मंगलवार, 15 अप्रैल 2014

मां

 ममता और सौहार्द से बनी हुयी है माँ  !
कोई कहे कुमाता कोई माता लेकिन है माँ  !!
जिसके स्पर्श भर से बेटा  प्रसन्न हो उठता है !
जिसके उठने से ही सुरज भी उठता है !!
माँ  को देखकर बच्चा पुलकित  हो उठता है !
बच्चो को पाकर माँ  का रोम-रोम खिल उठता है !!
यौवन मे भी माँ  को बेटा लगता प्यारा !
बेटा समझ न पाता मन का है कच्चा !!
सारी दुनिया समझे उसे घोर कपुत !
माँ  को लगता बेटा सच्चा,वीर,सपुत !!
माँ  शब्द मे है ममता का एहसास  !
बरसो है पुराना माँ  का इतिहास !!

http://hindikavitamanch.blogspot.in/

http://rishabhpoem.blogspot.in/

2 टिप्‍पणियां:

Shalini Kaushik ने कहा…

very right view .

shikha kaushik ने कहा…

bahut sarthk post .aabhar