बुधवार, 8 अगस्त 2012

जन्माष्टमी ---डा श्याम गुप्त के पद....



ब्रज  की भूमि भई है निहाल |
आनंद  कंद  प्रकट भये ब्रज में विरज भये ब्रज ग्वाल |
सुर  गन्धर्व  अप्सरा गावहिं,  नाचहिं   दै- दै  ताल |
आशिस देंय विष्णु शिव ब्रह्मा, मुसुकावैं  गोपाल |
जसुमति द्वारे बजे बधायो, ढफ ढफली खडताल  |
पुरजन परिजन हर्ष मनावें, जनमु लियो नंदलाल |
बाजहिं  ढोल  मृदंग  मंजीरा, नाचहिं ब्रज के बाल |
गोप गोपिका करें आरती,  झूमि  बजावैं   थाल |
सुर दुर्लभ छवि निरखि निरखि छकि श्याम' हू होय निहाल ||






सखी री मोरे अंगना आयो श्याम |
पीताम्बर कटि, मोरपखा सिर, छवि सांवरी ललाम |
चंचल चपल नैन कज़रारे, कानन  लटकन  लोल |
हरित मुरलिया अधरन  सोहे,  मधुरस घोले  बोल |
ठुमुकि-ठुमुकि पग नचे कन्हैया सुधि-बुधि बैठी खोय |
लग्यो नचावन कर गहि मोहन, मोहि लियो सखि मोय |
भरमाई  सखी  नैननि  सैननि, नटखट  नन्दकिशोर |
छींके चढ़ दधि-माखन  लूट्यो, मटुकी  दीन्हीं  फोर |
चेतति ही  जब पकरन धाई,  भाज्यो  नैन  नचाय  |
श्याम' श्याम-लीला चित-चितवत चित चकोर हरषाय ||




                                                                                   ---चित्र गूगल ..साभार .

4 टिप्‍पणियां:

Madan Saxena ने कहा…

बहुत सुंदर भावनायें और शब्द भी ...
बेह्तरीन अभिव्यक्ति ...!!
शुभकामनायें.

http://madan-saxena.blogspot.in/
http://mmsaxena.blogspot.in/
http://madanmohansaxena.blogspot.in/

रविकर फैजाबादी ने कहा…

जय श्री कृष्ण ||

शालिनी कौशिक ने कहा…

.बहुत सार्थक प्रस्तुति .श्री कृष्ण जन्माष्टमी की आपको बहुत बहुत शुभकामनायें . ऑनर किलिंग:सजा-ए-मौत की दरकार नहीं

डा. श्याम गुप्त ने कहा…

धन्यवाद ---शालिनी जी...रविकर एवं मदन जी ...जय वंशीवाले की....राधानंदन की...