शनिवार, 12 मई 2012

ममता...

मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनायें !


मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनायें !

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NO ONE CAN LIKE YOU ! -HAPPY MOTHER'S DAY


O MOTHER ! O MOTHER !
NO ONE CAN LIKE YOU !

YOU ARE WITH US  WHEN WE ARE SAD
YOUR SWEET SMILE MAKE US GLAD
YOU ARE SO SWEET   OUR HEART BEAT
O MOTHER ! O MOTHER !
NO ONE CAN LIKE YOU !


NEVER GIVE UP HOPE  YOU ALWAYS SAY
WHEN WE CONFUSE  YOU SHOW RIGHT WAY
MAY YOU LIVE LONG HEALTHY STRONG
O MOTHER ! O MOTHER !
NO ONE CAN LIKE YOU !


हे  माँ ! हे माँ !
तेरे जैसा कोई नहीं !

तुम हमारे साथ   होती हो 
जब हम उदास होते हैं ;
तुम अपनी मीठी  मुस्कान  से
हमें  प्रसन्न  कर देती हो ;
तुम कितनी प्यारी हो !
हमारे दिल की धड़कन हो !

हे माँ ! हे माँ !
तेरे जैसा कोई नहीं !
तुम हमेशा कहती हो आशा 
का दामन  मत छोडो ;
जब हम भ्रमित होते हैं 
तुम सही मार्ग दिखाती हो ;
तुम दीर्घजीवी हो !स्वस्थ हो !
शक्तिसंपन्न हो !

हे माँ ! हे माँ ! तेरे जैसा कोई नहीं !

                        शिखा कौशिक 


शुक्रवार, 11 मई 2012

माँ ! वो पारस है !


माँ ! वो पारस है !


कभी माँ के थके पैरों को दबा कर देखो
ख़ुशी जन्नत की अपने दिल में तुम पा जाओगे .

जिसने देकर के थपकी सुलाया है तुम्हे
क्या उसे दर्द देकर चैन से सो पाओगे ?

करीब बैठकर माँ की नसीहतें भी सुनो
कई गुस्ताखियाँ करने से तुम बच जाओगे .

उसने हर फ़र्ज़ निभाया है बड़ी तबियत से
उसके हिस्से का क्या आराम तुम दे पाओगे ?

उम्रदराज़ हुई चल नहीं वो पाती है
उसे क्या छोड़ पीछे आगे तुम बढ जाओगे ?

जिसने कुर्बान करी अपनी हर ख़ुशी तुम पर
उसके होठों पे क्या मुस्कान सजा पाओगे ?

तुम्हे �े मिटटी से बनाती सोना
माँ ! वो पारस है उसे भूल कैसे पाओगे ?

शिखा कौशिक

गुरुवार, 10 मई 2012

बाल गीत...हनुमान जी...डा श्याम गुप्त.....

औषधियों  का  पर्वत लाकर,
लखन-लाल के प्राण बचाए।
श्री राम से आशिष पाकर ,
वे संकट-मोचन कहलाये |

बचपन में जब सूरज निगला,
लाल गैस का  गोला भाया |
टूटा जबड़ा  इंद्र -वज्र से,
हनुमान तब नाम कहाया ।

तीव्र वायु की भांति दौड़ते ,
पवन-पुत्र भी कहलाते हैं ।
वानर सेना के नायक वे,
कपीश भी बोले जाते हैं ।

अतुलित बलशाली भी वे हैं ,
औ ज्ञान-गुणों के सागर भी ।
मातु सिया के वर-प्रभाव से ,
हैं ऋद्धि-सिद्धि के नागर भी|

ये अपने बजरंग-बाली हैं,
श्री राम के भक्त दुलारे ।
सब दुष्टों को मार भगाते ,
सीता-राम ह्रदय में धारे ।।

बुधवार, 9 मई 2012

रविकर अंकुर नवल, कबाड़े पौध कबड़िया -

Young girl sitting on a log in the forest
जलें लकड़ियाँ लोहड़ी, होली बारम्बार ।
जले रसोईं में कहीं, कहीं घटे व्यभिचार ।

कहीं घटे व्यभिचार, शीत-भर जले अलावा ।
भोगे अत्याचार,  जिन्दगी विकट छलावा ।

रविकर अंकुर नवल, कबाड़े पौध कबड़िया ।
आखिर जलना अटल, बचा क्यूँ रखे लकड़ियाँ ।।
Lohri
लकड़ी काटे चीर दे, लक्कड़-हारा रोज ।
लकड़ी भी खोजत-फिरत, व्याकुल अंतिम भोज ।
http://upload.wikimedia.org/wikipedia/commons/f/f9/Sati_ceremony.jpg

ये तो घाटे का सौदा रहा ''!!!-A SHROT STORY


''ये तो घाटे का सौदा रहा ''!!!-A SHROT STORY 

'संतरेश  की माँ यहाँ आ   ...'' पति सत्तो   की  कड़क   आवाज़  पर बर्तन    मांजती    सुशीला    धोती  के पल्लू  से हाथ पोछती हुई रसोईघर से निकल  आँगन में  पड़ी खाट  पर बैठे पति  के पास आकर जमीन पर उकडू बैठ गयी .संतरेश  का  बाप  अंगूठे व् तर्जनी से पकड़ी हुई बीडी को मुंह   से निकालते  हुए  बोला  -''कल्लू  मिला  था  ...कह  रहा  था  सत्रह  की हो   गयी तेरी  लौंडिया  ..ब्याह  न  करेगा  ?''...मैं बोला तू ही बता  ...तो बोला ..''तीन  हज़ार  dene   को तैयार  है पास  के गॉव  का सुक्खू   ...उम्र भी बस   चालीस   के आस   पास  है .मैं बोला तीन  तो कम हैं  ...इतना तो छोरी  ही कमा  लावे है काम  करके इधर उधर से ....फिर वो बोला 'अच्छा कल   को बताऊंगा  सुक्खू से बात करके ...''...इब तू बता  के कहवे ?'' सुशीला मुंह बनती  हुई बोली -''धी का जन्म तो होवे ही है नरक भोगने को ...जितने में चाहवे कर दे ..मैं कुछ  बोल के क्यों खोपडिया  पे जूत लगवाऊँ ....'''ये कहकर  सुशीला बर्तन  धोने  फिर  से  रसोईघर  को  चली  गयी  .दो दिन बाद संतरेश की शादी सुक्खू के साथ  हो गयी .विदाई  के समय सुशीला की आँख में आंसू  थे और सत्तो रूपये  गिनते  हुए  मन में सोच रहा था कि-''ये तो घाटे का सौदा रहा ''!!!
                                                -shikha  kaushik  

सोमवार, 7 मई 2012

मेरे पापा .. तुम्हारे पापा से भी बढ़कर हैं-a short story


मेरे पापा .. तुम्हारे पापा से भी बढ़कर हैं-a short story
Pretty Cute Girl
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   स्कूल  में  भोजनावकाश  के  समय  कक्षा  पांच  के तीन  विद्यार्थी  राजू ,सोहन व् बंटी ने अपने टिफिन बॉक्स खोले और निवाला  मुंह में रखते हुए राजू बोला-''...पता है सोहन मेरे पापा को  मेरी  बहन बिलकुल पसंद  नहीं .पापा कहते हैं कि यदि उसकी जगह भी मेरे भाई होता तो हमारा  परिवार पूरा हो जाता .कल हम दोनों में लड़ाई हो गयी .मेरी गलती थी ....पर पापा ने मेरी बहन के गाल पर जोरदार  तमाचा लगाते हुए कहा-शर्म नहीं आती अपने भाई से लडती है !''.....सोहन बोला-''मेरे पापा तो तुम्हारे पापा से भी बढ़कर हैं कल माँ से कह रहे थे -''यदि इस  बार लड़की  पैदा  की तो घर   से  निकाल दूंगा तुझे  ..तुम  तो जानते  ही  हो मेरे पहले  से ही  तीन छोटी  बहने    हैं .''.....उन    दोनों की बात  सुनकर  बंटी बोला -''...पर मेरे पापा तुम   दोनों के पापा से बढ़कर हैं .मेरी माँ के पेट     में ही  जुड़वाँ  बहनों  को परसों  ख़त्म  करवाकर  आये  हैं .ये  तो अच्छा  हुआ   कि मैं  लड़का  हूँ  वरना  वे  मुझे  भी जन्म न  लेने   देते   ....''  तभी   भोजनावकाश   की समाप्ति  की घंटी  बजी  और 
तीनों  अपनी  अपनी  सीट   पर जाकर  बैठ   गए  .
                 शिखा कौशिक