रविवार, 13 अप्रैल 2014

जसोदा बेन के तो अच्छे दिन आ ही गए !

2 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
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आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल सोमवार (14-04-2014) के "रस्में निभाने के लिए हैं" (चर्चा मंच-1582) पर भी होगी!
बैशाखी और अम्बेदकर जयन्ती की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Virendra Kumar Sharma ने कहा…

मेरे इलाके में आना (कानपुर आना )तब देखूंगा तुझे कहने

वाले एक कांग्रेसी काबीना मंत्री ही थे जो उस वक्त क़ानून
मंत्री थे और क़ानून में सुराख में से विकलांगों की बैसाखी
भी खा गए बदले में तरक्की और पा गए विदेश मंत्री पद पा
गए। कौन सी कांग्रेस संस्कृति की बात कर रहीं हैं आप। व


ह संस्कृति जिसके तहत एक कांग्रेसी नेता (सुशील शर्मा



)पत्नी के टुकड़े करके उसे तंदूर में भूनते हैं।

मोदीजी तो एक किशोर अल्प वयस्क पत्नी को ससम्मान

पढ़ाई करने के लिए अपने घर भेज देते हैं। क्या लेखिका

किशोर विवाह का समर्थन करतीं हैं जसोदा बहन की उम्र

तब १७ बरस थी। गौना कभी हुआ ही नहीं न मेरिज

कन्ज्यूमेट हुई।