इज़्ज़त वो भी है और मैं भी हूँ,

{वस्ल = मिलन}

"ब्लॉगर्स मीट वीकली
(24) Happy New Year 2012"
में आयें .
आपको यहाँ कुछ नया और हट कर मिलेगा .

2 टिप्‍पणियां:

शिखा कौशिक ने कहा…

great post with great message .thanks

veerubhai ने कहा…

सजीव अभिव्यक्ति सुन्दर मनोहर .नव वर्ष मुबारक .