शनिवार, 27 अक्तूबर 2012

अन्नपूर्णा


गहरे सांवले रंग पर
गुलाबी सिंदूर ,गोल
बड़ी बिंदी ......
कहीं से घिसी ,कहीं से
सिली हुई साड़ी पहने
अपनी बेटी के साथ ,
खड़ी कुछ कह रही थी
मेरी नयी काम वाली ..
कि मेरी नज़र उस के
चेहरे ,गले और
बाहं पर मार की
ताज़ा -ताज़ा चोट पर
पड़ी ....और दूर तक
भरी गहरी मांग पर भी .....
और पूछ बैठी ,
कितने बच्चे है तुम्हारे ..
सकुचा कर बोली जाने दो
बीबी .....!!!!!
क्यूँ ..!!!. .तुम्हारे ही है .....
या चुराए हुए ...और तुम्हारा
नाम क्या है ,बेटी का भी....
वो बोली नहीं -नहीं बीबी ....
चुराऊँगी क्यूँ भला ..
पूरे आठ बच्चे है ....ये बड़ी है
सबसे छोटा गोद में है .....
पता नहीं मुझे क्यूँ हंसी
आ गयी ........
इसलिए नहीं कि उसके
आठ बच्चे है ....कि
अपने ही बच्चों की भूख
के लिए सुबह से शाम भटकती
"अन्नपूर्णा " और उसकी बेटी
" लक्ष्मी ".....

13 टिप्‍पणियां:

Rajput ने कहा…

यही हकीकत है , बहुत खुबसूरत रचना

Devendra Dutta Mishra ने कहा…

उपहास तो लगता है किंतु हकीकत तो यही कि वे ही लोग वास्तविक अर्थों में अन्नपूर्णा व लक्ष्मी हैं।

Manu Tyagi ने कहा…

सही कहा आपने

उड़ता पंछी ने कहा…

ek dum sahi hai.


meri post par aapka swagat hai


चार दिन ज़िन्दगी के .......
बस यूँ ही चलते जाना है !!
padiyega.

डॉ शिखा कौशिक ''नूतन '' ने कहा…

nimn vargiy mahila ho athva u uchch varviy -sabhi ko gharelu hinsa ka shikar banna padta hai .nimn vargiy mahila ka shareer bachche paida karne ki masheen bankar rah jata hai aksar yah dekhne me aata hai .annpoorna v lakshmi -dono nam ko prateek roop me aapne sarthak abhivyakti di hai .is blog par aapka shubhagaman utsahit karne vala hai .hardik aabhar

उपासना सियाग ने कहा…

बहुत -बहुत शुक्रिया शिखा जी , महिलाओं का एक ही वर्ग होता है ....लेकिन जहाँ निम्न वर्गीय महिलाएं हिंसा का जवाब भी दे देती है वहीँ उच्च वर्गीय महिला चुप रह कर अपने को घुटन की तरफ धकेल देती है.....

मदन शर्मा ने कहा…

दुर्भाग्य से समाज कि यही स्थिति है ....सुन्दर विचार प्रवाह ....

शालिनी कौशिक ने कहा…

अजी नाम में क्या रखा है गरीबदास होते हैं अमीरों के अमीर और लक्ष्मीचंद मिलते फ़कीर हैं .बहुत सार्थक प्रस्तुति .आभार

डा. श्याम गुप्त ने कहा…

ajee har aurat lakshmee va annapoornaa hotee to lakshmee aadi aadi kyaa karengee...

---apanaa apanaa bhaagy...

expression ने कहा…

कहा भी है नाम में क्या रखा है....
अच्छी रचना..

अनु

Aditya Tikku ने कहा…

atiutam--***

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

अपने नाम का अर्थ उसने कभी नहीं समझा,यं ही जीवन बीत जायेगा ,शायद लक्ष्मी नामधारिणी उसकी पुत्री का भी .

भावना पाण्डेय ने कहा…

dukh hota hai...magar jab madad ko haath badhao bhi to ye aanapoorna aur laxmi jaane kya soch kar door ho jaati hain?...ye samajh nahin aaata:(