रविवार, 20 अक्तूबर 2013

भारतीय नारी ब्लॉग प्रतियोगिता -४ प्रविष्टि -२ [रचनाकार -श्री तरुण कुमार 'सावन' ]

भारतीय नारी ब्लॉग प्रतियोगिता -४ प्रविष्टि -२ [रचनाकार -श्री तरुण कुमार 'सावन' ]
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कविता– देश का भेष [– तरूण कुमार,सावन]
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बदलने को तो देश का भेष कम नहीं बदला ।
मांग का सिंदूर हाथों में मेहंदी का चलन नहीं बदला ।
मां का ममतामई आंचल दुध का रंग नहीं बदला ।
बहन का प्यार वो राखी का बंधन नहीं बदला ।
बेटियां आगन का फूल बाप के कंधों का बोझ नहीं बदला ।
घर के चिरागों की खातिर अजन्माओं की हत्या का
सिलसिला नहीं बदला ।
व्रत रखें कोई सावित्री, सीता की अग्निपरीक्षा का
मंजर नहीं बदला ।
सदियां बदली हैं,जमाना बदला हैं, यूं तो औरत का
रूप-रंग कम नहीं बदला ।
मगर औरत की आंखों से अश्कों का रिस्ता नहीं बदला ।
बदलने को तो देश का भेष कम नहीं बदला ।
तरूण कुमार `सावन`
नाम – तरूण कुमार,सावन
शिक्षा- एम.ए (समाज शास्त्र)
अमर उजाला काँम्पैक्ट, अमर उजाला, डी एल ए, आदि समाचार पत्रों में लेख शायरी,लधुकथा, कविता प्रकाशित।
चौथी दुनिया समाचार पत्र व राजकमल प्रकासन समूह से लेखन विधा सम्मान से सम्मानित।
प्रस्तुतकर्ता -शिखा कौशिक 'नूतन '

6 टिप्‍पणियां:

shikhakaushik06 ने कहा…

sarthak prastuti hetu badhai .

02shalinikaushik ने कहा…

satya abhivyakti savan ji

सरिता भाटिया ने कहा…

आपकी इस प्रस्तुति की चर्चा कल सोमवार [21.10.2013]
चर्चामंच 1405 पर
कृपया पधार कर अनुग्रहित करें |

ई. प्रदीप कुमार साहनी ने कहा…

सार्थक प्रस्तुति |

Sushil Shail ने कहा…

Ek Achhi Rachna Ka Varnan Aapke Dwara, Thank You for sharing.
Padhe Love Stories, प्यार की बात aur Bhi Bahut Kuch Online.

savan kumar ने कहा…

आप सभी का आभार.....