शनिवार, 17 सितंबर 2011

बहुएं और बेटियाँ

मादा भ्रूण हत्या से संबंधित मात्र चार लाइनें “बहुएं और बेटियाँ”और “संबंध”आज प्रस्तुत कर रहा हूँ जिन्हें लिखा है रजनी अनुरागी जी ने जो दिल्ली विश्विद्यालय से हिन्दी साहित्य में पीएच-डी हैं और जानकी देवी मेमोरियल कालेज में पढ़ाती है।

नवोदित कवयित्री रजनी अनुरागी की कविताओं की केन्दीय भाव-भूमि व्यापक मानवीय सरोकार है।

सहज भाषा में गहन अभिव्यक्ति और स्पष्ट वैचारिकी उनके काव्य व्यक्तित्व की विशेषताएंहैं। उनकी कविताएं हिन्दी की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में छप चुकी हैं।


“बिना किसी भूमिका के” उनका पहला कविता संग्रह है।

इनका ईमेल है : rajanianuragi@gmail.co
बहुएं और बेटियाँ



शादी के बाद मारी जाती हैं बहुएं


और बेटियाँ ...


जन्म से पहले ही


घोंट दिया जाता है उनका गला


संबंध


मैंने उससे कहा

आओ मेरा मन ले लो

उसे मेरा तन चाहिए था


मैंने फिर उससे कहा

आओ मेरा मन ले लो

उसे मेरा धन चाहिए था


उसने मेरा तन लिया

उसने मेरा धन लिया

मन तक तो वो आया ही नहीं


अब मैं सोचती हूँ

कि मैंने उसके साथ

इतना लम्बा जीवन कैसे जिया


पर जीवन जो बीत गया

जीवन जो रीत गया

वह जिया गया कहाँ

मंगलवार, 13 सितंबर 2011

क्या नौकरी करने के बावजूद भी औरत को सुरक्षा और सम्मान नहीं मिल पाता ?


लिव इन रिलेशनशिप  को लेकर यूरोप में कैसी भी दीवानगी देखने में आ रही हो, लेकिन भारतीय संस्कृति में यह अभी तक पूरी तरह से घूल-मिल नहीं पाई है। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि भारतीय समाज पारिवारिक बंधनों में बहुत भरोसा करता है। ऐसे में दो युवाओं द्वारा अगर लिव इन रिलेशनशिप  जैसा कदम उठाया भी जाता है, तो भी पारिवारिक बंधनों के चलते ऐसे रिश्ते  कामयाब नहीं हो पाते हैं। ऐसा ही एक वाकिया हाल ही में टीवी और समाचार चैनलों पर सुर्खियों में बना हुआ है। यह मामला है एयरफोर्स की बर्खास्त पूर्व फ्लाइंग ऑफिसर अंजलि गुप्ता का, जिनके सूइसाइड के मामले में उनके प्रेमी ग्रुप कैप्टन अमित गुप्ता पर पुलिस का शिकंजा कसता जा रहा है। पुलिस का कहना है कि लिव-इन रिलेशनशिप में धोखा मिलने की वजह से अंजलि ने सूइसाइड किया है। अंजलि के परिवार वालों के मुताबिक, अंजलि और अमित पिछले सात सालों लिव-इन रिलेशनशिप में थे। उनका कहना है कि अमित ने अपनी पहली पत्नी से तलाक के बाद अंजलि से विवाह करने का वादा किया था, लेकिन अब वह इससे मुकर रहा था। अंजलि भी पिछले एक साल से भोपाल में ही रह रही थी। अंजलि की मां ने आरोप लगाया है कि अमित ने ही अंजलि को अपने सीनियरों के खिलाफ शारीरिक उत्पीड़न करने का आरोप लगाने के लिए उकसाया था। और, अंजलि ने 3 सीनियर अधिकारियों के खिलाफ एयरफोर्स के अधिकारियों से शिकायत की थी। इसके बाद उसका कोर्ट मार्शल कर दिया गया था। उसके बाद से अंजिली और अमित साथ रह रहे थे। अमित का पत्नी से तलाक होने वाला था। 
जाहिर है, लिव इन रिलेशनशिप  के चक्कर में अपनी जिंदगी को बर्बाद कर लेने वाली अंजलि गुप्ता इस रिष्ते की जटिलताओं का ही शिकार हुई है। अंजलि गुप्ता का कॅरिअर अच्छा चल रहा था, लेकिन अपने प्रेमी अमित के चक्कर में उन्होंने अपने सीनियर अधिकारियों के उपर झूठे इल्जाम लगाए। इसका नतीजा ये निकला कि उनका कॅरिअर पूरी तरह चैपट हो गया, उनके खिलाफ कोर्ट मार्शल भी हुआ। हालांकि इसके बाद भी अंजलि संभल गई थी और वो एक खुशहाल जिंदगी जी सकती थी, अगर अमित लिव इन रिलेशनशिप  के रिष्ते को पूरी ईमानदारी के साथ निभाता और उसका साथ देता। लेकिन अमित ने सिर्फ अंजलि का इस्तेमाल किया और जैसा कि अंजलि की मां के बयानों से लगता है कि उसने बरसों तक अंजलि का यौन शोषण करने के बाद भी अपनी पहली पत्नी को छोड़कर उससे शादी करने का इरादा नहीं जताया। इसी के चलते अब अंजलि आत्महत्या पर मजबूर हुई है।
Source :
http://khabarindiya.com/index.php/articles/show/3279_desh_dunia?utm_source=feedburner&utm_medium=feed&utm_campaign=Feed%3A+khabarindiya+%28KhabarIndiya.Com%२९
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सीनियर अधिकारियों ने अंजलि के साथ क्या किया ?
इसे केवल अंजलि और उसके अधिकारी ही जानते हैं।
नौकरी और रूपये को औरत की मज़बूती के लिए आज ज़रूरी माना जाता है लेकिन यह सब होने के बावजूद भी अंजलि ने आत्महत्या कर ली , क्यों ?
केवल एक सही सोच और एक सही तरीक़े के अभाव में।

लिव इन रिलेशनशिप भी इसी अभाव की कोख से जन्मा है और समय के साथ साथ और बहुत से मसले सामने आते चले जाएंगे।
अंजलि उनमें से एक बानगी भर है।

बेटिया निराली होती है

मोरारी बापू ने अपने प्रवचन में बेटी को माता-पिता की आत्मा और बेटे को हृदय की संज्ञा दी हेै। हृदय की धडकन तो कभी भी बंद हो सकती है लेकिन बेटी व आत्मा का संबध जन्मजंमातर का रहता है वह कभी अलग नहीं हो सकती

वाकई हमारी बेटिया निराली है उसे आप बढने मे इतनी मदद करे की वह कली से फूल बनकर फिजा मे अपनी खूशबू बिखेरा करे इन बेटियों की उपलब्धिया असीम है ।जीवन को अमृत तुल्य बनाने वाली इन बेटियो को इतना प्यार -दुलार दो कि हर लडकी की जुबान पर यही बात हो ‘‘अगले जन्म मोहे बिटिया ही कीजो।‘‘

सोमवार, 12 सितंबर 2011

ना आना इस देश लाडो (अंजलि गुप्ता को समर्पित)

अपनी राजनीतिक, प्रशासनिक और सामाजिक व्यवस्था को नकारते हुए (झकझोड़ने की तो कोई गुंजाईश है ही नहीं) पूर्व वायु सेना अधिकारी अंजलि गुप्ता ने अपनी जिंदगी को भी टर्मिनेशन दे दिया. जाते-जाते वह पहली भारतीय महिला वायुसेना अधिकारी जिस पर ' कोर्ट मार्शल' की कारर्वाई की गई के अलावे इतिहास में संभवतः एक और  कारण से अपना नाम लिखवाती गई हैं - आत्महत्या करने वाली भारतीय वायु सेना की पहली महिला अधिकारी. 


अंजलि गुप्ता (35 वर्ष) करीब 6 वर्ष पूर्व अपने वरिष्ठ अधिकारीयों पर यौन शोषण का आरोप लगा कर चर्चा में आई थीं. मगर जांच में उनके खिलाफ आरोप सही नहीं पाए गए, बल्कि अंजलि को ही वित्तीय अनियमितता और ड्यूटी पर न आने का दोषी पाया गया. भारत के सैन्य इतिहास का यह भी पहला मौका था जब किसी सैन्य अदालत की कारर्वाई की मीडिया को रिपोर्टिंग करने की अनुमति दी गई. नौकरी से बर्खास्त किये जाने के बाद वो काफी मानसिक दबाव से भी गुजर रही थीं. बर्खास्तगी के बाद अंजलि बंगलुरु के एक कॉल सेंटर से जुड गईं. 

आत्महत्या के बाद की जा रही छानबीन में एक नई कड़ी जुडी है जिसके अनुसार अंजलि की वायुसेना के ग्रुप कैप्टन अमित गुप्ता (54 वर्ष) से मित्रता थी. वो उनके भोपाल के शाहपुरा स्थित मकान में आई थीं, जहाँ अमित की पत्नी और बड़ी बहन रहती हैं. अमित और उसके परिवार वाले जब अपने बेटे की सगाई में दिल्ली गए हुए थे, इसी घर में अंजलि ने फांसी लगाकर तथाकथित आत्महत्या कर ली. समाचारों में घर से कई पेट्रोल की बोतलें मिलने की भी सूचनाएं हैं, जिससे अंजलि द्वारा आत्महत्या के दृढ निश्चय के कयास भी लगाये जा रहे हैं (!) अंजलि के कुछ रिश्तेदारों का दावा है कि अमित द्वारा अपनी पत्नी से तलाक ले उससे विवाह के वादे को ठुकराए जाने के कारण ही उसने ऐसा कदम उठाया. पुलिस हत्या और आत्महत्या दोनों संभावनाओं पर विचार कर रही है. 

संभावनाएं चाहे जो हों, एक बार फिर एक स्त्री को ही हार माननी पड़ी है. आखिर ऐसी कौन सी परिस्थितियां हैं जिनके कारण ये इतनी नाउम्मीद, इतनी हतोत्साहित हो जाती हैं !!!  प्राणोत्सर्ग कर जाना अपने सिस्टम पर भरोसा करने की तुलना में सहज लगता है. सेना हो या समाज, हर जगह Compromise स्त्री को ही करना पड़ता है, जान दे देने की हद तक !!! क्या वायु सेना को कैरियर बनाने वाली अंजलि इतनी कमजोर थी !!! समाज और व्यवस्था शायद ही इस बारे में विशेष सोचे क्योंकि चिंता करने के लिए तो भारतीय क्रिकेट टीम की Performance जैसी कई महत्वपूर्ण चीजें पड़ी हैं. हमलोग भी थोड़े बेचैन होंगे, एक रात की नींद खराब करेंगे, पोस्ट लिखेंगे, टिप्पणियां करेंगे और दैनिक व्यस्तताओं में खो जायेंगे. मगर अंदर कहीं छुपी अंतरात्मा तो कराहती हुई दुआ कर रही होगी कि न आना इस देश लाडो, यह धरती स्त्री की सिर्फ़ शाब्दिक आराधना करना जानती है; व्यवहारिक नहीं. यहाँ न तो तेरी अस्मिता सुरक्षित है न तेरा गौरव. यह धरती अब स्त्री विहीन होने के ही लायक है. 'No Land Without Woman' की अवधारणा इसी देश में ही अस्तित्व में आनी चाहिए. मरते समय यही बददुआ, यही श्राप अंजलि के ह्रदय से भी निकला होगा. 

रविवार, 11 सितंबर 2011

दो सौ वर्षों की प्रतीक्षा के बाद जन्मी एक सन्यासिन !

‘निर्वाण दिवस 11 सितम्बर पर पुण्य स्मरण’

क्या आप जानते हैं कि उत्तर प्रदेश के जनपद फर्रूखाबाद के एक संपन्न परिवार की सात पीढियों में दो सौ वर्षों तक किसी कन्या का जन्म नहीं हुआ था। 24 मार्च 1907 को जब बाबू बाँके बिहारी वर्मा के घर पर पौत्री के रूप में जब एक नवजात बालिका की किलकारी गूँजी तो उनकी प्रसन्नता का ठिकाना न रहा क्योंकि इस परिवार में किसी बालिका के जन्म पूरे दो सौ साल बाद हुआ था। उन्होंने इस बालिका को अपने घर की सबसे बडी देवी माना इसी लिये उसे नाम दिया ‘महादेवी’।

पिता श्री गोविन्द प्रसाद वर्मा और माता हेमरानी देवी की इस पुत्री की शिक्षा पाँच वर्ष की अवस्था में इंन्दौर के मिशन स्कूल से प्रारंभ हुयी । परन्तु तद्समय प्रचलित सामाजिक व्यवस्था के अनुसार सन् 1916 में नौ वर्ष की आयु पूरी होने तक इनके बाबा श्री बाँके बिहारी द्वारा इनका विवाह संम्पन करा दिया गया। जब इनका विवाह हुआ तो ये विवाह का अर्थ भी नहीं समझती थीं। उन्होंने इसके संबंध में अपने ही शब्दों में लिखा हैः-

‘‘दादा ने पुण्य लाभ से विवाह रच दिया, पिता जी विरोध नहीं कर सके। बरात आयी तो बाहर भाग कर हम सबके बीच खड़े होकर बरात देखने लगे। व्रत रखने को कहा गया तो मिठाई वाले कमरे में बैठ कर खूब मिठाई खाई। रात को सोते समय नाइन ने गोद में लेकर फेरे दिलवाये होंगे, हमें कुछ ध्यान नहीं है। प्रात: आँख खुली तो कपड़े में गाँठ लगी देखी तो उसे खोल कर भाग गए।**

ममता बिखेरती सन्यासिन महादेवी वर्मा (चित्र कविताकोश से साभार)
महादेवी वर्मा पति.पत्नी सम्बंध को स्वीकार न कर सकीं। कारण आज भी रहस्य बना हुआ है। आलोचकों और विद्वानों ने अपने.अपने ढँग से अनेक प्रकार की अटकलें लगायी हैं। महादेवी जी के जीवन के उत्तरार्ध में उनकी सेवा सुसुश्रा करने वाले श्री गंगा प्रसाद पाण्डेय के अनुसार.
’’ससुराल पहुँच कर महादेवी जी ने जो उत्पात मचायाए उसे ससुराल वाले ही जानते हैंण्ण्ण् रोनाए बस रोना। नई बालिका बहू के स्वागत समारोह का उत्सव फीका पड़ गया और घर में एक आतंक छा गया। फलतरू ससुर महोदय दूसरे ही दिन उन्हें वापस लौटा गए। ’’
1916 में विवाह के कारण कुछ दिन तक महादेवी जी की शिक्षा स्थगित रही। विवाहोपरान्त महादेवी जी ने 1919 में बाई का बाग स्थित क्रास्थवेट कॉलेज इलाहाबाद में प्रवेश लिया और कॉलेज के छात्रावास में रहने लगीं। महादेवी जी की प्रतिभा का निखार यहीं से प्रारम्भ होता है।
1921 में महादेवी जी ने आठवीं कक्षा में प्रान्त भर में प्रथम स्थान प्राप्त किया तथा इनकी कविता लेखन प्रतिभा का प्रस्फुटन भी इसी समय हुआ। वैसे तो वे वे सात वर्ष की अवस्था से ही कविता लिखने लगी थीं और 1925 तक जब मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की थीएतो एक सफल कवयित्री के रूप में प्रसिद्ध हो चुकी थीं। विभिन्न पत्र.पत्रिकाओं में आपकी कविताओं का प्रकाशन होने लगा था।

विद्यार्थी जीवन में वे प्रायः राष्ट्रीय और सामाजिक जागृति संबंधी कविताएँ लिखती रहीं:-
’’विद्यालय के वातावरण में ही खो जाने के लिए लिखी गईं थीं। उनकी समाप्ति के साथ ही मेरी कविता का शैशव भी समाप्त हो गया।’’
मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण करने के पूर्व ही उन्होंने ऐसी कविताएँ लिखना शुरू कर दिया थाए जिसमें व्यष्टि में समष्टि और स्थूल में सूक्ष्म चेतना के आभास की अनुभूति अभिव्यक्त हुई है। उनके प्रथम काव्य.संग्रह संग्रह 'नीहार' की अधिकांश कविताएँ उसी समय की है।

पिता जी की मृत्यु के बाद महादेवी वर्मा के पति श्री स्वरूप नारायण वर्मा कुछ समय तक अपने ससुर के पास ही रहेए पर अपनी पुत्री महादेवी वर्मा की मनोवृत्ति को देखकर उनके बाबू जी ने श्री वर्मा को इण्टर करवा कर लखनऊ मेडिकल कॉलेज में प्रवेश दिलाकर वहीं बोर्डिंग हाउस में रहने की व्यवस्था कर दी। जब महादेवी इलाहाबाद में पढती थी तो श्री वर्मा उनसे मिलने वहाँ भी आते थे। किन्तु महादेवी वर्मा उदासीन ही बनी रहीं। विवाहित जीवन के प्रति उनमें विरक्ति उत्पन्न हो गई थी।
इस सबके बावजूद श्री स्वरूप नारायण वर्मा से कोई वैमनस्य नहीं था। सामान्य स्त्री-पुरुष के रूप में उनके सम्बंध मधुर ही रहे। दोनों में कभी-कभी पत्राचार भी होता था। यदा-कदा श्री वर्मा इलाहाबाद में उनसे मिलने भी आते थे। एक विचारणीय तथ्य यह भी है कि श्री वर्मा ने महादेवी जी के कहने पर भी दूसरा विवाह नहीं किया।

1984 में लखनऊ में नवगीत गोष्ठी मे महादेवी जी (चित्र कविताकोश से साभार)
महादेवी जी का जीवन तो एक संन्यासिनी का जीवन था ही। उन्होंने जीवन भर श्वेत वस्त्र पहना, तख्त पर सोया और कभी शीशा नहीं देखा।। भगवान बुद्ध के प्रति गहन भक्तिमय अनुराग होने के कारण और अपने बाल-विवाह के अवसाद को झेलने वाली महादेवी बौद्ध भिक्षुणी बनना चाहती थीं। यायावरी की इच्छा से बद्रीनाथ की पैदल यात्रा की और रामगढ़, नैनीताल में 'मीरा मंदिर' नाम की कुटीर का निर्माण किया। यह सन्यासिन 11 सितम्बर के दिन वापस उसी लोक में चली गयी जहाँ रहते हुये पूरे दो सौ वर्षों तक अपने परिवार को अपने आने की प्रतीक्षा करवाती रही थी।

बुधवार, 7 सितंबर 2011

क्या प्रेम और आकर्षण में भिन्नता नहीं कर पाती हैं नारियां ?

फ़र्क़ है तो बस शोध का फ़र्क़ है।

हम जिस बात को मानना चाहते हैं बस यूं ही मान लेते हैं किसी के बताने भर से।
किसी ने कह दिया कि श्री रामचंद्र जी ने सीता माता की अग्नि परीक्षा ली थी और फिर गर्भावस्था में निकाल दिया था और हम मान लेते हैं कि हां ऐसा ही हुआ होगा।
हम बताने वाले से यह नहीं पूछते कि भाई, हिंदू गणना के अनुसार श्री रामचंद्र जी हुए थे 12 लाख 76 हज़ार साल पहले और आप बता रहे हैं तो इतनी पुरानी बात आप तक कैसे पहुंची ?
इतने लंबे अर्से में बात पहुंचते पहुंचते कुछ की कुछ भी तो हो सकती है ?
एक आदमी कहता है कि राधा जी से श्री कृष्ण जी के प्रेम संबंध थे, कोई कहता है उनसे श्री कृष्ण जी ने आजन्म विवाह नहीं किया और कोई कहता है कि कर लिया था और कुछ यह भी कहते हैं कि राधा रायण की पत्नी और श्री कृष्ण जी की मामी थीं।
हम उस बताने वाले से यह नहीं पूछते कि भाई श्री कृष्ण जी को हुए 5 हज़ार साल हो गए हैं। हम तक बात किसने पहुंचाई ?
भारतीय ग्रंथों में सबसे पुराने वेद हैं और उनमें इस तरह की किसी घटना का उल्लेख नहीं है न तो श्री रामचंद्र जी के बारे में और न ही श्री कृष्ण जी के बारे में और जिन ग्रंथों में ये बातें लिखी मिलती हैं, उनकी उम्र चंद सौ साल से ज़्यादा नहीं है।
अगर इन महापुरूषों के साथ कोई अच्छा गुण जोड़कर बताया जाए तो एक बार उसे तो बिना किसी शोध के मान लेने में कोई हर्ज नहीं है लेकिन जो बात हम आज अपने लिए ठीक नहीं मानते, उसे अपने से अच्छे अपने पूर्वजों के बारे में हम मान लेते हैं और कोई खोज नहीं करते।
यह तो हुई मानने की बात कि मानना चाहें तो हम बिना किसी सुबूत के ही मान लेते हैं और न मानना चाहें तो चाहे सारी दुनिया साबित कर दे कि शराब, गुटखा, तंबाकू और ब्याज, ये चीज़ें इंसान की सेहत और अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर देती हैं लेकिन हम मानते ही नहीं।
बुरे लोग अंग्रेज़ों में भी हैं लेकिन उनके बहुसंख्यक लोगों का स्वभाव शोध करने का बन चुका है।
बात चाहे कितनी ही मामूली क्यों न हो लेकिन बात मानने से पहले वे यह ज़रूर देखेंगे कि बात में सच्चाई कितनी है ?
और यह हमारे लिए कितनी हितकारी है ?
मस्लन औरत की वफ़ा के साथ उसकी बेवफ़ाई के क़िस्से भी सदा से ही आम हैं और बेवफ़ा औरत के लिए ही भारत में त्रिया चरित्र बोला जाता है लेकिन अंग्रेज़ों ने इस पर भी शोध कर डाला।
देखिए आप भी यह दिलचस्प शोध :

धोखा देने में महिलाएं भी नहीं हैं कुछ कम

आमतौर पर केवल पुरुषों के विषय में ही यह माना जाता है कि वह अपने प्रेम-संबंधों को लेकर संजीदा नहीं रहते. वह जरूरत पड़ने पर अपने साथी को धोखा देने से भी नहीं चूकते. लेकिन हाल ही में हुए एक अध्ययन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हमारी मानसिकता बिल्कुल बेबुनियाद है क्योंकि विश्वासघात और संबंधों से खेलना केवल पुरुषों का ही शौक नहीं है बल्कि महिलाएं भी इन तौर-तरीकों को अपनाने से नहीं हिचकतीं. प्रेमी को धोखा देने और उसके पीठ पीछे दूसरा प्रेम-संबंध बनाने में महिलाएं पुरुष के समान नहीं बल्कि उनसे कहीं ज्यादा आगे हैं.
डेली एक्सप्रेस में छपे एक शोध के नतीजों ने यह खुलासा किया है कि केवल पुरुष नहीं बल्कि महिलाएं भी अपने रिश्ते की गंभीरता को समझने में चूक कर बैठती हैं. लव-ट्राएंगल जैसे संबंधों में महिलाओं की भागीदारी अधिक देखी जा सकती है. इस सर्वेक्षण में 2,000 लोगों को शामिल किया गया था जिनमें से लगभग एक चौथाई महिलाओं ने यह बात स्वीकार की है कि उन्होंने एक ही समय में एक से ज्यादा पुरुषों के साथ प्रेम-संबंध स्थापित किए हैं. जबकि केवल 15% पुरुषों ने ही यह माना है कि उन्होंने एक बार में दो से ज्यादा महिलाओं से प्रेम किया है.

शोधकर्ताओं ने पाया कि लव-ट्राएंगल में महिलाओं की अधिक संलिप्तता का कारण यह है कि वह पुरुषों की अपेक्षा जल्द ही भावनात्मक तौर पर जुड़ जाती हैं जिसके कारण वह प्रेम और आकर्षण में भिन्नता नहीं कर पातीं. फेसबुक और ट्विटर जैसी सोशल नेटवर्किंग साइटों के आगमन से भी लोगों की जीवनशैली बहुत हद तक प्रभावित हुई है. ऐसी साइटों पर पर अधिक समय बिताने के कारण महिलाएं विभिन्न स्वभाव और व्यक्तित्व वाले पुरुषों के संपर्क में आ जाती हैं. लगातार बात करने और एक-दूसरे के संपर्क में रहने के कारण वह उनके साथ जुड़ाव महसूस करने लगती हैं और अपनी भावनाओं पर काबू ना रख पाने के कारण वह जल्द ही लव ट्राएंगल के फेर में पड़ जाती हैं.

इस शोध की सबसे हैरान करने वाली स्थापना यह है कि अधिकांश लोग यह मानते हैं कि एक समय में दो या दो से अधिक लोगों से प्यार करना और उनके साथ संबंध बनाना कोई गलत बात नहीं हैं. व्यक्ति चाहे तो वह दो लोगों से प्यार कर सकता है.
महिलाओं के विषय में एक और बात सामने आई है कि वे अधिक आमदनी वाले पुरुषों की तरफ ज्यादा आकर्षित होती हैं. धन संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए महिलाएं आर्थिक रूप से सुदृढ़ पुरुष को मना नहीं कर पातीं.
Source >  http://lifestyle.jagranjunction.com/2011/08/26/women-also-cheats-love-triangle/
ग़र्ज़ बात जो भी हो हमें उसे मानने से पहले यह ज़रूर देख लेना चाहिए कि इसमें सच्चाई कितनी है ? 

यह तो हुई बेवफ़ाई की बात,


आप पकड़ सकते हैं अपने जीवन साथी को बेवफ़ाई करते हुए,
जानिए कैसे पकड़ा जाता है जीवन साथी की बेवफ़ाई को ?

मंगलवार, 6 सितंबर 2011

लक्ष्मण रेखा Posted by संगीता स्वरुप ( गीत ) : मेरी टिप्पणी

File:Ravi Varma-Ravana Sita Jathayu.jpgलक्ष्मण रेखा लांघती, लिए हथेली जान 
बीस निगाहें घूरती, खुद रावण पहचान 



खुद रावण पहचान, नहीं ये तृण से डरता
मर्यादा  को  भूल, हवस बस पूरी  करता 




संगीता की सीख, ठीक पहचानो रावण

खींचो खुदकी रेख, कहाँ ले खींचे लक्ष्मण

इसको  भी  क्लिक  कर  दें ---बेचारा 
मुलायम सी लक्ष्मण-रेखा लांघ बैठा  

अमर दोहे