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सोमवार, 16 सितंबर 2013

बलात्कार करने वाला कभी नाबालिग नहीं होता


बलात्कार से सम्बंधित कानून में बालिग व् नाबालिग का अंतर ख़त्म होना चाहिए क्योंकि बलात्कार करने वाला कभी नाबालिग नहीं होता .इसका सम्बन्ध उम्र से नहीं अपराध से जोड़ा जाना चाहिए .दामिनी के साथ न केवल बलात्कार बल्कि दरिंदगी की सारी सीमायें पार करने वाला अफरोज यदि नाबालिग के आधार पर कानून से बच जाता है तो यह पूरे मानवीय समाज के मुंह पर तमाचा मारे जाने जैसा है .वैसे भी अफरोज मुसलमान है और मुस्लिम कानून के अनुसार वो बालिग है .अफरोज को यदि भारतीय कानून ने फाँसी पर नहीं चढ़ाया तो भारतीय समाज में एक गलत सन्देश जायेगा जिसका खामियाजा भविष्य में भारतीय समाज को भुगतना होगा .



शिखा कौशिक 'नूतन'

शुक्रवार, 27 जुलाई 2012

पहनावे की ले आड़ ...अपना पल्ला झाड़ !


पहनावे  की  ले  आड़  ...अपना  पल्ला  झाड़  !


स्त्री के पहनावे  से  अधिक यदि पुरुष के आचरण पर अधिक ध्यान दिया  जाये  तो स्त्री के विरूद्ध अपराध में कमी  आने की ज्यादा सम्भावना है .यदि स्त्री का पहनावा ही हर स्त्री विरूद्ध अपराध हेतु जिम्मेदार है तो द्वापर  में द्रौपदी  का चीर-हरण न होता .इंद्र द्वारा अहिल्या का बलात्कार  न होता .वस्त्र एक सीमा तक ही किसी  को अपराध करने  के लिए  उकसा  सकते  हैं पर हर पुरुष तो विश्वामित्र नहीं होता कि मेनका  ने  उन्हें मोह लिया और वे  तपस्या विमुख हो गए .  योगी से भोगी  बन गए .मैं स्वयं स्त्री के शालीन पहनावे की कट्टर पक्षधर हूँ  पर मैंने  भी  पिछले  वर्ष  उमंग सबरवाल द्वारा दिल्ली में आयोजित  ''सलट  वॉक '' का समर्थन  किया  था क्योंकि   सम्पूर्ण व्यवस्था स्त्री के विरूद्ध अपराध हेतु स्त्री के वस्त्रों को ही जिम्मेदार ठहराकर अपनी अकर्मण्यता को छिपा लेती  है .गुवाहाटी  में युवती के साथ  दुर्व्यवहार  की घटना  साफ  तौर  पर कानून एवं सुरक्षा  व्यवस्था की विफलता  थी .प्रत्येक नागरिक  की सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रशासन पर है .जनता में ऐसी घटनाओं से यही सन्देश जाता है कि कानून व्यवस्था नाम की अब कोई चीज नहीं रही .इसे यदि स्त्री के वस्त्रों से जोड़ दिया जायेगा तो पहले से पंगु प्रशासन के लिए तो सोने पर सुहागा वाली बात हो जाएगी .किसी भी पहनावे में कोई बुराई नहीं यदि वह देश  व् संस्कृति के हिसाब से पहना जाये .जींस भी शालीन तरीके से पहनी हुई एक युवती को स्मार्ट लुक देती है .
Jeans_girls : Young smiling brunette in jeans. Isolated over white . Stock PhotoSchoolgirl : full length studio portrait of female elementary pupil
पुलिस की व् सेना की वर्दी में महिलाएं किस को  आकर्षित नहीं कर  लेती ?मिनी स्कर्ट में सानिया व् साइना के प्रति किसके   ह्रदय में बुरे भाव आ सकते हैं ?  वही साड़ी में भी अशालीन भाव वाली स्त्री को सराहा नहीं जा सकता .वस्त्रों पर बहस  को विराम  दिया जाना  चाहिए क्योकि ये बहस तो वही खत्म हो जाती है जब स्कूली  छात्राओं के साथ आते जाते समय छेड़कानी की जाती है .क्या स्कूली यूनिफ़ॉर्म  भी भड़काऊ होती है ?सन २००३ में धनबाद में तेजाबी हमले की शिकार सोनाली घर के  छज्जे पर सोयी हुई थी .उस समय पर क्या उसके  वस्त्रों ने गुंडों को यह अपराध करने हेतु उकसाया था ? वास्तव में हर स्त्री विरूद्ध अपराध का कारण भिन्न   ही होता है . ऐसे अपराधों में कई बार आहत   पुरुष अहम् भूमिका निभाता है तो कई बार पीड़ित लड़की के परिवार से उसकी रंजिश .कभी लड़की द्वारा किये  गए छल के कारण ऐसा होता है और कई बार प्रेमी कहलाने वाले पुरुष का मानसिक रूप से अस्वस्थ होना .इन  घटनाओं पर अंकुश लगाने हेतु सबसे कारगर उपाय है सदाचरण व् हमारी   कानून व्यवस्था का चुस्त-दुरुस्त होना .सड़कों पर अपराध रोकने में तो कानून व्यवस्था ही अहम् भूमिका  निभा  सकती  है और घर के भीतर के स्त्री विरूद्ध अपराधों में सदाचरण .पहनावा एक बहुत छोटा मुद्दा है इस पर पारिवारिक स्तर पर ही हो  तो बेहतर है क्योकि भारतीय परिवार ही अपने शिशुओं में संस्कार भरने का काम करते आये हैं .पहनावे को आधार बनाकर  पुलिस प्रशासन    यदि अपनी विफलता से पल्ला झाड़ने  का प्रयास करेगा तो यह मेरे लिए स्वीकार करना असंभव ही है .


                                                          shikha kaushik 

गुरुवार, 3 मई 2012

ASH- A MOTHER ...WHAT FIGURE




आज  अखबार में एक खबर पढ़ी कि-''चर्चाओं में ऐश   का फिगर  ''.खबर  में बताया गया है की ऐश  के बढे वजन को लेकर कुछ  लोगों ने इसे एक सदमा  करार दिया है .कैसी मनोवृति  है हमारी  ?क्या आज भी आप ऐश  को केवल अपना मनोरंजन करने वाली एक अभिनेत्री मानते हैं ?वो एक छः माह की बेटी की माँ हैं .क्या उनका कर्तव्य केवल आपके आकर्षण का केंद्र बने रहना होना  चाहिए .हमारे लिए यह एक सदमा नहीं एक राहत की खबर है कि हमारी प्रिय अभिनेत्री वास्तविक जीवन में एक सफल माँ का किरदार निभा  रही है .सदमा हम तब कह सकते थे जब वो बेटी को जन्म देते ही फिल्मों की ओर   रूख कर लेती .ऐश को भावी जीवन में खूब खुशियाँ मिले हम तो यही चाहेंगें .

                                         शिखा कौशिक 
                         [विचारों का चबूतरा ]

शुक्रवार, 20 अप्रैल 2012

भारतीय नारी ब्लॉग पर अब हर रविवार नन्ही परियां करें पोस्ट !


भारतीय नारी ब्लॉग पर अब हर रविवार नन्ही परियां करें पोस्ट !

अब  हर रविवार नन्ही परियों के नाम .आप भी जुड़े और अपना ई मेल  यहाँ लिख  दें ताकि आपको भेजा  जा सके निमंत्रण .नन्ही परियों की  उपलब्धियों से जुडी ...उनकी सृजनात्मकता से जुडी ..हर पोस्ट का यहाँ स्वागत है रविवार को .नन्ही परियों को दिया जा  रहा है ये मौका वे  पहुंचाएं अपनी प्रतिभा जन जन तक .
                                                                 शिखा कौशिक 

गुरुवार, 19 अप्रैल 2012

श्रीमती सुषमा स्वराज जी -प्रधान मंत्री पद हेतु एक योग्य उम्मीदवार


श्रीमती सुषमा स्वराज जी -प्रधान मंत्री पद हेतु एक योग्य उम्मीदवार




पिछले   दिनों राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने श्री नरेंद्र मोदी जी को  आगामी  लोकसभा चुनावों  २०१४  के लिए  प्रधान मंत्री पद हेतु एक योग्य उम्मीदवार घोषित किया है पर मेरा मानना  है कि बी.जे.पी. में इस समय प्रधानमंत्री पद हेतु जो  सबसे उपयुक्त नेता हैं वे हैं श्रीमती सुषमा स्वराज जी .सुषमा जी अनेक महत्वपूर्ण पदों पर आसीन  रही हैं और सफलतापूर्वक सभी दायित्वों का निर्वाह किया है .उनमे एक भारतीय नारी  की पूर्ण  छवि परिलक्षित  होती है .उनका संक्षिप्त परिचय इस प्रकार है -
''From Wikipedia, the free encyclopedia
Sushma Swaraj (born 14 February 1952) is an Indian politician of the Bharatiya Janata Party(BJP)and Member of Parliament. She is currently the Leader of the Opposition in the 15th Lok Sabha. She is a former union cabinet minister of India and a former Chief Minister of Delhi. Also she served as the Chairperson of the BJP's 19 member campaign committee for the 2009 General Elections. She was the first female Chief Minister of Delhi

Early life

She was born in PalwalHaryana. She was educated at S.D. College, Ambala Cantonment and earned a B.A. degree. She studied LL.B. from the Law Department of Punjab University,Chandigarh. She is an advocate by profession.
She has been associated with many social and cultural bodies in various capacities. She was President of the Sahitya Sammelan, Haryana for four years.

Political career

Sushma Swaraj began her political career as a student leader in the 1970s, organizing protests against Indira Gandhi's government. She was a member of the Haryana Legislative Assembly from 1977–82 and then from 1987–90. As a Janata Party MLA in Devi Lal's government, she was the Cabinet Minister of Labour and Employment (1977–1979). She joined the BJP in 1980. Under a combined Lok Dal-BJP government led by Devi Lal, she was the Cabinet Minister of Education, Food and Civil Supplies (1987–1990). She was judged Best Speaker of Haryana State Assembly for three consecutive years.''
                            इतनी योग्य व् प्रखर राष्ट्रीय नेता के होते हुए मात्र एक राज्य  के मुख्यमंत्री पद पर रहे श्री नरेंद्र मोदी जी  को प्रधानमंत्री पद का यदि उम्मीद्वार घोषित किया जा रहा तो यह संघ की भूल है .बी.जे.पी. को चाहिए की वो सुषमा जी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर महिला सशक्तिकरण को भी बढ़ावा दे  व् पद के अनुरूप व्यक्ति को ही यह सुअवसर प्रदान करे .

शुक्रवार, 13 जनवरी 2012

बहुत अफ़सोस की बात


दिल्ली भारत का वह राज्य   है जहाँ की मुख्य मंत्री एक महिला हैं .उस  राज्य में ऐसा होता  है तो बहुत अफ़सोस की बात  है .महिलाओं को सुरक्षित रखने के लिए पुलिस विभाग में महिला सेल की स्थापना की गयी थी पर जब महिला पुलिसकर्मी  के साथ उसके कार्यस्थल पर  ही  ऐसा  हो जाये तो ''सलट  वॉक ''का समर्थन  करने पर हमारी आलोचना करने वाले पुरुषों को कहीं  मुंह  छिपा  लेना  चाहिए .''यह घटना सोमवार रात कालकाजी पुलिस स्टेशन मेंहुई। कालकाजी थाने में तैनात नवनियुक्त लेडीकॉन्स्टेबल रात में ड्यूटी पर थी। एसएचओ राणाअपने रेस्ट रूम में थे। लेडी कॉन्स्टेबल के मुताबिक एसएचओ ने उसे बहाने से अंदर बुलायाऔर छेड़छाड़ की। किसी तरह बचकर वह बाहर निकली। पुलिस सूत्रों के मुताबिक वह बदहवासहालत में बाहर आई थी।''[नव- भारत टाइम्स से साभार ]
                  स्त्री को मात्र एक देह मानने वाले पुरुष वर्ग की नैतिकता कुछ मिनटों में कैसे रसातल  में समां जाती है ऐसी घटनाएँ इसकी गवाह है .दोषी पुलिसकर्मी को कड़ी सजा दी जानी चाहिए इसके अतिरिक्त और क्या कहा जा सकता है ?
                                         शिखा कौशिक 
                        [विचारों का चबूतरा ]