गुरुवार, 13 मार्च 2014

मगर ख्वाहिश न करना मेरा ख़ुदा बनने की !!

Beautiful Indian bride looking in mirror - stock photo

है इज़ाजत तुम्हें पंख लगा उड़ने की ,
मगर कोशिश न करना मुझसे ऊँचा उड़ने !
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है इज़ाजत तुम्हें जज़्बात बयां करने की ,
मगर हिम्मत न करना राज़ बयां करने की !
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है इज़ाजत तुम्हें सजने और संवारने की ,
मगर चाहत न रखना बेपर्दा फिरने की !
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है इज़ाजत तुम्हें मुझसे बात करने की ,
मगर हिमाकत न कभी करना बहस करने की !
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है इज़ाजत 'नूतन' शरीक-ए-हयात बनने की ,
मगर ख्वाहिश न करना मेरा ख़ुदा बनने की !!

शिखा कौशिक 'नूतन'

4 टिप्‍पणियां:

Shalini Kaushik ने कहा…

after a long time you have written over shauhar-begum issue .nice post

Tushar Raj Rastogi ने कहा…

आपको यह बताते हुए हर्ष हो रहा है के आपकी इस विशेष रचना को आदर प्रदान करने हेतु हमने इसे आज के ब्लॉग बुलेटिन - दोगला समाज पर स्थान दिया है | बहुत बहुत बधाई |

हिमकर श्याम ने कहा…

नारी मन को बखूबी दर्शाया है...अब तो सूरत बदलनी ही चाहिए... बहुत सुंदर अभिव्यक्ति ..

Dr.NISHA MAHARANA ने कहा…

ati sundar ......