मंगलवार, 11 मार्च 2014

बेटियां मोती नहीं ये तो कोहिनूर हैं !

बेटियां मोती नहीं जिनकी चमक कम हो कभी !
ये तो कोहिनूर हैं न चमक कम हो कभी !
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ये नहीं हैं चांदनी घट-घट के फिर-फिर बढ़ें ,
ये दमकती दामिनी न दमक कम हो कभी !
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ये नहीं नाज़ुक कली जिसको मसल दे कोई भी ,
ये हैं चन्दन की तरह न महक कम हो कभी !
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ये नहीं तितली कि इठलाती फिरे फूलों पे जो ,
ये कुहुकती कोयलें न चहक कम हो कभी !
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ये नहीं अबला हैं 'नूतन' ये तो शक्तिमान हैं ,
स्वाभिमानी बेटियों की न ठसक कम हो कभी !

शिखा कौशिक 'नूतन'

1 टिप्पणी:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (12-03-2014) को मिली-भगत मीडिया की, बगुला-भगत प्रसन्न : चर्चा मंच-1549 पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'