रविवार, 4 सितंबर 2011

पूनम पाण्डेय से पूछे गये सवाल से चीख जैसी किलकारियाँ तक का सफरनामा!



दिनांक 23 जुलाई 2011 को पर शिखा कौशिक द्वारा पूनम पाण्डेय से पूछे गये सवालों से एक सिलसिला आरंभ हुआ था जो भारतीय नारी ब्लाग के रूप में आपके सामने आया था ।


इसकी यात्रा का यह सिलसिला बीते कल एक महत्वपूर्ण मोड पर था , इस ब्लाग के लिये वह एक विशेष दिवस था जिसकी आहट हममें से कोई नही जान सका ।


आज इस महत्व को मैं भी तब अनायास ही जान सका जब इस ब्लाग पर नयी पोस्ट चीख जैसी किलकारियाँ का प्रबंधन करने अपने डैश बोर्ड पर जा पहुँचा। डैश बोर्ड पर जैसे ही संदेशों का प्रबंधन करे विकल्प पर चटका लगाया तो यह देखकर सुखद आश्चर्य हुआ कि भारतीय नारी ब्लाग पर अब सौ अधिक संदेशों की पूँजी इकट्ठा हो चुकी है।


संदेशो की सूची के विस्तार में गया तो यह रोचक आँकडा नजर आया कि इस ब्लाग सौवीं पोस्ट मादा भ्रूण हत्या पर मेरे द्वारा लिखी गयी पंक्तियाँ चीखों जैसी किलकारियाँ! है।


मेरे लिये यह गौरव का क्षण अनजाने ही आ गया कि सुश्री शिखा कौशिक के द्वारा जिस पहली पोस्ट के साथ भारतीय नारी की यात्रा को उन्होंने आरंभ किया था उसमें सौंवा पडाव मेरी रचना के रूप में रहा। बधाई! आप सब योगदानकर्ताओं को , शिखा जी को और आप सभी पाठकों को जिनके सक्रिय सहयोग से सैकडे की यह यात्रा इतनी जल्दी पूरी हो सकी।


आशा करता हूँ कि आप सबके सहयोग और आर्शिवाद से इस ब्लाग पर एक हजारवीं पोस्ट भी इसी तरह जल्दी ही प्रकाशित होगी। एक बार फिर आप सबको बधाई।

4 टिप्‍पणियां:

शिखा कौशिक ने कहा…

ashok ji -this is really a great achievement .congratulation to all our respected members and followers ......and great readers .your this post reminded me this blog's memories .thanks a lot again for this post .

virendra ने कहा…

nice post,thanks

शालिनी कौशिक ने कहा…

अशोक जी आपने इस बात पर ध्यान दिला कर हम सभी के उत्साह में अभूत पूर्व वृद्धि की है.आप को व् नारी ब्लॉग के सभी योगदान कर्ताओं को बहुत बहुत शुभकामनायें

अभिषेक मिश्र ने कहा…

बधाई.