शुक्रवार, 27 जनवरी 2012

बसंत ऋतु आई है .... डा श्याम गुप्त.....

  बसंत  ---- बागों में, वनों में,सुधियों में बगरा हुआ रहता है और समय आने पर पुष्पित-पल्लवित होने लगता है .....प्रस्तुत है ..बसंत पंचमी पर एक रचना .....वाणी की देवी .सरस्वती वन्दना से....
        
                    सरस्वती वन्दना 

जो कुंद इंदु तुषार सम सित हार, वस्त्र से आवृता ।
वीणा है शोभित कर तथा जो श्वेत अम्बुज आसना ।
जो ब्रह्मा शंकर विष्णु देवों से सदा ही वन्दिता ।
 माँ शारदे ! हरें श्याम 'के तन मन ह्रदय की मंदता ।।

                   बसंत ऋतु आई है ....
 
                  ( घनाक्षरी छंद )
     
गायें कोयलिया तोता मैना बतकही करें ,           
कोपलें लजाईं , कली कली शरमा रही |

झूमें नव पल्लव, चहक रहे खग  वृन्द ,

आम्र बृक्ष बौर आये,  ऋतु हरषा रही|

नव कलियों पै हैं, भ्रमर दल गूँज रहे,

घूंघट उघार कलियाँ भी मुस्कुरा रहीं |

झांकें अवगुंठन से, नयनों के बाण छोड़ ,

विहंस विहंस ,  वे मधुप को लुभा रहीं ||


सर फूले सरसिज, विविध विविध रंग,

मधुर मुखर भृंग, बहु स्वर गारहे |

चक्रवाक वक जल कुक्कुट औ कलहंस ,

करें कलगान, प्रात गान हैं सुना रहे |

मोर औ मराल, लावा  तीतर चकोर बोलें,

वंदी जन मनहुं,  मदन गुण गा रहे |

मदमाते गज बाजि ऊँट, वन गाँव डोलें,

पदचर यूथ ले, मनोज चले आरहे ||


पर्वत शिला पै गिरें, नदी निर्झर शोर करें ,

दुन्दुभी बजाती ज्यों, अनंग अनी आती है |

आये ऋतुराज, फेरी मोहिनी सी सारे जग,

जड़ जीव जंगम मन, प्रीति मदमाती है |

मन जगे आस,  प्रीति तृषा  मन भरमाये ,

नेह नीति रीति, कण कण सरसाती है |

ऐसी बरसाए प्रीति रीति, ये बसंत ऋतु ,

ऋषि मुनि तप नीति, डोल डोल जाती है ||


लहराए क्यारी क्यारी,सरसों गेहूं की न्यारी,

हरी पीली ओड़े  साड़ी,  भूमि इठलाई  है |

पवन सुहानी, सुरभित सी सुखद सखि !

तन मन  हुलसे,  उमंग मन छाई है |

पुलकि पुलकि उठें, रोम रोम अंग अंग,

अणु अणु प्रीति रीति , मधु ऋतु लाई है |

अंचरा उड़े सखी री, यौवन तरंग उठे,

ऐसी मदमाती सी, बसंत ऋतु आई है ||

                                                              ----चित्र ..निर्विकार  एवं गूगल साभार
             

4 टिप्‍पणियां:

ईं.प्रदीप कुमार साहनी ने कहा…

बहुत ही उम्दा प्रस्तुति ।
मेरे ब्लॉग में आपका सादर आमंत्रण है ।
मेरी कविता

वन्दना ने कहा…

उम्दा प्रस्तुति ………बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनायें.

sangita ने कहा…

उम्दा प्रस्तुति ।
मेरे ब्लॉग में आपका सादर आमंत्रण है ।

डा. श्याम गुप्त ने कहा…

धन्यवाद ..वन्दना जी, प्रदीप जी व सन्गीता जी.....