शुक्रवार, 30 दिसंबर 2011

नव वर्ष ...डा श्याम गुप्त की कविता....




पहली जनवरी को मित्र हाथ मिलाके बोले ,
वेरी वेरी हेप्पी हो  न्यू ईअर, हेमित्रवर |
हम बोले शीत की इस बेदर्द ऋतु में मित्र ,
कैसा नव वर्ष तन काँपे थर थर थर |
ठिठुरें खेत बाग़ दिखे कोहरे में कुछ नहीं ,
हाथ पैर हो रहे  छुहारा से  सिकुड़ कर |
सब तो नादान हैं पर आप क्यों हैं भूल रहे,
अंगरेजी लीक पीट रहे नच नच कर ||




अपना तो नव वर्ष चैत्र में होता प्रारम्भ ,
खेत बाग़ वन जब हरियाली छाती है |
सरसों चना गेहूं सुगंध फैले चहुँ ओर ,
हरी पीली साड़ी ओड़े भूमि इठलाती है |
घर घर उमंग में झूमें जन जन मित्र ,
नव अन्न की फसल कट कर आती है |
वही है हमारा प्यारा भारतीय नव वर्ष ,

ऋतु भी सुहानी तन मन हुलसाती है ||


सकपकाए मित्र फिर औचक ही यूं बोले ,
भाई आज कल सभी इसी को मनाते हैं |
आप भला छानते क्यों अपनी अलग भंग,
अच्छे खासे क्रम में भी टांग यूं अडाते हैं |
हम बोले आपने जो बोम्बे कराया मुम्बई,
और बंगलूरू , बेंगलोर को बुलाते हैं |
कैसा अपराध किया हिन्दी नव वर्ष ने ही ,
आप कभी इसको नज़र में न लाते हैं |

13 टिप्‍पणियां:

Dr.J.P.Tiwari ने कहा…

बहुत खूब! क्या बात कही है अपने! दिल खुश हो गया, बाग भले ही कट गए हों. मेरा दिल तो बाग़-बाग़ हो गया.आभार इस उच्च कोटि की रचना के लिए. आयतित संस्कृति पुजारियों को क्या जोर का झटका धीरे से दिया है. मजा आ गया. कुछ तो जरूर गौर करेंगे. शुभ कामना देना किसी बहाने किसी को बुरी बात नहीं लेकिन इसे ही अपना लेना और अपनी सांस्कृतिक धरोहर भूल जाना यह तो अपराध है, घोर अपराध, अपनी पहचान, अपनी अस्मिता, अपनी धरोहर और विरासत के साथ.

कविता रावत ने कहा…

Agreeji hukumat ka asar ab kahan jaane wala...isliye JANUARY mein bolna hi padta hai happy new new year
..ek kasak to hindi ke liye uthti hai man mein lekin samay ka fer hai...
bahut badiya prerak prastuti...

ajit gupta ने कहा…

आपने जो बात पद्य में कही है वही मैंने गद्य में लिखी है। पोस्‍ट देखे।

sushma 'आहुति' ने कहा…

sarthak post...

dheerendra ने कहा…

सुंदर अभिव्यक्ति बेहतरीन रचना,.....
नया साल सुखद एवं मंगलमय हो,....

मेरी नई पोस्ट --"नये साल की खुशी मनाएं"--

वन्दना ने कहा…

बिल्कुल सही कहा……………आगत विगत का फ़ेर छोडें
नव वर्ष का स्वागत कर लें
फिर पुराने ढर्रे पर ज़िन्दगी चल ले
चलो कुछ देर भरम मे जी लें

सबको कुछ दुआयें दे दें
सबकी कुछ दुआयें ले लें
2011 को विदाई दे दें
2012 का स्वागत कर लें

कुछ पल तो वर्तमान मे जी लें
कुछ रस्म अदायगी हम भी कर लें
एक शाम 2012 के नाम कर दें
आओ नववर्ष का स्वागत कर लें

डा. श्याम गुप्त ने कहा…

धन्यवाद..अजित गुप्ता जी.तिवारी जी...वन्दना जी, धेरेन्द्र जी,सुशमा व कविता जी....हम भी रस्म अदायगी करें...
-----आन्ग्ल नव वर्ष की शुभकामनायें....

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

वाह! सुन्दर सार्थक रचना पढवाने के लिये सादर आभार/बधाई और
नूतन वर्ष की सादर शुभकामनाएं

Kailash Sharma ने कहा…

आपका कहना तो सही है लेकिन फिर भी नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें !

सूर्यकान्त गुप्ता ने कहा…

शायद हिन्दी पंचांग मे तिथि की अनिश्चितता हो…कम से तारीख तो समूचे जगत को एक निश्चित दिन देता है……और फिर "ग्लोब्लाइजेशन" का जमाना जो है……वास्तव मे हकीकत तो ये है कि "चैत्र प्रतिपदा" को इस देश के कितने प्रांत के लोग नव-वर्ष के रूप मे मानते हैं इसमे भी भ्रम है………चलिये हम सब मिलकर इसी तरह प्रयास करते रहें एक न एक दिन चैत्र-प्रतिपदा भी पूरे विश्व मे "वसुधैव कुटुंबकम" की भावना के साथ नव-वर्ष के रूप मे मनाया जावेगा……नव वर्ष की आप सभी को बहुत बहुत बधाई व शुभकामनायें।

Mamta Bajpai ने कहा…

हाँ हम तो चैत्र मॉस में ही मानते है पर समय के साथ भी चलना जरुरी है तो जनवरी मैं भी उल्लास भर लेने मे कोई बुराई नहीं

Ashok Bajaj ने कहा…

नव-वर्ष 2012 की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं !

डा. श्याम गुप्त ने कहा…

----ग्लोबलाइज़ेशन या समय के साथ चलने का अर्थ निश्चय ही यह नहीं कि हम अर्थहीन बातों को मान कर सम्झौता करते जायें ..गुलामी के चरित्र को ढोते जायें....यदि हम चैत्र प्रतिपदा को ही नव-वर्ष मनायें, जनवरी न मनायें तो क्या हानि होगी, क्या कोई उचित उत्तर है?????????