सोमवार, 10 अक्टूबर 2011

जीवमातृका पन्चकन्या तो बचा ||

जीवमातृका पन्चकन्या तो बचा ||

जीवमातृका  वन्दना, माता  के  सम पाल |
जीवमंदिरों को सुगढ़, करती सदा संभाल ||
http://upload.wikimedia.org/wikipedia/commons/6/61/Stone_sculpt_NMND_-20.JPG 
शिव और जीवमातृका

धनदा  नन्दा   मंगला,   मातु   कुमारी  रूप |
बिमला पद्मा वला सी, महिमा अमिट-अनूप ||
https://lh3.googleusercontent.com/-ks78KCkMJR4/Tj_QMkR5FTI/AAAAAAAAAPI/PFy_h6xRHYY/bhrun-hatya_417408824.jpgभ्रूण-हत्या
माता  करिए  तो  कृपा, सातों  में  से  एक |
भ्रूणध्नी माता-पिता,  देते असमय फेंक ||
http://aditikailash.jagranjunction.com/files/2010/06/bhrun-hatya.jpgभ्रूण-हत्या 
कुन्ती   तारा   द्रौपदी,  लेशमात्र   न   रंच |
आहिल्या-मन्दोदरी , मिटती कन्या-पन्च |
http://www.barodaart.com/Oleographs%20Mythology/PanchKanya-M(1).jpgपन्च-कन्या
सातों  माता  भी  नहीं, बचा  सकी  गर  पाँच |
सबकी महिमा  पर  पड़े,  मातु  दुर्धर्ष  आँच |

शुक्रवार, 7 अक्टूबर 2011

तिरस्कृत होती ‘‘भारतीय नारी’’ में महिलाओं का योगदान भाग -2

पिछली पोस्ट में हमने जाना था कि किस प्रकार सिर्फ महिलाओं के लिये बने एक ऐसे अस्पताल में अपनी कुछ कारस्तानियों के कारण इलाज के लिये सुश्री शिखा कौशिक द्वारा भरती करायी गयी एक मरीज को ‘नारी का कविता ब्लाग’ नामक महिलाओं के अस्पताल से धकियाकर बाहर निकाल दिया गया और इस घटना से तिलमिलाकर रह गयीं सुश्री शिखा जी ने ऐसी महिला मानसिक रोगियों का इलाज करने के लिये ‘भारतीय नारी ’ नामक एक नये अस्पताल की नींव 23 जुलाई 2011 को रखते हुये उसमें पहली मरीज के रूप मे ‘पूनम पाण्डे से पूछे गये कुछ प्रश्न’ भरती कराया था ।

जैसा कि इस सामूहिक ब्लाग पर अंकित था भारतीय नारी के सरोकारों से संबंधित कोई भी सदस्य इसमें प्रतिभाग करने हेतु सदस्यता आवेदन कर सकता था और उसे व्यवस्थापिका महोदया द्वारा सदस्यता लिंक भी प्रेषित किये गये।

इस प्रकार इस सामूहिक चिट्ठे से कुल 34 योगदानकर्ता जुडे जिनमें से 19 महिला सदस्या थी ं और 15 पुरूष सहयोगी। हम पिछली पोस्ट में यह जान चुके है कि इससे जुडने वाले 15 पुरूष सहभागियों में से 12 ने अलग अलग समय पर कोई न कोई पोस्ट लिखकर इस सामूहिक ब्लाग में अपना सक्रिय योगदान दिया परन्तु तीन पुरूष योगदानकर्ता ऐसे रहे जिन्होंने ब्लाग में योगदानकर्ता के रूप मे जुडने के बाद अपने कर्तब्य /नैतिक उत्तरदायित्व की इतिश्री समझ ली।

आज चर्चा कर रहे हैं इस सामूहिक ब्लाग से जुडने वाली महिला योगदानकर्ताओ की और उनकी कारस्तानियों की।
इस सामूहिक ब्लाग से जुडने वाली कुल महिलाओं की संख्या 19 है जिसमें से मात्र 7 महिलाओं ने ही इसमें जुडने के बाद इसमें कभी न कभी कोई पोस्ट अथवा टिप्पणी देकर अपना सक्रिय योगदान अंकित कराया है । शेष 12 महिला योगदानकर्ताओं के द्वारा अब तक इसमें कोई भी पोस्ट नहीं लगायी है अतः उनका योगदान मात्र इस ब्लाग से जुडने भर तक ही सीमित रहा है। इसके बाद उन्होंने भी अपने कर्तब्य /नैतिक उत्तरदायित्व की इतिश्री समझ ली।

यह आवश्यक नहीं है कि आप किसी सामूहिक चिट्ठे पर नयी पोस्ट लगाकर ही उसमें सहयोग करें । आप प्रकाशित पोस्टों पर टिप्पणी के रूप में अपने अभिमत अंकित करते हुये भी उसके विकास में सहयोग कर सकते हैं परन्तु इस मोर्चे पर भी ये बारह महिला साथी कभी नहीं दिखलाई पडी है।

इस प्रकार आंकडों के आधार पर यह तथ्य स्वतः सिद्ध है कि इस सामूहिक ब्लाग पर इसके जन्म के समय से ही इससे जुडने वाली कुछ महिला योगदानकर्ताओं ने इसे तिरस्कृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह किया है।

भारतीय नारी ब्लाग से जुडने वाली कुछ महिला योगदानकर्ताओं में नैतिकता की यह सीमा है कि कुछ ब्लागरों की अनेक शोधपूर्ण प्रयासों से संग्रहीत सामग्री की कापी पेस्टिंग करते हुये अपने निजी ब्लाग पर गौरवपूर्ण ढंग से नयी पोस्ट लिखी और उसमें मूल योगदानकर्ताओं द्वारा किये गये श्रम की महत्ता को सम्मानित करने के उद्देश्य से उस सामग्री संग्रहकर्ता का नाम तक लिखना उचित नहीं समझा। ( अनावश्यक विवाद को टालने के उद्देश्य से उनके नाम का अंकन नहीं कर रहा हूँ इस ब्लाग पर विख्यात महिला लेखिकाओं के संबंध में किश्तों में लिखे मेरे आलेखों की टिप्पणियों में आपको इसका आभास हो जायेगा )

इस ब्लाग की स्थापना के तुरंत बाद माह अगस्त के लिये व्यवस्थपकों द्वारा ‘मेरी बहन’ विषय निर्धारित किया गया और माह सितम्बर के लिये महिला भ्रूण हत्या सहित अनेक विषय निर्धारित किये गये । प्रारंभिक सक्रियता के कारण इस ब्लाग की सौ पोस्ट बहुत कम समय में ही जारी हो गयी ं परन्तु योगदानकर्ताओ की निरन्तर बढती उदासीनता के कारण माह सितम्बर में निर्धारित विषय पर सामग्री का ही अभाव रहा।

आज उदासीनता की स्थिति यह है कि माह अक्टूबर का भी लगभग एक सप्ताह ब्यतीत हो चुका हे परन्तु अब तक इस माह के विषय का चयन /निर्धारण भी नहीं हो सका है। आज भी ब्लाग के मुख पृष्ठ पर अगस्त और सितम्बर माह के विषय की ही चर्चा दिखलायी पडती है।

इन सारे तथ्यों का ब्यौरा देने का आशय मात्र इतना है कि आप सभी योगदानकर्ताओ ने जिस उत्साह के साथ 23 जुलाई 2011 को इस ब्लाग को जन्म दिया था उस शिशु की उम्र अभी मात्र ढाई माह की है । किसी भी ढाई माह के शिशु की देखभाल में अगर इतनी कोताही बरती जायेगी तो निश्चित ही उस नवजात का भविष्य प्रश्नों के घेरे में ही रहेगा।

यह सत्य है कि किसी नवजात शिशु की देखभाल करने का प्रथम दायित्व उसके जन्तदाता का ही होता है परन्तु जन्मदाता की व्सस्तता या अन्य कार्यो से निजात न पाने का खामियाजा नवजात शिशु से भरवाने की बजाय किसी केयर टेकर की ब्यवस्था करना मुझे तो उचित जान पडता है।

अतः यह मेरी सहृदय इच्छा है कि किसी वािश्ठ सम्मानित महिला ब्लागर को इस ब्लाग के ब्यवस्थापकीय अधिकार प्रदान करते हुये ‘भारतीय नारी ’ नामक इस नवजात शिशु की परवरिष सुचारू रूप से करने की व्यवस्था की जाय अन्यथा यह नवजात ‘भारतीय नारी’ नामक ब्लाग भी भारतीय ब्लाग जगत में लावारिस के बिखरे पडे सैकडों नवजात ब्लागों की गति को प्राप्त हो सकता है।

ईश्वर करे ऐसा न हो! इसी शुभकामना के साथ विश्वाश करता हूँ कि पूर्व मे अंकित सुझाओं की ओर कोई न कोई महिला ब्लागर योगदानकर्ता अवश्य विचार करेगी।
आमीन!!

बुधवार, 5 अक्टूबर 2011

दुआ...


आप सभी को दुर्गा नवमी की हार्दिक शुभकामनाएं 
और साथ ही साथ बुराई पर अच्छाई की जीत की प्रतिक दशहरा पर्व की भी बधाईयां....
आप से निवेदन है कि अब मेरे दोनों ब्लाग निचे जो लिंक है वह फेसबुक पर उपलब्ध है तो मेरा आपसे अनुरोध है कि कृपया फेसबुक पर भी अनुसरण करें !! धन्यवाद !! 
http://neelkamal5545.blogspot.com/
http://neelkamalkosir.blogspot.com/


नीलकमल वैष्णव"अनीश" 

तिरस्कृत होती ‘‘भारतीय नारी’’ में पुरूषों का योगदान भाग -1

यह कहानी है उस एक ‘भारतीय नारी’ की जो पहले सिर्फ महिलाओं के लिये बने एक ऐसे अस्पताल में अपनी कुछ कारस्तानियों के कारण इलाज के लिये सुश्री शिखा कौशिक द्वारा भरती करायी गयी थीं । परन्तु ‘नारी का कविता ब्लाग’ नामक महिलाओं के इस अस्पताल से सुश्री शिखा कौशिक के इस मरीज को धकियाकर बाहर निकाल दिया गया।

सुश्री शिखा जी तिलमिलाकर रह गयीं और उन्होने ऐसी महिला मानसिक रोगियों का इलाज करने के लिये ‘भारतीय नारी ’ नामक एक नये अस्पताल की नींव 23 जुलाई 2011 को रखी और उसमें भरती होने वाली पहली मरीज थी ‘पूनम पाण्डे से पूछे गये कुछ प्रश्न’।

जैसा कि इस सामूहिक ब्लाग पर अंकित था भारतीय नारी के सरोकारों से संबंधित कोई भी सदस्य इसमें प्रतिभाग करने हेतु सदस्यता आवेदन कर सकता था और उसे व्यवस्थापिका महोदया द्वारा सदस्यता लिंक भी प्रेषित किये गये।

इस प्रकार इस सामूहिक चिट्ठे से कुल 34 योगदानकर्ता जुडे जिनमें से 19 महिला सदस्या थी ं और 15 पुरूष सहयोगी। यह स्वाभाविक सा तथ्य है कि किसी भी सामूहिक चिट्ठे से जुडने के उपरांत उसके उत्थान ,प्रसार और गुणवत्ता में सक्रिय सहयोग हेतु प्रत्येक सदस्य का एक समान नैतिक उत्तरदायित्व निर्धारित होता है।

इस प्रकार का नैतिक उत्तरदायित्व निर्वहन करते हुये 15 पुरूष सहभागियों में से 12 ने अलग अलग समय पर कोई न कोई पोस्ट लिखकर इस सामूहिक ब्लाग में अपना सक्रिय योगदान दिया। हांलांकि प्रारंभ में कुछ एक अवसर ऐसे आये जब भारतीय नारी को समर्पित इस ब्लाग पर प्रकाशित इं0 सत्यम शिवम के आलेख आज स्त्री बस वासना की पूर्ति भर है क्या? पर प्रकाशित चित्रों को लेकर वरिष्ठ ब्लागर श्रीयुत दिनेशरायजी द्विवेदी जी द्वारा अपना आर्शिवाद देते समय कुछ ऐसी शब्दावली का प्रयोग किया जो व्यंग्यात्मक सी होने के साथ गहन विचारयुक्त थी। देखेंः-

इस तरह के चित्रों से इस पोस्ट को सुसज्जित करने के आप के साहस को प्रणाम है?

बस इस अर्शिवाद के बाद आदरणीय दिनेशराय जी द्विवेदी फिर कभी इस ब्लाग पर अपना आर्शिवचन देने नहीं आये।
इसी तरह भारतीय नारी पर प्रकाशित नारी देह ब्यापार पर प्रकाशित एक पोस्ट के साथ लगे एक पुलिस महिला के साथ मुहँ छिपाये देह ब्यापार में लिप्त महिलाओं के चित्र पर महिलाओं के सम्मान को बनाये रखने के उद्देश्य से कुछ आलोचनात्मक टिप्पणियां मैने भी की जिसपर इस ब्लाग की संस्थापक सहित अन्य सुधी पाठकों का सहयोग माँगा परन्तु किसी भी महिला अथवा नारी सम्मान के फरमाबरदारों का कोई संदेश अथवा टिप्पणी नहीं मिली अपितु सम्मानित लेखक महोदय जी ने यह कहा कि मैं उन पुरूषों के चित्र हासिल करूं जो इस ब्यवसाय में लिप्त हैं उन्हें भी स्थान दिया जायेगा।

अपेक्षकृत कुछ कडे शब्दो में प्रतिउत्तर भी प्राप्त हुये। मेरा मानना यह था कि यह सब इस ब्लाग के गुणात्मक विकास के लिये आवश्यक था सो समयानुसार घटित हो रहा था।

इस सामूहिक ब्लाग से जुडे 3 पुरूष साथियों ने इसमें जुडने के बाद अब तक कोई भी पोस्ट इसमें नहीं लगायी है अतः उनका योगदान मात्र इस ब्लाग से जुडने भर तक ही सीमित रहा।

यह आवश्यक नहीं है कि आप किसी सामूहिक चिट्ठे पर नयी पोस्ट लगाकर ही उसमें सहयोग करें । आप प्रकाशित पोस्टों पर टिप्पणी के रूप में अपने अभिमत अंकित करते हुये भी उसके विकास में सहयोग कर सकते हैं परन्तु इस मोर्चे पर भी ये तीन पुरूष साथी कभी नहीं आये ।

इस प्रकार इस सामूहिक ब्लाग पर इसके जन्म के समय से ही इससे जुडने वाले कुछ पुरूष योगदानकर्ताओं ने इसे तिरस्कृत ही किया है ।

आज की चर्चा को यही विराम देते हुये अवगत कराना चाहता हूँ कि अगली चर्चा इस सामूहिक ब्लाग से जुडने वाली महिला योगदानकर्ताओ की होगी जिसमें उनके सक्रिय सहयोग का भी आकलन प्रस्तुत किया जायेगा ।

मंगलवार, 4 अक्टूबर 2011

नारीष्षक्ति का प्रतीक - नवरात्री





  भारतीय नारी ब्लाग के सभी सदस्यों को मेरी ओर से नवरात्री के पावन पर्व पर हृादिक ष्षुभ कामनाए ।
  बहनो


दुर्गा शक्ति का एक रूप है जब देवता महिषासुर से संग्राम में हार गये और उनका ऐश्वर्य,श्री और स्वर्ग सब कुछ छीन गया तब वे दीनहीन दशा में भगवान के पास पहुचें भगवान ने सुझाव दिया कि तुम सब अपनी-अपनी शक्तियों को एक स्थान पर रख दो। शक्ति के सामूहिक  एकीकरण से मॉ दुर्गा का जन्म हुआ,उनके अनेक सिर व हाथ थे प्रत्येक हाथ मे अस्त्र-शस्त्र थे सिंह जो साहस का प्रतिक है, उनका वाहन है। ऐसी शक्ति की देवी ने महिषासुर  का वध किया जिससे उसको महिषासुर मर्दनी के नाम से जाना जाता है।
       यह कथा संगठन की है जो हम बहनो से जुडी है आज हम सभी बहने अपनी-अपनी शक्तियों को एक जगह पर संगठित करके  मांॅ दुर्गा की तरह ही महिषासुरी  समस्याओं से लडने कें लिए एक  जुट  हो जाए तो अवश्य ही नारी जाति का उत्थान होगा। बहनो अपने अधिकारो को समझे,गलत परम्पराओं का विरोध करे ।महिला महिला की दुश्मन  न बनकर उनकी सहयोगी बने।तभी इस त्यौेहार की सार्थकता है



                                                           प्रेषकः-
                                                          श्रीमति भुवनेश्वरी मालोत
                                                          अस्पताल चैराहा
                                                          महादेव कॅालोनी
                                                          बांसवाडा राज




लड़कियों सावधान: कहीं कोई आपको देख तो नहीं रहा... How to Detect Hidden Camera in Trial Room?


दोस्तों !

आज मुझे किन्ही राजीव जी का एक ईमेल आया, जिसमे बहुत अच्छी जानकारी दी हुई थी, सोचा कि आप सभी लोग भी इसे जाने तो बहुत अच्छा होगा. यह ईमेल इंग्लिश में था जिसे मैं यहाँ अपने हिसाब से अनुवाद कर के पेश कर रहा हूँ. 

यह ईमेल ख़ास तौर पे लड़कियों के लिए है क्योंकि अक्सर जब भी हम कपड़े लेने जाते हैं तो अपनी पसंद की ड्रेस को पहन के देखते हैं कि आखिर जो ड्रेस दिखने में सुन्दर है वो सच में हम पर भी खूबसूरत लगेगी या नहीं और उसका नाप वगैरह ठीक है या नहीं. पर हमारी इसी सोच का गलत फायदा अक्सर दुकान मालिक उठा लेता है और चोरी से आपका विडियो बना लेता है. इसके लिए कुछ उपाय हैं जिन्हें जान लेने के बाद आप जब भी किसी दुकान के ट्रायल रूम में अपने कपड़े बदलने जाएँ तो चौकन्ना रहें और खुद को ऐसे गिरोहों से बचा सकें जो आपका विडियो बना के इन्टरनेट पे न डाल सकें या आपको ब्लैक मेल न कर सकें. 

आखिर जागरूक होना जानकार होने से ज्यादा बेहतर होता है. 

आइये जानते हैं कि - 

ट्रायल रूम में छुपे हुए (hidden) कैमरे का कैसे पता लगाएं ?

ट्रायल रूम (या ड्रेसिंग रूम) में जब भी आप घुसें तो सबसे पहले अपने मोबाइल से एक कॉल लगाने की कोशिश करें, अगर कोई hidden camera उस रूम में होगा तो आपका कॉल नहीं लग पायेगा. ऐसा इसीलिए होता है क्योंकि जो hidden camera उसे किया जाता है वो fiber optic cable से संचालित होता है जो मोबाइल communication को बाधित करता है.

आज कल एक नए तरह का कैमरा भी उपयोग में लाया जा रहा है जिस का नाम pinhole camera है ये इतने छोटे होते हैं कि कहीं भी आसानी से लगाये जा सकते हैं. 

2-WAY MIRROR : 

एक ऐसा आइना जिसकी एक ओर से आप अपना प्रतिबिम्ब देख सकते हैं और दूसरी ओर से कोई दूसरा आपको देख सकता है.

जी हाँ ! जब भी आप किसी सार्वजनिक प्रसाधन (toilet), स्नान गृह (bathroom), होटल रूम, ड्रेसिंग रूम इत्यादि में जाती हैं तो ये हो सकता है कि जिस आईने के सामने आप कपड़े बदल रही हों उसकी दूसरी ओर से कोई आपको देख रहा हो. पर आप नहीं देख सकती कि कौन है जो आपको देखे रहा है क्योंकि यह आइना कुछ इस तरह का ही बनाया जाता है कि किसी के लिए ये महज एक आइना होता है तो किसी के लिए साधारण कांच. 

अब आप सोच रही होंगी कि आप कैसे जानेंगी कि आपके सामने लगा आइना साधारण आइना है या कुछ और ?

तो इसके लिए भी निश्चिन्त हो जाइये, क्योंकि इसका भी एक उपाय है. 

जब भी आप ऐसे किसी रूम में जाएँ जहां आप कपड़े चेंज करने वाली हों तो पहले आईने की सतह पे अपना नाख़ून रख के देखें, अगर आईने में आपके नाख़ून का प्रतिबिम्ब आपके नाख़ून से थोड़ी सी दूरी पे हो तो वह आइना बिलकुल साधारण है जिसमे कोई खतरा नहीं है. पर अगर आपका नाख़ून और उसका प्रतिबिम्ब एक दूसरे को touch करे तो समझ जाइये कि वह 2 - way mirror है, और कोई आपको देखने के लिए जरूर आईने के पीछे बैठा होगा. 

सतर्क हो जाइये और इस जानकारी को आप अपने दोस्तों, बहनों, बेटी, पत्नी और साथ में उन लड़कों को भी बताएं जिनकी महिला मित्र (गर्ल फ्रेंड) या बहने इत्यादि हों. 

और जानकारी के लिए इस पेज पे जाएँ आपको hidden camera के बारे में और भी कई जानकारियाँ प्राप्त होंगी - 


- महेश बारमाटे "माही"

शनिवार, 1 अक्टूबर 2011

तेरे लाज के घूँघट से


                                            

उमड़ आयी बदली 
तेरे लाज के घूँघट से 
द्वार पर  खड़ी तू 
बेतस बाट जोहती 
झलक गये तेरे केशू
तेरे आँखों के अर्पण से |

पनघट पे तेरा आना 
भेष बदल गगरी छलकाना 
छलक गयी गगरी तेरी 
तेरे लाज के घूँघट से |

सजीले पंख सजाना 
प्रतिध्वनित  वेग से 
झरकर गिर आयी 
तेरे पाजेब की रुनझुन से |

रागों को त्याग 
निष्प्राण तन में उज्जवल 
उस अनछुई छुअन में 
बरस गयी बदली 
तेरे लाज के घूँघट से 
उमड़ आयी बदली 
तेरे लाज के घूँघट से 
- दीप्ति शर्मा 


www.deepti09sharma.blogspot.com