रविवार, 18 दिसंबर 2011

सब जग तेरी छाया ... डा श्याम गुप्त का पद....

नारी सब जग तेरी छाया  ।
सारे जग का प्रेम औ ममता तेरे मन ही समाया |
तेरी प्रीति की रीति ही तो है जग की छाया माया |
ममता रूपी माँ के पग तल सारा जगत सुहाया |
प्रेम की सुन्दर नीति बनी तो जग में प्यार बसाया |             
भगिनी पुत्री विविधि रूप बन जग संसार रचाया |
आदि-शक्ति सरस्वती औ गौरी लक्ष्मी रूप सजाया |
राधा बन कान्हा को नचाये सारा जगत नचाया |
श्याम' कामिनी सखी प्रिया प्रेयसि बन मन भरमाया ||

1 टिप्पणी:

रविकर ने कहा…

NAV VARSH MANGALMAY HO ||