शुक्रवार, 14 दिसंबर 2012

श्याम स्मृति तरंग ..... डा श्याम गुप्त.....




                                 श्याम स्मृति तरंग .....

     १.पापा व कन्या भ्रूण हत्या ...
आया पर यह कहां से,  पापा नामक कीट,
नाना कर देता अगर उसकी मां को शहीद।
उसकी मां को शहीद,कहां फ़िर मामा होता ,
जग के रिश्ते, ताम-झाम भी कुछ ना होता।
चलती कैसे श्याम भला यह जग की माया,
सोचे मन में पापा,  स्वयं  कहां से आया |

 २ . कन्या-पुत्र न कोई  अंतर......                               

                       चौपाई....
जिसका जैसा भाग्य लिखा है, वही कर्म का लेख दिखाहै|
कन्या-पुत्र न कोई अंतर,  झाडू हो या कलम तदन्तर |

                 कवित्त छंद...
"तेरे करने से कुछ होता नहीं कार्य यहाँ,
आप शुभ कर्म न्याय रीति-नीति कीजिये |
होता जिस जातक का जैसा भाग्येश यथा,
होता वही, आप झाडू या कलम दीजिए |
पर होता माता-पिता का भी कुछ धर्म'श्याम,
आप भी  संतान हित, निज कर्म कीजिये |
कन्या और पुत्र में न कीजै कोई भेद-भाव,
दोनों को समान-भाव पाल-पोस  लीजिए ||

7 टिप्‍पणियां:

Gajadhar Dwivedi ने कहा…

कविता पढ़कर अच्‍छा लगा

hindiblogdirectory ने कहा…

सादर आमंत्रण,
हम हिंदी के श्रेष्ठ ब्लॉग 'हिंदी चिट्ठा संकलक' पर एकत्र कर रहे हैं,
कृपया अपना ब्लॉग शामिल कीजिए - http://goo.gl/7mRhq

डा. श्याम गुप्त ने कहा…

धन्यवाद --गजाधर जी....व चिट्ठा संकलक ...

राकेश कौशिक ने कहा…

"कन्या और पुत्र में न कीजे कोई भेद-भाव
दोनों को सामान-भाव पाल-पोस लीजिये"

डा. श्याम गुप्त ने कहा…

सही कहा राकेश जी....

दिगम्बर नासवा ने कहा…

बहुत लाजवाब ... सच्ची बाते कही हाँ आपने ...

डा. श्याम गुप्त ने कहा…

धन्यवाद दिगंबर जी ......