सोमवार, 14 अप्रैल 2025

महिला हित में अनिवार्य हुआ विवाह पंजीकरण

  


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 विवाह पंजीकरण अब सभी के लिए अनिवार्य 

      हमारा देश परम्परा वादी है, यहां हर धार्मिक अनुष्ठान पारंपरिक रीति-रिवाजों से ही होते आए हैं, और इन्हीं परंपराओं और धार्मिक रीति रिवाज से बंधा हुआ है भारत में विवाह अनुष्ठान, जो परिवार और समाज के लोगों के मध्य अनुष्ठापित किया जाता है जिस कारण यहां शादी का पंजीकरण कराना जरूरी नहीं समझा जाता. आम धारणा यह है कि विदेश में जाने वाले जोड़ों और सिर्फ स्पेशल मैरिज एक्ट यानी विशेष विवाह अधिनियम के तहत की गई शादियों का ही पंजीकरण अनिवार्य होता है।

  इसीलिए अब यह जानना सभी के लिए जरूरी है कि शादी का पंजीकरण करवाना हर विवाहित जोड़े के लिए अब आवश्यक है। हमारे देश में शादी को हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 या विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के अंतर्गत पंजीकृत किया जाता है और मैरिज सर्टिफिकेट इस बात का वैध कानूनी सबूत होता है कि दंपति विवाहित हैं। हिंदू विवाह अधिनियम के अंतर्गत वर के लिए न्यूनतम आयु सीमा 21 वर्ष और वधु के लिए 18 वर्ष है। वहीं, विशेष विवाह अधिनियम के तहत दोनों लिए न्यूनतम आयु सीमा 21 वर्ष है। विवाह रजिस्ट्रेशन या विवाह पंजीकरण भारत में जरूरी सम्भव हुआ है माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश से. माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा फ़रवरी 2006 में फ़ैसला दिया गया था कि भारत में सभी धर्मों के विवाहों का रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है. यह फ़ैसला लेने का मुख्य उद्देश्य महिलाओं के अधिकारों की रक्षा थी. इस फ़ैसले के तहत, सभी राज्य सरकारों को तीन हफ़्तों के अंदर इस संबंध में नियम बनाने का निर्देश दिया गया था. जिसमें निम्न जानकारी सभी राज्य सरकारों को उपलब्ध करानी थी-

🌑 विवाह रजिस्ट्रेशन कराने के लिए नियम बनाने से पहले आम जनता से मांगी गई आपत्तियां।

🌑 विवाह रजिस्ट्रेशन के लिए नियम बनाने के बाद, राज्य सरकारों को जारी की गई उचित अधिसूचना। 

🌑 विवाह रजिस्ट्रेशन के लिए कानूनी रूप से नियुक्त अधिकारी। 

🌑 विवाह रजिस्ट्रेशन में वर वधू की आयु और वैवाहिक स्थिति का बताया जाना। 

🌑 विवाह रजिस्ट्रेशन न कराने पर या ग़लत घोषणा पत्र दाखिल करने पर विधिक परिणाम या कानूनी कार्रवाई के बारे में भी प्रावधान करना।

          यह सभी प्रावधान करने का मुख्य कारण एक निर्णय था, जिसे माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा महिला हितार्थ लिया गया था. सिविल वाद में स्थानांतरित याचिका श्रीमती सीमा बनाम अश्विन कुमार (291) मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा पूरे भारत में विवाह पंजीकरण अनिवार्य किया गया.  

प्रस्तुत मामला हरियाणा जनपद न्यायालय की ओर से विवाह पंजीकरण के मुद्दे पर याचिका थी जो राज्यों का मुद्दा थी । अलग अलग राज्यों में विवाह के संबंध में अलग-अलग नियम थे और इस मामले में सम्बन्धित राज्यों के विवाह अधिनियमों का उपयोग किया गया जैसे कि कर्नाटक विवाह (पंजीकरण और विविध प्रावधान) अधिनियम, 1976; असम मुस्लिम विवाह और तलाक पंजीकरण अधिनियम, 1935;  बॉम्बे विवाह पंजीकरण अधिनियम, 1953; हिमाचल प्रदेश विवाह पंजीकरण अधिनियम, 1996; आंध्र प्रदेश अनिवार्य विवाह पंजीकरण अधिनियम, 2002: उड़ीसा मुस्लिम विवाह और तलाक पंजीकरण अधिनियम, 1949। इन सभी को विचारार्थ ग्रहण करने के बाद सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 14 फरवरी 2006 को निर्णय लिया गया और सभी राज्यों को विवाहों को अनिवार्य रूप से पंजीकृत करने और 3 महीने में पंजीकरण की प्रक्रिया के साथ वापस आने के निर्देश दिए गए।

➡️ निर्णय के प्रमुख घटक-

🌒 14 फ़रवरी 2006 को निर्णय देते हुए सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय में निम्नलिखित मुद्दे प्रमुख रहे - 

🌒 सर्वप्रथम सर्वोच्च न्यायालय ने स्वयं का निर्णय लेने का अधिकार उल्लिखित किया। 

🌒 सर्वोच्च न्यायालय ने विवाह में दुर्व्यवहार और बाल विवाह को कम करने के लिए विवाह के पंजीकरण आवश्यक स्थान दिया। 

🌒 सर्वोच्च न्यायालय द्वारा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निम्नलिखित कार्य करने का निर्देश जारी किया गया - 

 🌑"(i) पंजीकरण की प्रक्रिया आज से तीन महीने के भीतर संबंधित राज्यों द्वारा अधिसूचित की जानी चाहिए। यह मौजूदा नियमों में संशोधन करके, यदि कोई हो, या नए नियम बनाकर किया जा सकता है। हालांकि, उक्त नियमों को लागू करने से पहले आम जनता से आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। इस संबंध में, राज्यों द्वारा उचित प्रचार किया जाएगा और आपत्तियां आमंत्रित करने वाले विज्ञापन की तारीख से एक महीने तक मामले को आपत्तियों के लिए खुला रखा जाएगा। उक्त अवधि की समाप्ति पर, राज्य नियमों को लागू करने के लिए उचित अधिसूचना जारी करेंगे।

🌑 (ii) राज्यों के उक्त नियमों के तहत नियुक्त अधिकारी विवाहों को पंजीकृत करने के लिए विधिवत अधिकृत होंगे। आयु, वैवाहिक स्थिति (अविवाहित, तलाकशुदा) स्पष्ट रूप से बताई जाएगी। विवाहों का पंजीकरण न कराने या गलत घोषणा दाखिल करने के परिणाम भी उक्त नियमों में दिए जाएंगे।

🌑 यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि उक्त नियमों का उद्देश्य इस न्यायालय के निर्देशों का पालन करना होगा।

🌑 (iii) जब भी केन्द्रीय सरकार कोई व्यापक कानून बनाएगी, उसे जांच के लिए इस न्यायालय के समक्ष रखा जाएगा।

🌑 (iv) विभिन्न राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों के विद्वान वकील यह सुनिश्चित करेंगे कि यहां दिए गए निर्देशों का तत्काल पालन किया जाए।

➡️ उत्तर प्रदेश में विवाह पंजीकरण-

🌑 उत्तर प्रदेश में विवाह पंजीकरण साल 2017 महिला कल्याण विभाग द्वारा दिए गए निर्देशों के पालन में अगस्त 2017 में लागू किया गया . इस नियम के तहत, उत्तर प्रदेश में होने वाली सभी शादियों का पंजीकरण कराना ज़रूरी कर दिया गया है।  

➡️ क्यों ज़रूरी माना विवाह पंजीकरण? 

🌒 बाल विवाह रोकने के लिए। 

🌒 विधवाओं को उत्तराधिकार का दावा करने में सक्षम बनाने के लिए। 

🌒 महिलाओं को पति से भरण-पोषण और बच्चों की अभिरक्षा के अपने अधिकारों का प्रयोग करने में सहायता करना। 

🌒 द्विविवाह या बहुविवाह की जांच करने के लिए

🌒 पतियों को अपनी पत्नियों को छोड़ने से रोकने के लिए। 

➡️ पंजीकरण प्रक्रिया-

🌒 उत्तर प्रदेश में विवाह का पंजीकरण हिन्दू विवाह अधिनियम (1955) या विशेष विवाह अधिनियम (1954) के तहत होता है. 

🌒 आप अधिकारिक वेबसाइट igrsup.gov.in पर जाकर ऑनलाइन पंजाकरण कर सकते हैं. 

🌒 पंजीकरण के बाद, विवाह पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा. 

🌒 यूपी विवाह प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए, वर और वधू दोनों के आधार नंबर की आवश्यकता होती है.

🌒 पंजीकरण ऑनलाइन या ऑफ़लाइन किया जा सकता है. 

🌒 ऑनलाइन पंजीकरण के लिए, igrsup.gov.in वेबसाइट पर जाएं. 

🌒 ऑफ़लाइन पंजीकरण के लिए, संबंधित विवाह पंजीकरण कार्यालय में जाना होता है. 

🌒 जो युगल शादी कर रहे हैं या पहले से शादीशुदा हैं, वे कोर्ट मैरिज करके अपनी शादी का पंजीकरण करा सकते हैं:

🌑 चरण-1 सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट के कार्यालय में जाएं, जिसके अंतर्गत विवाह हुआ है या जहां दंपति रहते हैं।

🌑 चरण-2 आवेदन पत्र भरें और इस पर पति-पत्नी दोनों हस्ताक्षर करें। आवेदन के दिन ही जमा किए गए सभी दस्तावेजों का सत्यापन किया जाता है। सत्यापन पूरा होने के बाद अप्वॉइंटमेंट के लिए एक दिन तय किया जाता है।

🌑 चरण-3 यदि विवाह, विशेष विवाह अधिनियम के तहत हो रहा है, तो इसमें लगभग 60 दिन लग सकते हैं और हिंदूू विवाह अधिनियम के मामले में, आवेदन के बाद अप्वॉइंटमेंट की तारीख मिलने में लगभग 15 दिन लगेंगे।

🌑 चरण-4 दंपति में से किसी भी पक्ष का कोई भी व्यक्ति, जो विवाह के समय उपस्थित था, विवाह का गवाह हो सकता है। अप्वॉइंटमेंट के दिन, दोनों पक्षों और उनकी शादी में शामिल हुए गवाहों को उपस्थित रहना होगा। विवाह के पंजीकरण के लिए ऑनलाइन विकल्प भी उपलब्ध है। आप अपने राज्य की पंजीकरण वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन कर  सकते हैं।

➡️ पंजीकरण हेतु ज़रूरी दस्तावेज़-

* आवेदन फॉर्म 

• शादी का कार्ड 

• आयु प्रमाण 

• निवास का प्रमाण 

• पासपोर्ट साइज फोटो 

• 10 रुपये के स्टाम्प पेपर पर निर्धारित प्रारूप में पति और पत्नी दोनों की ओर से अलग-अलग शपथ पत्र। जिसमें सभी जरूरी विवरण हों और जो नोटरी द्वारा सत्यापित हो. 

• यदि पति-पत्नी में से कोई एक तलाकशुदा है तो तलाक का आदेश। 

• यदि पिछले पति या पत्नी की मृत्यु हो गई हो तो मृत्यु प्रमाण पत्र। 

• विवाह के बाद नाम बदलने पर सरकारी राजपत्र की प्रति। 

• यदि पति या पत्नी में से कोई एक विदेशी नागरिक है, तो वैवाहिक स्थिति प्रमाण पत्र। 

• गवाह के लिए भी अपना पैन कार्ड और निवास प्रमाण पत्र जमा करना जरूरी और गवाह दो होने जरूरी। 

➡️ पंजीकरण का मह्त्व-

🌒 विवाह पंजीकरण कराए जाने पर एक प्रमाण पत्र प्राप्त होता है जिसे मैरिज सर्टिफिकेट कहा जाता है.  मैरिज सर्टिफिकेट एक आधिकारिक दस्तावेज होता है जो रजिस्टार के द्वारा जारी किया जाता है, जिसमें तारीख और स्थान के साथ विवाह प्रक्रिया को प्रमाणित किया जाता है ।

🌒 विवाह पंजीकरण प्रमाणपत्र, दंपति के विवाहित होने का कानूनी सबूत होता है.

🌒 2006 में सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए सभी धर्मों के लोगों के लिए शादी के पंजीकरण को अनिवार्य बना दिया था.

🌒 अगर आप पति के वीजा पर विदेश यात्रा करना चाहती हैंं।

🌒 संयुक्त स्वामित्व की संपत्ति खरीदते समय और संयुक्त रूप से होम लोन के लिए आवेदन करते समय।

🌒 भारत और अन्य देशें के भी दूतावास, पारंपरिक शादियों को मान्यता नहीं देते हैं। विदेशों में शादी को साबित करने के लिए मैरिज सर्टिफिकेट अनिवार्य है।

🌒 संपत्ति के उत्तराधिकार के मामले में कानूनी कार्यवाही आसान होती है।

🌒 यदि जमाकर्ता या बीमाकर्ता की मृत्यु हो जाती है, जिसने किसी व्यक्ति को नामित नहीं किया था तो पति/पत्नी पारिवारिक पेंशन या बैंक जमा या जीवन बीमा लाभ का दावा करने में सक्षम होते हैं।

🌒 अगर आपको शादी के बाद अपना नाम बदलना हो या पासपोर्ट के लिए आवेदन करना हो या बैंक खाता खोलना हो।

🌒 यह दस्तावेज पति या पत्नी को अपने जीवनसाथी द्वारा त्यागे जाने से बचाता है।

🌒 संपत्ति के हस्तांतरण या कानूनी अलगाव के मामले में बच्चों की कस्टडी के लिए।

🌒 इसे वैवाहिक विवादों में मजबूत और वैध सबूत के रूप में भी माना जाता है।

       अगर आप उत्तर प्रदेश के निवासी या नागरिक हैं तो विवाह पंजीकरण से संबंधित अन्य जानकारी के लिए जुड़े रहिए मेरे ब्लॉग "कानूनी ज्ञान" से और कोई जिज्ञासा हो तो झटपट कमेन्ट सेक्शन में जाकर पूछ डालिए अपना सवाल, जवाब अवश्य दिया जाएगा. धन्यवाद 🙏🙏

प्रस्तुति 

शालिनी कौशिक 

एडवोकेट 

कैराना (शामली) 





सोमवार, 24 मार्च 2025

महिलाओ का लैंगिक उत्पीड़न है ये

 


     भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 75 लैंगिक उत्पीड़न को दण्डनीय अपराध घोषित करती है. इसमे कहा गया है कि 

➡️धारा 75. लैंगिक उत्पीड़न.- 

(1) ऐसा कोई निम्नलिखित कार्य, अर्थात् :-

(i) शारीरिक संस्पर्श और अग्रक्रियाएं करने, जिनमें अवांछनीय और लैंगिक संबंध बनाने संबंधी स्पष्ट प्रस्ताव अन्तर्वलित हों; या

(ii) लैंगिक स्वीकृति के लिए कोई मांग या अनुरोध करने; या

(iii) किसी महिला की इच्छा के विरुद्ध अश्लील साहित्य दिखाने; या

(iv) लैंगिक आभासी टिप्पणियां करने,

वाला पुरुष लैंगिक उत्पीड़न के अपराध का दोषी होगा।

(2) ऐसा कोई पुरुष, जो उपधारा (1) के खण्ड (i) या खण्ड (ii) या खण्ड (iii) में विनिर्दिष्ट अपराध करेगा, वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

(3) ऐसा कोई पुरुष, जो उपधारा (1) के खण्ड (iv) में विनिर्दिष्ट अपराध करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

            दो दिन पूर्व ही बॉम्बे हाई कोर्ट अपने निर्णय में कहा कि किसी महिला सहकर्मी के बालों के बारे में टिप्पणी करना और उस पर गीत गाना कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न नहीं माना जा सकता और यह कहते हुए एचडीएफसी बैंक के अधिकारी को राहत दे दी. 

           इससे एक दिन पूर्व ही इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा दुष्कर्म के प्रयास के आरोपी को राहत देते हुए विवादित निर्णय दिया गया जिसने पूरे देश में महिला आयोग और महिला मंत्रियों तक को महिलाओं की सुरक्षा हेतु आवाज़ उठाने के लिए विवश कर दिया. पीड़िता का ब्रेस्ट पकड़ना और नाड़ा तोड़ना दुष्कर्म या दुष्कर्म का गम्भीर प्रयास माना जाएगा या नहीं, इस पर तो बहस सारे देश में छिड़ी हुई ही थी, साथ ही, अब बहस "लैंगिक उत्पीड़न क्या है?" पर भी छिड़ने जा रही है.

➡️ लैंगिक उत्पीड़न क्या है - 

     लैंगिक उत्पीड़न, यौन प्रकृति का कोई भी अवांछित व्यवहार है जिससे किसी व्यक्ति को अपमानित, भयभीत या असुरक्षित महसूस हो. यह लैंगिक असमानता का एक रूप है. यह भेदभाव और हिंसा का भी एक रूप है. 

➡️लैंगिक उत्पीड़न के कुछ उदाहरण: 

*किसी को गलत तरीके से घूरना या तिरछी नज़र से देखना

*किसी की शारीरिक विशेषताओं या तौर-तरीकों के बारे में लिंग-संबंधी टिप्पणी करना

*किसी को धमकाने के लिए यौन या लिंग-संबंधी टिप्पणी या आचरण का इस्तेमाल करना

*यौन अफ़वाहें फैलाना

*यौन प्रस्ताव देना

*यौन चुटकुले सुनाना

*अश्लील साहित्य दिखाना

*किसी को कामुक या लिंग-विशिष्ट तरीके से कपड़े पहनाना

*किसी को डराने-धमकाने वाला माहौल बनाना

➡️लैंगिक उत्पीड़न का दुष्प्रभाव-

लैंगिक उत्पीड़न किसी भी लिंग, यौन अभिविन्यास, जाति, जातीयता, सामाजिक-आर्थिक स्थिति, या धर्म के लोगों को प्रभावित कर सकता है. 

        अब जब हम भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 75(1) की उपधारा (iv) का अवलोकन करते हैं तो पाते हैं कि उसमे (iv) लैंगिक आभासी टिप्पणियां करने वाले पुरुष को लैंगिक उत्पीड़न के अपराध का दोषी माना गया है और जब हम लैंगिक उत्पीड़न के कुछ उदाहरण देखते हैं तो उसमें किसी की शारीरिक विशेषताओं या तौर-तरीकों के बारे में लिंग-संबंधी टिप्पणी करने को लैंगिक उत्पीड़न कहा गया है. 

    अब एक नजर प्रस्तुत मामले में निर्णय की ओर ले जाते हैं जिसमें जस्टिस संदीप मानें ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता के खिलाफ आरोप सही भी माने जाएं, तो भी उनसे यौन उत्पीड़न पर कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। पुणे स्थित एचडीएफसी बैंक के एसोसिएट क्षेत्रीय प्रबंधक विनोद कछावे को बैंक की आंतरिक शिकायत समिति ने कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न रोकथाम कानून के तहत कदाचार का दोषी ठहराया था। वहीं, याची के वकील ने कहा, कछावे ने महिला से सिर्फ यही कहा था कि वह बाल संवारने के लिए जेसीबी का इस्तेमाल कर रही होगी।

     ऐसे में एक महिला के बालों को उसकी शारीरिक विशेषता के रूप में स्वीकार करते हुए जब लैंगिक उत्पीड़न के उदाहरण इस टिप्पणी को लैंगिक उत्पीड़न की भाषा में शामिल कर रही है तो बॉम्बे हाई कोर्ट का यह निर्णय भी उसी तरह से विवादास्पद कहा जाना चहिये जिस तरह से इलाहाबाद हाई कोर्ट का दुष्कर्म के प्रयास को नकारने का निर्णय विवादों की एक कड़ी बनकर रह गया है. 

     पुरुषों द्वारा महिलाओं पर लैंगिक टिप्पणी करना उनकी रोज की आदत में शुमार है और फिर जब महिला उनकी सहकर्मी हो तो यह एक तरह से वे अपने हक में शामिल कर लेते हैं. अभी हाल ही में दिल्ली विधान सभा के चुनाव में एक राजनेता रमेश बिधूड़ी कहते हैं, 'लालू ने वादा किया था कि बिहार की सड़कों को हेमा मालिनी के गालों जैसा बना दूंगा, लेकिन वे ऐसा नहीं कर पाए। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं, जैसे ओखला और संगम विहार की सड़कें बना दी हैं, वैसे ही कालकाजी में सारी की सारी सड़कें प्रियंका गांधी के गाल जैसी बना दूंगा।' 

       इस तरह अगर न्यायालयों द्वारा महिला के सम्मान पर हुए लैंगिक टिप्पणी के मुद्दे को यूँ ही हल्की बात समझकर हवा में उड़ाया जाता रहा तो महिलाओं के लिए सार्वजनिक जीवन में उतरकर कार्य करना बहुत ही कठिन हो जाएगा. अपने सम्मान को ठेस पहुंचाने वाले के खिलाफ उतरना एक महिला के लिए, वो भी जब वह भारतीय हो, बहुत मुश्किल होता है. रूपम देओल बजाज होना और के पी एस गिल जैसे बड़े अधिकारी को सजा दिलवाना आसान नहीं होता, इसके लिए न्याय व्यवस्था का महिला के साथ मजबूत सहयोग जरूरी है. 

द्वारा 

शालिनी कौशिक 

एडवोकेट 

कैराना (शामली) 


शनिवार, 15 मार्च 2025

WOMEN POWER LINE - 1090

         

     

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Shalini Kaushik Law Classes
वूमेन पावर लाइन-1090 (डब्ल्यूपीएल-1090) एक अत्याधुनिक निवारण कॉल सेंटर है, जो उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं की सुरक्षा के लिए समर्पित किया गया है, जब किसी महिला को फोन कॉल कर, सोशल मीडिया द्वारा, पीछा करके और घरेलू हिंसा आदि सहित विभिन्न प्रकार के दुर्व्यवहार कर परेशान किया जाता है तब यह वूमेन पॉवर लाइन नंबर पीड़ितों को त्वरित और त्वरित प्रतिक्रिया प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

  1090 महिला हेल्पलाइन नंबर है. यह एक टोल-फ़्री नंबर है. इस नंबर पर कॉल करके, कोई भी महिला या उसकी महिला रिश्तेदार निशुल्क शिकायत दर्ज करा सकती है. 

उत्तर प्रदेश की निवासी कोई भी महिला स्वयं के विरुद्ध किए जा रहे अश्लीलता पूर्ण आचरण और दुर्व्यवहार के ख़िलाफ़ 1090 पर फोन कर शिकायत कर सकती है. वूमेन पावर लाइन-1090 शिकायतकर्ता से नंबर मिलते ही हरकत में आ जाती है और जिस नंबर से  पीड़ित महिला को फ़ोन किया जाता है, उस पर कॉल करके पहले उस व्यक्ति को डांटा और समझाया जाता है.

1090 हेल्पलाइन से जुड़ी ज़रूरी जानकारीः

*इस हेल्पलाइन पर कॉल करके, महिलाओं को संकट में सहायता मिलती है. 

*इस हेल्पलाइन पर शिकायत करने वाली महिला की पहचान गोपनीय रखी जाती है. 

*शिकायत करने वाली महिला को थाने या किसी ऑफ़िस में नहीं बुलाया जाता. 

*शिकायत दर्ज करने का काम महिला पुलिस अधिकारी या कर्मी करती हैं. 

*शिकायत दर्ज करने के बाद, पुलिस त्वरित सहायता के लिए संबंधित जगह पर पहुंचती है. 

*शिकायत दर्ज करने के लिए, सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक संदेश मिलने, साइबर स्टॉकिंग, साइबर बुलिंग, मोबाइल पर अश्लील कॉल या मैसेज आने, या फिर घर और बाहर कहीं भी छेड़खानी, हिंसा, और यौन उत्पीड़न की शिकायत की जा सकती है. 

*इस हेल्पलाइन पर कॉल करने के बाद, शिकायतकर्ता से नंबर मिलते ही 1090 हरकत में आ जाता है.

प्रस्तुति 

शालिनी कौशिक 

एडवोकेट 

कैराना (शामली) 

शुक्रवार, 14 फ़रवरी 2025

सोशल मीडिया की आजादी सम्भाल नहीं पा रही महिलाएं


 हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि

"यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता."

   अर्थात जहां नारी की पूजा होती है, नारी का सम्मान होता है वहां देवता निवास करते हैं. नारी की महत्ता विश्व संस्कृति में पुरुषों से ऊपर स्थान रखती है. ब्रिटेन की पहली महिला प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर ने कहा था कि-" यदि आप कुछ कहना चाहते हैं, तो एक आदमी से पूछें; यदि आप कुछ करना चाहते हैं, तो एक महिला से पूछें।" इससे उन्होंने साफ साफ यह संदेश दिया है कि पुरुष कार्य करने से ज्यादा बोलते हैं किन्तु महिला चुप रहकर ही कार्य को अंजाम तक पहुंचा देती है. भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री जिन्हें आयरन लेडी ऑफ इंडिया भी कहा जाता है श्रीमती इंदिरा गांधी जी ने भी कहा था कि - 

"महिलाएं केवल घर की देखभाल करने वाली नहीं बल्कि समाज की दिशा निर्धारित करने वाली होती हैं."

बच्चे को जन्म देने वाली, बच्चे को हर संकट से बचाने वाली, बच्चे को मौत से बचाने वाली, जीवन में आगे बढ़ाने वाली उसकी माँ ही होती है, यहां तक कि किसी सफल व्यक्ति के पीछे उसकी माँ या उसकी पत्नी अर्थात एक नारी का ही हाथ कहा जाता रहा है और ये सब सदियों के अनुभवों पर आधारित सत्य है. श्री रामचरित मानस के रचयिता कवि श्रेष्ठ तुलसीदास की भी यदि सफलता भक्ति काव्य में देखी जाए तो नेपथ्य में पत्नी रत्नावली ही खड़ी नजर आती हैं. जिनसे विवाह के पश्चात तुलसीदास जी उनके मायके जाने पर पत्नी प्रेम में इस कदर व्याकुल हुए कि पत्नी के मायके बहुत तेज तूफान में नदी में तैरकर पत्नी के घर पहुंचे और गहरी रात होने पर दीवार पर लटके सर्प को भी नहीं देखा और उसी पर चढ़कर पत्नी रत्नावली के कमरे में पहुंच गए, तब पति की यह दशा देख पत्नी रत्नावली उन्हें धिक्कारते हुए कहती हैं -

"लाज न आवत आपको, दौरे आयहु साथ,

धिक धिक ऐसे प्रेम को, कहा कहूँ मैं नाथ.........

और इस तरह धिक्कारते हुए रत्नावली तुलसीदास के प्रेम को प्रभु प्रेम की ओर मुड़ने के लिए संकेत दे देती हैं -

" अस्थि चर्म मय देह मम, तामै ऐसी प्रीति,

ऐसी जो श्री राम में, होत न तो भवभीती।"

अर्थात यह जो मेरा शरीर है पूरा चमड़े से बना हुआ है जो कि नश्वर है, यदि इस चमड़े से इतना मोह छोडकर राम नाम में अपना ध्यान लगाते तो आज भवसागर से पार हो जाते और भारत का इतिहास साक्षी है कि रत्नावली की इस धिक्कार ने ही पति तुलसीदास को श्रेष्ठ राम भक्त और कवि शिरोमणि बनाया. ये तो मात्र एक उदाहरण है महिला की श्रेष्ठता का, भारतीय और विश्व इतिहास में ऐसे अनगिनत उदाहरण मिलेंगे, मिल भी रहे थे किंतु जब से यू ट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक जैसे सोशल मीडिया से कमाई का जरिया महिलाओं को मिला है,कुछ चंद महिलाओं ने पूरे नारी समाज के सम्मान को दांव पर लगा दिया है, नारी के चरित्र को हँसी मज़ाक का विषय बना दिया है.

स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था कि - "महिलाओं की स्थिति देखकर ही किसी समाज की सभ्यता का मापदंड किया जा सकता है." और आज हम समाज में गिरते सभ्यता के मापदंड को देखकर कह सकते हैं कि महिलाओं की स्थिति गिरती जा रही है और यह दुख और क्षोभ की बात है कि इसका मुख्य कारण गिरती जा रही महिलाओं की नीयत और मानसिकता है. पहले तो समाज ही महिलाओं को सम्मानित दर्जा देने से बचता रहा है जिसे नारी शक्ति द्वारा अपनी श्रेष्ठता के बल पर हासिल किया गया किन्तु आज जबकि देश की सर्वोच्च न्याय संस्था माननीय उच्चतम न्यायालय स्त्री को उसका सम्मान दिलाने के लिए प्रयासरत है ऐसे में यू ट्यूब, इंस्टाग्राम, प्लेटफॉर्म आदि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर स्वयं महिला अपनी इज़्ज़त की धज्जियाँ उड़ा रही है.

सुखदेव सिंह बनाम सुखबीर कौर के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अमान्य विवाह में भरण पोषण के अधिकार को तो बरकरार रखा ही, साथ में बॉम्बे हाई कोर्ट की पूर्ण खंडपीठ द्वारा दिए गए निर्णय में नारी के प्रति प्रयोग किए गए शब्दों को स्त्री-द्वेषपूर्ण माना.न्यायालय ने टिप्पणी की, "भारत के संविधान की धारा 21 के तहत, प्रत्येक व्यक्ति को गरिमापूर्ण जीवन जीने का मौलिक अधिकार है। किसी महिला को "अवैध पत्नी" या "वफादार रखैल" कहना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उस महिला के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होगा। इन शब्दों का उपयोग करके किसी महिला का वर्णन करना हमारे संविधान के लोकाचार और आदर्शों के विरुद्ध है। कोई भी व्यक्ति ऐसी महिला का उल्लेख करते समय ऐसे विशेषणों का उपयोग नहीं कर सकता, जो अमान्य विवाह में पक्षकार है। दुर्भाग्य से, हम पाते हैं कि हाईकोर्ट की फुल बेंच के फैसले में ऐसी आपत्तिजनक भाषा का उपयोग किया गया। ऐसे शब्दों का प्रयोग स्त्री-द्वेषपूर्ण है। बॉम्बे हाईकोर्ट की फुल बेंच द्वारा बनाया गया कानून स्पष्ट रूप से सही नहीं है और यह भी कहा कि न्यायिक चर्चा में महिलाओं की गरिमा को बरकरार रखा जाना चाहिए. "

माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्णय में महिलाओं के सम्मान को लेकर व्यक्त की गई यह चिंता महत्वपूर्ण है किन्तु अन्य कोई महिलाओं का सम्मान तब ही तो करेगा जब महिलाओं में स्वयं के लिए कोई आत्म सम्मान की भावना, इच्छा दिखाई देती हो, जो कि वर्तमान में कहीं भी नजर ही नहीं आती. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म यू ट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक आदि पर महिला व्लॉगस में से अधिकांश उसकी पैसे पैसे की भूख को ही दिखा रहे हैं. जिस नृत्य को देखने के लिए पहले लोग बदनाम गलियों की, थिएटर की, सिनेमाघरों की खाक छानते फिरते थे, अब वे सब मोबाइल पर इन्टरनेट के माध्यम से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इन दिनों एक लड़की में व्यू बढ़ाने की हवस इस हद तक बढ गई कि बिस्तर पर बीमार पड़ी मां को छोड़कर लड़की माँ की देखभाल करने के बजाय कमरे के भीतर ठुमके लगाने लगी, रील बनाने लगी,और भी ज्यादा बेशर्मी तब हो गई जब व्यू बढ़ाने के लिए लड़की शमशान में ही डांस करने पहुंच गई. श्मशान घाट जहां पहुंचकर आदमी की भौतिक वादी प्रवृत्ति पर कुछ समय के लिए अंकुश ही लग जाता है और सामन्यतः हिन्दू स्त्री के लिए तो हिन्दू धर्म में यह स्थान लगभग अर्थी पर ही जाने के लिए मान्यताओं के अनुसार तय है, उस स्थान पर इस तरह नाच गाना करना चकित करता है. और डांस के लिए गाने का चयन, वह भी अस्थियों भरे कलश के आगे इससे भी अधिक चौंकाने वाला है कि लव तुझे लव गाना अस्थियों के सामने नाचना हिन्दू धर्म की मान्यताओं को धक्का पहुंचाने के लिए काफी है.पैसे कमाने के लिए लड़कियां, महिलाएं खुले आम नाच रही हैं पति को नचा रही हैं, जो नृत्य घर के लोगों के काफी मिन्नतें करने के बाद भी करने को नव वधू तैयार नहीं होती थी आज रील बनाने के लिए बैंड बाजे तक के सामने खुलेआम कर रही है. पैसे की भूख महिलाएं किस तरह मिटा रही हैं इसके कुछ दृश्य निम्न हैं -

*दृश्य-1-पत्नि को हक है पति का पैसा खर्च करने का.

*दृश्य-2-पत्नि पति की चोरी से उसका बटुआ निकाल रही है और उसमें से रुपये चुरा रही है.

*दृश्य-3-पति पत्नि को बाईक पर ससुराल लेकर जा रहा है तो वह बाईक पर पति से दूर बैठती है तो पति उसे पास बैठने के लिए कई बार पैसे देता है और वह पैसे लेकर मुस्कराती हुई पति से चिपककर बैठती है.

*दृश्य-4-बिस्तर पर बीमार मां पड़ी है और बेटी रील बना रही है ‘नमक इश्क का’ गाना बजाकर अस्पताल के कमरे में ठुमके लगा रही है. 

*दृश्य-5-शमशान घाट पर लड़की अस्थियों के कलश के सामने लव तुझे लव मैं करती …गाने पर डांस कर रही है. 

क्या दिखाना चाह रही हैं आज की ये आधुनिक महिलाएं? जिस गंदी सोच से माननीय उच्चतम न्यायालय तक उन्हें उबारना चाह रहा है उस दूषित सोच को ये मात्र कुछ हज़ार-लाख रुपये बटोरने के लिए अपने व्लॉगस के व्यू, लाइक, कमेन्ट बढ़ाने के लिए अपने ऊपर सहन कर रही हैं. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इन कुछ महिलाओं के चेनल पर कमेन्ट सेक्शन को देखकर ऐसा लगने लगा है कि देश की सभ्यता संस्कृति का पतन काल अब शायद करीब है, कलियुग का काल शायद अब आने ही वाला है. आज रणवीर इलाहाबादिया के गंदे कमेंट को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर, समाज में, राजनीतिक हल्कों में हंगामा मचा हुआ है किन्तु भद्दे और गंदे कमेंट करने वाले केवल रणवीर इलाहाबादिया ही नहीं थे उनके साथ एपिसोड में एक लड़की भी बैठी थी जिसने भी वहां बेहद ही आपत्तिजनक शब्द बोले थे,अपूर्वा नाम की उस लड़की ने मां के प्राइवेट पार्ट पर ही बेहद गंदा और अश्लील कमेंट किया था,क्या कहा जाए इन नारी शक्तियों को? क्या इन्हें शक्ति की श्रेणी में रखा जाना चाहिए जो स्वयं महिला होकर महिला पर और उससे भी अधिक माँ पर इतना भद्दा बोल रही है और नारी के सबसे बड़े गहने शर्म की सारी सीमाएं ही लांघ रही हैं. 

       ऐसे में यू ट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को जल्द ही भारत में इन्हें लेकर नियम बनाने होंगे या फिर भारतीय सरकार को देश की संस्कृति को बिगड़ने से बचाने के लिए इन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के चलने पर ही पूर्ण रूप से विराम लगाने होंगे.

शालिनी कौशिक एडवोकेट

कैराना (शामली)




रविवार, 9 फ़रवरी 2025

श्री राधा जी किसका अवतार थी? – डॉ. श्याम गुप्त

पुराण रहस्य----राधा रहस्य--

श्री राधा जी किसका अवतार थी? – डॉ. श्याम गुप्त

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भगवान श्रीकृष्ण के बारे में कई पुराणों में लिखा है कि वह भगवान विष्णु के आठवें अवतार हैं। देवी राधा को देवी लक्ष्मी का अवतार बताया गया है। सुदामा और श्रीदामा को श्रीकृष्ण के गोलोक का साथी कहा गया है।

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लेकिन महाभागवत पुराण में श्रीकृष्ण और देवी राधा के अवतार की जो कथा है वह अद्भुत है। इसी कथा में सुदामा और श्रीदामा के पूर्वजन्म का भी रहस्य छुपा हुआ है। इस पुराण में बताया गया है कि देवीराधा लक्ष्मी की अवतार नहीं हैं। इस पुराण में देवी राधा और भगवान कृष्ण के प्रेम का रहस्य भी बताया गया है।

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शिव ने रची लीला राधा कृष्ण के अवतार की|

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एकबार भगवान शिव माता पार्वती के साथ कैलाश पर विहार कर रहे थे। तभी भगवान शिव ने माता पार्वती से कहा कि मेरी सभी इच्छाएं पूरी हो चुकी हैं सिवाय एक इच्छा के। जिसे केवल तुम ही उसे पूर्ण कर सकती हो। माता पार्वती ने शिव से पूछा कि आपकी ऐसी कौन सी इच्छा है, आप बताइए, मैं उसे अवश्य पूर्ण करूंगी।

****** शिव ने माता पार्वती से कहा कि अगर तुम मुझ पर प्रसन्न हो तो एक बार तुम पृथ्वीलोक पर पुरुष के अवतार में जन्म लो और मैं तुम्हारी प्रियतम बनकर स्त्री के रूप में जन्म लूं। वहां तुम मेरे स्वामी और मैं तुम्हारी पत्नी बनकर रहूं, बस यही मेरी इच्छा है। माता पार्वती ने शिवजी की इस इच्छा को स्वीकृति दे दी।

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माता पार्वती ने कहा कि भद्रकाली का मेरा स्वरूप पृथ्वी पर कृष्ण का अवतार लेगा और आप अपने अंश से स्त्री का रूप धारण कर लीजिए।

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नौ रूपों में शिवजी हुए थे पृथ्वी पर अवतरित |

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शिवजी ने कहा कि मैं पृथ्वी पर नौ रूपों में प्रकट होउंगा। सबसे पहले वृषभानुपुत्री राधा के रूप में जन्म लूंगा। तब मैं तुम्हारे साथ प्राणप्रिय होकर प्रेम विहार करूंगा।

-----शिवजी ने माता पार्वती से कहा कि राधा के अतिरिक्त मैं कृष्ण की आठ पटरानियों के रूप में जन्म लूंगा। जिसमें रुक्मिणी, सत्यभामा, जाम्बवंती, कालिन्दी, मित्रबिन्दा, सत्या, भद्रा और लक्ष्मणा मेरा ही अंश होंगी।

----इसके साथ ही जो मेरे भैरव रूप हैं वो भी पृथ्वी पर रमणीरूप धारणकर भूमि पर अवतरित होंगे। यह थे **श्रीदामा और सुदामा** |

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माता पार्वती ने कहा कि आपकी इच्छा अवश्य पूरी होगी। मैं इन सभी के साथ ऐसा विहार करूंगी, जो इतिहास में आजतक किसी ने नहीं किया होगा। इसके साथ ही..

----- मेरी **जया और विजया** नाम की दोनो सखियां पुरुष रूप में पृथ्वी पर जन्म लेंगी, जो **श्रीदामा और सुदामा** होंगी।

----- ***भगवान विष्णु ***भी पृथ्वी पर मेरे बड़े भाई बनकर पृथ्वी पर जन्म लेंगे, जो **बलराम और अर्जुन** के नाम से प्रसिद्ध होंगे। जो हर कार्य में मेरा साथ देंगे।

माता पार्वती ने कहा कि इस तरह मैं आपके साथ पृथ्वी पर पुरुष रूप में विरह करके वापस कैलाश पर लौट आउंगी।

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इसके बाद ब्रह्माजी से आज्ञा लेकर मां काली के रूप में श्रीकृष्ण और राधारानी के रूप में भगवान शिव धरती पर अवतरित हुए।

----- महाभारत काल में पांडवों ने मां भगवती की पूजा की थी, तब मां भगवती ने कहा था कि मैंने श्रीकृष्ण रूप में धरती पर अवतार लिया है और कंस का वध किया है। कौरवों के अंत तक मैँ कृष्ण रूप में तुम्हारे साथ रहूंगी।






मंगलवार, 21 जनवरी 2025

भारतीय समझदार राजनेत्री इकरा चौधरी

 


      इकरा हसन आज भारतीय राजनीति में एक विख्यात और समझदार राजनेत्री के रूप में पहचान बना रही हैं. कैराना क्षेत्र से हसन परिवार की चौथी सांसद के रूप में तो इकरा हसन ने नाम कमाया ही है उससे कहीं ज्यादा नाम राजनीति में होते हुए, पढ़ी लिखी होते हुए भी सर से दुपट्टा न हटने देने वाली भारतीय नारी के संस्कारों को अपनाकर कमा रही हैं. 

     विकिपीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार इकरा चौधरी एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा वर्तमान में कैराना लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र से सांसद हैं। वे समाजवादी पार्टी दल की राजनेत्री हैं। इकरा लोकसभा के साथ-साथ राज्यसभा के पूर्व सदस्य दिवंगत चौधरी मुनव्वर हसन और लोकसभा की पूर्व सदस्य बेगम तबस्सुम हसन की बेटी हैं. उन्होंने नई दिल्ली के क्वीन मैरी स्कूल से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की और दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्री राम कॉलेज से कला स्नातक की डिग्री हासिल की। ​​इसके बाद उन्होंने 2020 में लंदन के SOAS विश्वविद्यालय से एमएससी अंतर्राष्ट्रीय राजनीति और कानून की पढ़ाई पूरी की।इकरा एक राजनीतिक परिवार से आती हैं, उनके दादा अख्तर हसन, पिता मुनव्वर हसन और माँ तबस्सुम हसन कैराना से पूर्व सांसद हैं। उनके भाई नाहिद हसन तीन बार विधान सभा के सदस्य रह चुके हैं। उन्होंने 2016 में जिला पंचायत चुनाव लड़कर 5000 वोटों से हारकर अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। उन्होंने अपने भाई नाहिद हसन के लिए चुनाव अभियान शुरू किया, जो कुछ मामलों में जेल में बंद थे। उन्होंने अभियान का नेतृत्व किया और अपने भाई को कैराना विधानसभा क्षेत्र से विजयी उम्मीदवार के रूप में चिह्नित किया । 2024 के आम चुनाव के दौरान , इकरा ने भारतीय जनता पार्टी के प्रदीप कुमार को 69,116 मतों के अंतर से हराकर कैराना से संसद सदस्य बनने का गौरव प्राप्त किया । शिक्षा मंत्रालय के बजट पर चर्चा के दौरान उन्होंने अल्पसंख्यक शिक्षा के साथ भेदभाव करने के लिए बजट की आलोचना की। उन्होंने मौलाना आज़ाद फाउंडेशन के बंद होने और पाठ्यपुस्तकों से डार्विन के सिद्धांत और मुगल इतिहास के विरूपण सहित महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और वैज्ञानिक सामग्री को हटाने पर भी चिंता व्यक्त की।

    इकरा चौधरी आज भारतीय राजनीति का गौरव बन गई हैं. क्षेत्र की बेटी की काबिलियत और क्षेत्रवासियों से अपनापन सभी क्षेत्रवासियों के दिलों में अपनी गहरी छाप छोड़ चुका है. 

    इस सब के मध्य एक स्थिति ऐसी भी है जिसे लेकर स्वयं इकरा चौधरी भी नाराजगी जता चुकी हैं और स्वयं कह चुकी हैं कि "मैं चाहती हूं कि मैं इन रील के स्थान पर अपने काम के लिए पहचानी जाऊँ." 

संसद में कैराना की आवाज उठाने वाली, संभल हिंसा में मुसलमानों को लेकर चिंता व्यक्त करने वाली इकरा चौधरी के भाषण, बयान सुनने के लिए क्षेत्रवासी टी वी, मोबाइल पर चिपके रहते हैं. इकरा चौधरी के वीडियो सामने स्क्रीन पर देखते ही जैसे ही उन्हें क्लिक करते हैं उनमें उनके भाषण के स्थान पर, बयानों के स्थान पर, क्षेत्रवासियों के साथ चर्चा करते हुए उनके आश्वासनों के स्थान पर फिल्मी गाने लगे होते हैं जो क्षेत्र की बेटी की गरिमा का, मर्यादा का उल्लंघन करते हुए नजर आते हैं. 

     आज देश को जिस तरह के युवा, सद्भावना पूर्ण राजनेताओं की जरूरत है इकरा चौधरी उनमें से एक हैं. वे जनता में, युवाओं में लोकप्रिय हैं और उनमें वो दिमाग है जो युवा पीढ़ी को सही दिशा में लेकर जा सकता है, बुजुर्गों, महिलाओं की सुरक्षा, समस्याओं का समाधान कर सकता है. इसलिए यह जरूरी है कि इकरा चौधरी से जुड़ी इस तरह की गतिविधियों रील्स पर रोक लगाई जाए. ताकि वे अपना कार्य सुरक्षा और सुविधा के साथ शांत मस्तिष्क के साथ सम्पन्न कर सकें. 

शालिनी कौशिक 

एडवोकेट 

कैराना (शामली) 


रविवार, 19 जनवरी 2025

परी नहीं बेटी


 हिन्दू धर्म की एक प्रसिद्ध उक्ति है "यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता" जिसे हिन्दू धर्मावलंबियों द्वारा बहुत ही जोर शोर से उच्चारित किया जाता है. आजकल प्रयाग राज उत्तर प्रदेश में महाकुंभ आयोजित किया जा रहा है, जहां चहुँ ओर हिन्दू धर्म का डंका बज रहा है. साधू संतों के प्रवास के दौरान सारी प्रयाग राज की धरती पवित्र हो रही है. हिन्दू धर्म का झंडा बुलन्द करने वाली भाजपा नीत केंद्र और राज्य की सरकार ने श्रद्धालुओं के प्रयाग राज में पहुंचने की उत्तम व्यवस्था की है मीडिया द्वारा हिंदू धर्म - सनातन धर्म के इस पर्व को लेकर खासा प्रचार प्रसार किया जा रहा है. जिससे युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक में उल्लास पूर्ण वातावरण है जिससे बड़ी संख्या में श्रद्धालु ज़न वहां पहुंच रहे हैं. इसी उल्लास को लेकर आने वाली दो खबरों ने हिन्दू धर्म संस्कृति पर सवाल खड़े कर दिए हैं. एक मध्य प्रदेश के महेश्वर से माला बेचने आई मोनालिसा के साथ युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक का असभ्य, अशोभनीय व्यवहार और एक साध्वी बनने जा रही मॉडल हर्षा रिछारिया की सुन्दरता के पीछे पागलपन की हदें पार करती हिन्दू जनता. सवाल खड़े करती हैं हिन्दू धर्म के इस महाआयोजन पर, जिसमें श्रद्धा, आस्था, भक्ति सर्वोच्च होनी चाहिए, वहां वासना आगे दिखाई दे रही है. वहां पहुंची हिन्दू धर्मावलंबियों की भीड़ को ये सुन्दर, परी, अप्सरा नजर आ रही हैं, क्यूँ आखिर क्यूँ? धर्म के इस श्रेष्ठ पर्व में भी इनके मन में उनकी सुन्दरता ही क्यूँ उतर रही है क्यूँ इनके मन में इन्हें लेकर धार्मिक भावनाएँ नहीं उभर रही हैं? क्यूँ हिन्दू धर्म की श्रेष्ठ मान्यताएं इनके मन में मोनालिसा को इनकी बेटी, बहन और हर्षा रिछारिया को एक देवी के रूप में स्थान नहीं दिला पा रहा है? कहाँ कमी रह गई है भाजपा की नीतियों में जो बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का अभियान चला कर भी धर्म के इस महाकुंभ तक में बेटियों को सुरक्षित वातावरण नहीं दे पा रही है कि आखिर मोनालिसा के पिता को बेटी को दबंगों द्वारा उठा लिए जाने की धमकी के डर से घर वापस भेजना पड़ गया है और मॉडल से साध्वी बनी हर्षा रिछारिया को रोते रोते महाकुंभ छोड़ना पड़ गया है.

शालिनी कौशिक एडवोकेट

कैराना (शामली)