गुरुवार, 24 अक्तूबर 2013

भारतीय नारी ब्लॉग प्रतियोगिता -४[प्रविष्टि -३(रचनाकार -सुश्री शालिनी कौशिक ) ]

दफनाती मुसीबत को ,दमकती दामिनी है .

कोमल देह की मलिका ,ख्वाबों की कामिनी है ,

ख्वाहिश से भरे दिल की ,माधुरी मानिनी है .
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नज़रें जो देती उसको ,हैं मान महनीय का ,
देती है उन्हें आदर ,ऐसी कामायनी है .
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कायरता भले मर्दों को ,आकर यहाँ जकड़ ले ,
देती है बढ़के संबल ,साहस की रागिनी है .
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कायम मिजाज़ रखती ,किस्मत से नहीं रूकती ,
दफनाती मुसीबत को ,दमकती दामिनी है .
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जीवन के हर सफ़र में ,चलती है संग-संग में ,
गागर में भरती सागर ,ये दिल से ''शालिनी'' है .
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शब्दार्थ -महनीय-पूजनीय /मान्य ,कामायनी -श्रृद्धा ,कायम मिजाज़ -स्थिर चित्त ,शालिनी -गृहस्वामिनी .


शालिनी कौशिक
[एडवोकेट ]

2 टिप्‍पणियां:

shikhakaushik06 ने कहा…

excellent post .thanks

savan kumar ने कहा…

छोटी कविता लेकिन - अच्छी कविता.....आभार