रविवार, 27 जनवरी 2013

''नेता जी अभी और ठुकेंगे ''-एक लघु कथा

 
''नेता जी अभी और ठुकेंगे ''-एक लघु कथा 


भरे बाज़ार नेता जी की ठुकाई की जा रही थी .महिलाएं चप्पलों,सैंडिलों से उनका बदचलनी का भूत उतार रही थी .अभी अभी उन्होंने ''स्त्री सशक्तिकरण'' के कार्यक्रम में वहां उपस्थित अपनी ही पार्टी की महिला मोर्चा की कार्यकत्री के साथ छेड़छाड़ कर डाली थी .नेता जी के माथे पर बलात्कार जैसे कलंक का टीका भी लग चुका है .दोष सिद्ध  न  हो  पाने  के कारण संक्रामक बीमारी के कीटाणु की भांति आराम से छुट्टा घूम हैं और पार्टी के महिला सम्मेलनों में काफी उत्साह से भाग ले रहे हैं .महिलाओं के द्वारा जोरदार ठुकाई के बाद नेता जी के चेले उन्हें  किसी तरह बचाकर उनके बंगले पर ले गए .नेता जी बंगले पर पहुँचते ही बेहोश हो गए .डॉक्टर साहब को बुलाया गया .डॉक्टर साहब ने आते ही उन्हें एक इंजेक्शन लगाया और बोले -''अस्सी साल के हो गए नेता जी .इतनी ठुकाई के बाद भी जिंदा हैं ..कमाल है !खैर थोड़ी देर में होश आ जायेगा .'' डॉक्टर साहब के जाने के दस मिनट बाद नेता जी को होश आया तो उनका वफादार दारू सिंह उनका इशारा देखकर अपना कान उनके मुंह के पास ले गया .नेता जी ने धीरे से पूछा -''दारू वो जो गुलाबी साड़ी में लाल सैंडिल से मुझे पीट रही थी वो कौन थी ....पता लगाओ ....मुझे जँच गयी है वो कसम से !!!
                       शिखा कौशिक ''नूतन ''

6 टिप्‍पणियां:

शालिनी कौशिक ने कहा…

सुन्दर.सार्थक अभिव्यक्ति विवाहित स्त्री होना :दासी होने का परिचायक नहीं आप भी जाने कई ब्लोगर्स भी फंस सकते हैं मानहानि में .......

minyander ने कहा…

सटीक कटाक्ष !!
http://minyander.blogspot.in/2013/01/chetanbhagataurbhaiyaji.html

GYanesh Kumar ने कहा…

सच में नेताओं ने जाने समझ ही क्या लिया है चरित्र हीन होते जा रहै हैं ज्यादातर नेताओं के इतर रिस्तों की खबरे आम हो गयीं है सच में ये सत्ता का च्यवन प्रास खा खाकर हरामजादे होते जा रहै है लैकिन सच में तो बात यह भी है कि इन्है एसी महिलाऐ भी तुरंत ही मिल जाती हैं क्या कहैं शायद ऐसी महिलाऐ भी कहीं न कहीं दोषी हैं हाँ लेकिन यह बात भी है कि कभी कभी सीधी सच्ची महिलाऐ भी किसी न किसी मजबूरी मे इनका शिकार हो जाती हैं।इसलिए नेता जी की पिटाई सही ही है अभी असम में काग्रेसी नेता जी भी इन्हीं कारानामों के कारण महिलाओं ने खूब फुटबाल व क्रिकेट खेला है। आभार अभिव्यक्ति के लिए

Pratibha Verma ने कहा…

सार्थक अभिव्यक्ति...

नीरज पाल ने कहा…

सटीक कटाक्ष।

डा. श्याम गुप्त ने कहा…

सही कहा ज्ञानेश ...ऐसी महिलायें सभी को मिल ही जाती हैं ... तभी तो इनका हौसला बढ़ा रहता है.....