मंगलवार, 10 जनवरी 2012

काहे मुरली श्याम बजाये .......डा श्याम गुप्त का पद......

काहे मुरली श्याम बजाये |
सांझ सवेरे बजे  मुरलिया अति ही रस बरसाए |
रस बरसे मेरा तन मन भीगे अंतरघट सरसाये |
रस भीजै चूल्हे की लकड़ी आग पकड़ नहीं पाए |
फूंक फूंक मेरा जियरा धड़के चूल्हा बुझ बुझ जाए |           
सास  ननद सब ताना मारें, देवर  हंसी  उडाये |,
सजन प्रतीक्षा करे खेत पर भूखा पेट सताए |
श्याम' बने कैसे मेरी रसोई  श्याम उपाय बताये |
बैरिन मुरली  श्याम अधर चढ़ तीनों लोक नचाये ||

5 टिप्‍पणियां:

Pallavi ने कहा…

वाह बहुत ही मनभावन अभिव्यक्ति ...समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है

रविकर ने कहा…

बहुत बहुत बधाई |
बढ़िया प्रस्तुति ||

RITU ने कहा…

मनभावन पंक्तियाँ..
kalamdaan.blogspot.com

sangita ने कहा…

mohak post hae.

डा. श्याम गुप्त ने कहा…

धन्यवाद...पल्लवी जी, रितु जी, सन्गीता जी व रविकर ......