शनिवार, 26 जनवरी 2013

दोष मेरा है...कविता ...... डा श्याम गुप्त ...


  आज जब मैं हर जगह ,
छल द्वंद्व द्वेष पाखण्ड झूठ ,
 अत्याचार व अन्याय -अनाचार
को देखता हूँ ;
उनके कारण और निवारण पर ,
विचार करता हूँ ,
तो मुझे लगता है कि -
दोषी मैं ही हूँ ,
सिर्फ़ मैं ही हूँ ।

क्यों मैं आज़ादी के पचास वर्ष बाद भी
अंग्रेज़ी में बोलता हूँ ,
राशन की दुकान पर बैठ कर ,
झूठ बोलता हूँ , कम तोलता हूँ |

क्यों मैं बैंक के लाइन में लगना
अपनी हेठी समझता हूँ ,
येन केन  प्रकारेण  ,
पीछे से काम कराने को तरसताहूँ |

क्यों मैं 'ग्रेपवाइन''ब्लोइंग मिस्ट'
 के ही पेंटिंग्स बनाता हूँ ,
'प्रसाद' और 'कालिदास' को भूलकर
शेक्सपीयर के ही नाटक दिखाता हूँ

क्यों मैं सरकारी गाडी में ,
भतीजे की शादी में जाता हूँ,
प्राइवेट यात्रा का भी ,
टीऐ पास कराता हूँ |

क्यों मैं किसी को जन सम्पत्ति -
नष्ट करते देखकर नहीं टोकता हूँ ,
स्वयं भला रहने हेतु
जन-धन की हानि नहीं रोकता हूँ |

क्यों मैं रास्ते रोक कर
शामियाने लगवाता हूँ ,
झूठी शान के लिए
अच्छी -खासी सड़क  बर्वाद कराता हूँ |

क्यों मैं किसी सत्यनिष्ठ व्यक्ति को देखकर,
नाक-मुंह सिकोड़ लेता हूँ ,
सामने ही अपराध, भ्रष्टाचार ,लूट-खसोट , बलात्कार
होते देख कर भी मुंह मोड़ लेता हूँ

क्यों मैं कलेवा की जगह ब्रेकफास्ट
खाने की जगह लंच उडाता हूँ ,
राम नवमी की वजाय, धूम धाम से
वेलेंटाइन डे मनाता हूँ |

क्यों मैं रिश्वत के पहिये को
और आगे बढाता हूँ,
एक जगह लेता हूँ-
छत्तीस जगह देता हूँ |

क्यों मैं भ्रष्ट लोगों को वोट देकर
भ्रष्ट सरकार बनाता हूँ ,
अपने कष्टों की गठरी
अपने हाथों उठाता हूँ |

क्यों मैंने अपना संविधान
अन्ग्रेजी में बनाया ,
जो अधिकांश जन समूह की
समझ में ही न  आया |

आप लड़िये या झगडिये ,
दोष चाहे एक दूसरे पर मढिये ,
दोष इसका है न उसका है न तेरा है ,
मुझे शूली पर चढादो ,
दोष मेरा है।

8 टिप्‍पणियां:

Niraj Pal ने कहा…

अत्यंत सुन्दर प्रस्तुति और विचारोत्तेजक भी। सच में दोषी हम ही तो हैं, नापते तोलते येन केन प्रकारेण व्यवस्था बदलते हुए हम अपने अन्दर ही तो नहीं झांकते।

Alpana Verma ने कहा…

विचारणीय

प्रसन्नवदन चतुर्वेदी 'अनघ' ने कहा…

उम्दा प्रस्तुति के लिए बहुत बहुत बधाई...६४वें गणतंत्र दिवस पर शुभकामनाएं...

Shalini kaushik ने कहा…

.सराहनीय अभिव्यक्ति.गणतंत्र दिवस की शुभकामनायें
फहराऊं बुलंदी पे ये ख्वाहिश नहीं रही .

कई ब्लोगर्स भी फंस सकते हैं मानहानि में …….

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
वन्देमातरम् !
गणतन्त्र दिवस की शुभकामनाएँ!

डा श्याम गुप्त ने कहा…

धन्यवाद शास्त्रीजी, नीरज, शालिनी,अल्पना जी, प्रसन्न जी ....

Pratibha Verma ने कहा…

बहुत सुन्दर और सटीक ...

डा श्याम गुप्त ने कहा…

धन्यवाद प्रतिभा जी....