बुधवार, 7 सितंबर 2011

क्या प्रेम और आकर्षण में भिन्नता नहीं कर पाती हैं नारियां ?

फ़र्क़ है तो बस शोध का फ़र्क़ है।

हम जिस बात को मानना चाहते हैं बस यूं ही मान लेते हैं किसी के बताने भर से।
किसी ने कह दिया कि श्री रामचंद्र जी ने सीता माता की अग्नि परीक्षा ली थी और फिर गर्भावस्था में निकाल दिया था और हम मान लेते हैं कि हां ऐसा ही हुआ होगा।
हम बताने वाले से यह नहीं पूछते कि भाई, हिंदू गणना के अनुसार श्री रामचंद्र जी हुए थे 12 लाख 76 हज़ार साल पहले और आप बता रहे हैं तो इतनी पुरानी बात आप तक कैसे पहुंची ?
इतने लंबे अर्से में बात पहुंचते पहुंचते कुछ की कुछ भी तो हो सकती है ?
एक आदमी कहता है कि राधा जी से श्री कृष्ण जी के प्रेम संबंध थे, कोई कहता है उनसे श्री कृष्ण जी ने आजन्म विवाह नहीं किया और कोई कहता है कि कर लिया था और कुछ यह भी कहते हैं कि राधा रायण की पत्नी और श्री कृष्ण जी की मामी थीं।
हम उस बताने वाले से यह नहीं पूछते कि भाई श्री कृष्ण जी को हुए 5 हज़ार साल हो गए हैं। हम तक बात किसने पहुंचाई ?
भारतीय ग्रंथों में सबसे पुराने वेद हैं और उनमें इस तरह की किसी घटना का उल्लेख नहीं है न तो श्री रामचंद्र जी के बारे में और न ही श्री कृष्ण जी के बारे में और जिन ग्रंथों में ये बातें लिखी मिलती हैं, उनकी उम्र चंद सौ साल से ज़्यादा नहीं है।
अगर इन महापुरूषों के साथ कोई अच्छा गुण जोड़कर बताया जाए तो एक बार उसे तो बिना किसी शोध के मान लेने में कोई हर्ज नहीं है लेकिन जो बात हम आज अपने लिए ठीक नहीं मानते, उसे अपने से अच्छे अपने पूर्वजों के बारे में हम मान लेते हैं और कोई खोज नहीं करते।
यह तो हुई मानने की बात कि मानना चाहें तो हम बिना किसी सुबूत के ही मान लेते हैं और न मानना चाहें तो चाहे सारी दुनिया साबित कर दे कि शराब, गुटखा, तंबाकू और ब्याज, ये चीज़ें इंसान की सेहत और अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर देती हैं लेकिन हम मानते ही नहीं।
बुरे लोग अंग्रेज़ों में भी हैं लेकिन उनके बहुसंख्यक लोगों का स्वभाव शोध करने का बन चुका है।
बात चाहे कितनी ही मामूली क्यों न हो लेकिन बात मानने से पहले वे यह ज़रूर देखेंगे कि बात में सच्चाई कितनी है ?
और यह हमारे लिए कितनी हितकारी है ?
मस्लन औरत की वफ़ा के साथ उसकी बेवफ़ाई के क़िस्से भी सदा से ही आम हैं और बेवफ़ा औरत के लिए ही भारत में त्रिया चरित्र बोला जाता है लेकिन अंग्रेज़ों ने इस पर भी शोध कर डाला।
देखिए आप भी यह दिलचस्प शोध :

धोखा देने में महिलाएं भी नहीं हैं कुछ कम

आमतौर पर केवल पुरुषों के विषय में ही यह माना जाता है कि वह अपने प्रेम-संबंधों को लेकर संजीदा नहीं रहते. वह जरूरत पड़ने पर अपने साथी को धोखा देने से भी नहीं चूकते. लेकिन हाल ही में हुए एक अध्ययन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हमारी मानसिकता बिल्कुल बेबुनियाद है क्योंकि विश्वासघात और संबंधों से खेलना केवल पुरुषों का ही शौक नहीं है बल्कि महिलाएं भी इन तौर-तरीकों को अपनाने से नहीं हिचकतीं. प्रेमी को धोखा देने और उसके पीठ पीछे दूसरा प्रेम-संबंध बनाने में महिलाएं पुरुष के समान नहीं बल्कि उनसे कहीं ज्यादा आगे हैं.
डेली एक्सप्रेस में छपे एक शोध के नतीजों ने यह खुलासा किया है कि केवल पुरुष नहीं बल्कि महिलाएं भी अपने रिश्ते की गंभीरता को समझने में चूक कर बैठती हैं. लव-ट्राएंगल जैसे संबंधों में महिलाओं की भागीदारी अधिक देखी जा सकती है. इस सर्वेक्षण में 2,000 लोगों को शामिल किया गया था जिनमें से लगभग एक चौथाई महिलाओं ने यह बात स्वीकार की है कि उन्होंने एक ही समय में एक से ज्यादा पुरुषों के साथ प्रेम-संबंध स्थापित किए हैं. जबकि केवल 15% पुरुषों ने ही यह माना है कि उन्होंने एक बार में दो से ज्यादा महिलाओं से प्रेम किया है.

शोधकर्ताओं ने पाया कि लव-ट्राएंगल में महिलाओं की अधिक संलिप्तता का कारण यह है कि वह पुरुषों की अपेक्षा जल्द ही भावनात्मक तौर पर जुड़ जाती हैं जिसके कारण वह प्रेम और आकर्षण में भिन्नता नहीं कर पातीं. फेसबुक और ट्विटर जैसी सोशल नेटवर्किंग साइटों के आगमन से भी लोगों की जीवनशैली बहुत हद तक प्रभावित हुई है. ऐसी साइटों पर पर अधिक समय बिताने के कारण महिलाएं विभिन्न स्वभाव और व्यक्तित्व वाले पुरुषों के संपर्क में आ जाती हैं. लगातार बात करने और एक-दूसरे के संपर्क में रहने के कारण वह उनके साथ जुड़ाव महसूस करने लगती हैं और अपनी भावनाओं पर काबू ना रख पाने के कारण वह जल्द ही लव ट्राएंगल के फेर में पड़ जाती हैं.

इस शोध की सबसे हैरान करने वाली स्थापना यह है कि अधिकांश लोग यह मानते हैं कि एक समय में दो या दो से अधिक लोगों से प्यार करना और उनके साथ संबंध बनाना कोई गलत बात नहीं हैं. व्यक्ति चाहे तो वह दो लोगों से प्यार कर सकता है.
महिलाओं के विषय में एक और बात सामने आई है कि वे अधिक आमदनी वाले पुरुषों की तरफ ज्यादा आकर्षित होती हैं. धन संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए महिलाएं आर्थिक रूप से सुदृढ़ पुरुष को मना नहीं कर पातीं.
Source >  http://lifestyle.jagranjunction.com/2011/08/26/women-also-cheats-love-triangle/
ग़र्ज़ बात जो भी हो हमें उसे मानने से पहले यह ज़रूर देख लेना चाहिए कि इसमें सच्चाई कितनी है ? 

यह तो हुई बेवफ़ाई की बात,


आप पकड़ सकते हैं अपने जीवन साथी को बेवफ़ाई करते हुए,
जानिए कैसे पकड़ा जाता है जीवन साथी की बेवफ़ाई को ?

13 टिप्‍पणियां:

रविकर ने कहा…

जात - पांत न देखता, न ही रिश्तेदारी,
लिंक नए नित खोजता, लगी यही बीमारी |

लगी यही बीमारी, चर्चा - मंच सजाता,
सात-आठ टिप्पणी, आज भी नहिहै पाता |

पर अच्छे कुछ ब्लॉग, तरसते एक नजर को,
चलिए इन पर रोज, देखिये स्वयं असर को ||

आइये शुक्रवार को भी --
http://charchamanch.blogspot.com/

Sujata ने कहा…

पढ कर अच्छा लगा।

Ojaswi Kaushal ने कहा…

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veerubhai ने कहा…

शुक्रिया !रेखा जी !अच्छी पोस्ट डॉ अनवर ज़माल जी !विमर्श और सोच को उकसाती .
बृहस्पतिवार, ८ सितम्बर २०११
गेस्ट ग़ज़ल : सच कुचलने को चले थे ,आन क्या बाकी रही.
ग़ज़ल
सच कुचलने को चले थे ,आन क्या बाकी रही ,

साज़ सत्ता की फकत ,एक लम्हे में जाती रही ।

इस कदर बदतर हुए हालात ,मेरे देश में ,

लोग अनशन पे ,सियासत ठाठ से सोती रही ।

एक तरफ मीठी जुबां तो ,दूसरी जानिब यहाँ ,

सोये सत्याग्रहियों पर,लाठी चली चलती रही ।

हक़ की बातें बोलना ,अब धरना देना है गुनाह

ये मुनादी कल सियासी ,कोऊचे में होती रही ।

हम कहें जो ,है वही सच बाकी बे -बुनियाद है ,

हुक्मरां के खेमे में , ऐसी खबर आती रही ।

ख़ास तबकों के लिए हैं खूब सुविधाएं यहाँ ,

कर्ज़ में डूबी गरीबी अश्क ही पीती रही ,

चल ,चलें ,'हसरत 'कहीं ऐसे किसी दरबार में ,

शान ईमां की ,जहां हर हाल में ऊंची रही .

गज़लकार :सुशील 'हसरत 'नरेलवी ,चण्डीगढ़

'शबद 'स्तंभ के तेहत अमर उजाला ,९ सितम्बर अंक में प्रकाशित ।

विशेष :जंग छिड़ चुकी है .एक तरफ देश द्रोही हैं ,दूसरी तरफ देश भक्त .लोग अब चुप नहीं बैठेंगें
दुष्यंत जी की पंक्तियाँ इस वक्त कितनी मौजू हैं -

परिंदे अब भी पर तौले हुए हैं ,हवा में सनसनी घोले हुए हैं ।

mahendra srivastava ने कहा…

अच्छा विषय चुना है आपने।
मुझे भी लगता है कि आजकल सोशल नेटवर्किंग का साइड इफेक्ट ठीक नहीं...

Ravi Rajbhar ने कहा…

Apne bahut hi achche subject par ..
damdar prastuti di hai..

ek shath do logo se pyar karne wali bat gale se niche nahi utari...
is liye pani pina pada.

Ravi Rajbhar ने कहा…

2-08-2011/ Sansad/Chhatisgarh
_____aanar nahi harar killin___

apki adhi bat par me purn sahmat hun.
ki samman ke nam bar ek ladki ka katla nahi kiya jana chahiye..!!

dusari bat apne kahi hi..
jo ghar se bhag jata hi ..
unke gharwalo ko bhi apni gireban me jhank kar dekhna chahiye.. kahi na kahi unme bhi kami hi jo..!!!

me apki is bat ko sire se nakarta hun..!!
ap us maa-baap ya ghar walo ko kabhi dosh nahi de sakti ..jisane ek beti/bete ko janm dekar use is kabil banay ki o apne fayde ya nuksan ki bat sochne lage..???
unki har jarurato ko pura kiya.
khud kast sahe par unke bhavisya ki chinta ki..!

bas ek hi kami rah jati hi.. sex??
ghar se bhagne wali ladkiya 18-20 shal ki hi hoti hin..
kya ap samarthan karengi ki 18 shal khatma hote-2 mam-bap ko usaki shadi kar de..!!
jisase ghar se bhagne ki naubat na aye?????

Suresh kumar ने कहा…

बहुत ही अच्छी जानकारी ....

SM ने कहा…

we must learn to question everything.
nice article

डॉ0 ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ (Dr. Zakir Ali 'Rajnish') ने कहा…

विचारणीय।

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क्‍यों डराती है पुलिस ?
घर जाने को सूर्पनखा जी, माँग रहा हूँ भिक्षा।

डॉ0 ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ (Dr. Zakir Ali 'Rajnish') ने कहा…

विचारणीय।

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क्‍यों डराती है पुलिस ?
घर जाने को सूर्पनखा जी, माँग रहा हूँ भिक्षा।

अशोक कुमार शुक्ला ने कहा…

Aaj kai dino se us blig par kuch bhi prakashit nahi huaa. Kya baat hai.

Sab kych theet to. Hai na?

डा. श्याम गुप्त ने कहा…

क्योंकि ..जनश्रुति सदियों के अनुभव..ज्ञान..व्यवहार..व जन जन के विश्वास की कसौटी पर कसी होती है ..जबकि शोध सिर्फ चंद उदाहरणों पर बिना किसी अनुभव के होते हैं .....और वे भी कुछ समय बाद विवादास्पद होजाते हैं.....