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शुक्रवार, 12 अप्रैल 2013

तेजाबी हमले का खुलासा -कांधला [शामली ]

शामली : कांधला में दस दिन पहले चार सगी शिक्षिका बहनों समेत पांच लड़कियों पर तेजाब फेंकने की घटना का पुलिस ने खुलासा कर दिया। लड़कियों के बहनोई को साथी समेत गिरफ्तार किया गया है। इस मामले में तेजाब फेंकने वाले दोनों आरोपी अभी पुलिस पकड़ में नहीं आए हैं। पुलिस के मुताबिक, पारिवारिक कलह के चलते बहनोई ने तेजाब कांड की योजना बनाई थी। एसपी ने पुलिस टीम को पांच हजार रुपये नगद पुरस्कार दिया है।
शुक्रवार को एसपी अब्दुल हमीद ने अपने कार्यालय में प्रेसवार्ता कर तेजाब कांड का खुलासा किया। एसपी के मुताबिक, इस केस में पुलिस ने बाबर जंग मोहल्ला गुजरान कांधला हाल निवासी मौजपुर दिल्ली व उसके साथी जावेद निवासी कांधला को गिरफ्तार किया है। बाबर पीड़ित लड़कियों का बहनोई है। बाबर ने अपनी साली इशा को हतोत्साहित करने के लिए साथी जावेद के साथ मिलकर तेजाब फेंकने की योजना बनाई थी। इसके लिए दो युवकों से 40 हजार रुपये में सौदा तय किया था। इसमें 30 हजार एडवांस व दस हजार रुपये घटना के बाद खाते में ट्रांसफर किए गए। जावेद ने अपने मोबाइल से शिक्षिका बहनों के कालेज से निकलने की सूचना तेजाब फेंकने वाले युवकों को दी थी। जावेद का मोबाइल पुलिस ने बरामद कर लिया। तेजाब फेंकने वाले दोनों अभियुक्त अभी फरार हैं। एसपी ने तेजाब कांड का खुलासा करने वाली टीम को पांच हजार रुपये नगद पुरस्कार दिया है। प्रेसवार्ता के दौरान सीओ कैराना सीपी सिंह व कांधला एसओ पंकज वर्मा भी मौजूद रहे। विदित हो कि दो अप्रैल की शाम को कांधला में चार शिक्षिका बहनों कमरजहां, सोनम, इशा व आयशा पर बाइक सवार दो युवकों ने पिचकारी से तेजाब फेंका था। उस समय वे हिंदू इंटर कालेज में परीक्षा ड्यूटी देकर घर जा रही थी। इस दौरान एक अन्य किशोरी अलीशा भी चपेट में आकर तेजाब से झुलस गई थी। इशा का दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में उपचार चल रहा है। आयशा की तरफ से रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
इशा थी टारगेट
एसपी अब्दुल हमीद ने बताया कि अेभियुक्तों ने पूछताछ में बताया कि इस केस में इशा को टारगेट बनाकर तेजाब फेंका गया था। इस दौरान साथ चल रही तीनों बहनों व एक किशोरी पर भी तेजाब की छींटे पड़ गए थे।
परिजनों ने किया हंगामा
बाबर की गिरफ्तारी की सूचना पर परिजन गुरुवार रात को एसपी आवास पर पहुंचे और बाबर को निर्दोष बताते हुए खूब हंगामा किया, यहां तक कि परिजनों ने आत्मदाह की चेतावनी भी दे डाली थी। एसपी ने बताया कि परिजनों को इस केस में बाबर के लिप्त होने के साक्ष्य दिखाए गए और परिजनों की बाबर व जावेद से बात कराई गई। इसके बाद परिजन संतुष्ट होकर चले गए।
नहीं बताई कलह की वजह
तेजाब कांड का कारण एसपी ने कलह बताया, लेकिन इसका खुलासा करने से बचे। कई बार पूछने पर भी एसपी ने बस इतना ही कहा कि किसी भी महिला या लड़की के बारे में सार्वजनिक तौर पर कुछ भी कहना सही नहीं है।

बुधवार, 10 अप्रैल 2013

तेजाबी तानों से बेहाल पीड़ित परिवार -तेजाबी हमलावर अब तक फरार

कांधला में २ अप्रैल को हुई तेजाबी घटना का कोई भी हमलावर आज दसस्वें  दिन तक भी नहीं पकड़ा गया है .कल कॉग्रेस की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रीता बहुगुणा जी ने भी पीड़ित परिवार से मिलकर हर संभव मदद व् अपराधियों को जल्द से जल्द पकडे जाने का आश्वासन दिया है .परसों शाम मैं भी सुश्री शालिनी कौशिक जी व् हमारे पिता जी के मित्र श्री प्रेमचंद गुप्ता जी के साथ पीड़ित परिवार के घर पर उनके परिजनों से मिली .नौ बहनों में दूसरे नंबर की बहन अंजुमन दीदी का गला पड़ा हुआ था .इस घटना के बाद से उनके परिवार का  जीवन नर्क हो गया है .उनका कहना था कि पुलिस जांच के नाम पर उनके ही फोन टेप कर रही है और तंज कस रही कि इतने फोन व् एस.एम्.एस तो हमारे भी नहीं आते .सबसे छोटी बहन जो 11  कक्षा की छात्रा है घटना के दिन से स्कूल नहीं गयी है .पुलिस उससे व् उसके साथ के बच्चों से भी पूछताछ कर प्रताड़ित कर रही है ..उनका कहना है कि पूरी बिरादरी में ये घटना एक तफरी का विषय बन गया है .कोई आपस में बात करता हुआ कहता है कि -हाय कैसी दिखती हैं वे लड़कियां ?और कुछ लोग तो सर.गंगाराम हॉस्पिटल में जीवन -मृत्यु से लडती उनकी बहन के लिए यहाँ तक कह रहे हैं कि वो पट्टी बंधकर नाटक कर रही है .तेजाबी हमले की शिकार लड़कियों के चरित्र पर सवाल उठाए जा रहे हैं .अंजुमन दीदी का कहना है कि -सब यह प्रदर्शित कर रहें हैं कि वे तो आब- ए -जम-जम में नहाये हुए पाक-साफ हैं और पीड़ित परिवार तेजाब में नहाया हुआ गन्दा परिवार है . कोई कहता है कि इन लड़कियों ने नौकरी पाने के लिए यह नाटक रचा है और कोई कहता है कि -ये लडकिया उन लड़कों से बात करती आ रही थी .तेजाबी हमले की शिकार बहनों में से एक पहले से ही सर्वाइकल  दर्द की शिकार है उससे देखते ही मन भर आया .अंजुमन दीदी का गुस्सा इस सारी बिरादरी से है जिसने ऐसे कठिन समय में उनका साथ छोड़  दिया  है .हमने जब पूछा कि आपको किसी पर शक है तो उनका कहना था कि -हमारे लिए तो सारी दुनिया ही दुश्मन हो रही है किसका नाम लें .पीड़ितों की माता जी ने बताया कि -लडकिया बहुत डरी हुई हैं और रात में डरकर जाग जाती हैं .सब हालात देख व् सुनकर मैं व् शालिनी जी इसी निष्कर्ष पर पहुंचें कि यदि पुलिस सही ढंग से कार्यवाही करती तो अब तक दोनों तेजाबी हमलावर जेल के भीतर होते और इन हमलावरों से बढ़कर है हमारा तेजाबी मानसिकता वाला ये समाज जो पीड़ित परिवार को अपने तेजाबी विचारों से हर घडी  जला रहा .
हमलावर शीघ्र पकडे जाये और उन्हें फाँसी की सजा मिले व् पीड़ित बहने  शीघ्र   इस सदमे व् तेजाबी घावों से निजात पायें ऐसी कामनाओं के साथ मैं अपनी इस ब्लॉग पोस्ट को समाप्त करती हूँ .
       शिखा कौशिक 'नूतन '

रविवार, 7 अप्रैल 2013

दुनिया की नज़रे तेजाब !-तेजाबी हमला [कांधला-शामली ]

 

लाडो मेरी कली गुलाब ,
खिलने को है वो बेताब ,
कैसे उसको समझाऊं  मैं ?
दुनिया की नज़रे तेजाब !

महकाऊँ गुलशन ये सारा ,
घडी घडी देखे है ख्वाब ,
है मासूम नहीं मालूम ,
दुनियावी भँवरे हैं ख़राब !
कैसे उसको समझाऊं  मैं ?
दुनिया की नज़रे तेजाब !

अल्हड़ है नादान है ,
रखती केसरिया आबोताब ,
बेपरवाह है नहीं जानती ,
कब हो जाये वो बर्बाद ?
 कैसे उसको समझाऊं  मैं ?
दुनिया की नज़रे तेजाब !

लाडो सुन ले यही मुफ़ीद ,
दबा ले दिल की सभी मुराद ,
नोंच न लें  कहीं  दुनियावाले ,
कहीं मसल दे तेरा शबाब !
 कैसे उसको समझाऊं  मैं ?
दुनिया की नज़रे तेजाब !

कांधला [शामली ] में हुए तेजाबी हमले की शिकार चारों बहनों व् उनकी माता जी का  रो -रोकर बुरा हाल है .अब तक कोई भी हमलावर पकड़ा नहीं गया है .माता जी का कहना है कि पीड़ित बेटियां खौफ में है और पुलिस द्वारा कोई सुरक्षा अब तक नहीं प्रदान की गयी है .इस निठ्ठ्लेपन को धिक्कार है !!


     शिखा कौशिक 'नूतन'

शुक्रवार, 5 अप्रैल 2013

कुम्भकर्णी नींद से जागो -समाज-प्रशासन (तेजाबी हमला-शामली[कांधला] )

 

तेजाबी  हमलों  की  शिकार  बहनों का दर्द मात्र इतना नहीं कि वे तेजाबी हमलें का शिकार बनी .उनका दर्द मृत सामाजिक संवेदनाएं भी हैं .जब उन पर हमला किया गया वे एक कॉलेज की परीक्षा में ड्यूटी देकर घर लौट रही थी .दिन का समय था .वे तेजाब फैकने वालों से भिड़ी भी पर वे मार-पीट कर भागने में सफल रहे .वे सड़क पर पानी के लिए तड़पती रही और स्वयं रिक्शा कर अस्पताल गयी .आस पास के लोंगों  ने  कोई  मदद  नहीं की .यदि समाज की संवेदनाएं इतनी मृत नहीं होती तो शायद ऐसी घटना घटती ही नहीं .
    तेजाबी घटना की शिकार तीन  बहनों ने मीडिया के सामने अपने दुःख को प्रकट करते हुए कहा कि -''कोई हमारा साथ नहीं दे रहा है '' कडवी सच्चाई यही है हमारे समाज की कि लड़कियों पर- ताने कसे जाते हैं ,उनके साथ छेड़खानी की जाती है और जब इस सब से काम नहीं बनता तो तेजाबी हमले कर उन्हें सबक सिखाया जाता है और समाज मूक दर्शक बनकर सब कुछ देखता रहता है .
         आज अगर किशोर व् युवा तेजाबी इरादे लेकर सड़कों पर घूम रहे हैं तो उसके लिए उनके परिवार वाले भी कम जिम्मेदार   नहीं है जो  ये  नहीं देखते  कि उनके नौनिहाल   किसकी   जिंदगी  बर्बाद  करते घूम रहे हैं .पूरा प्रशासन  भी सुप्त अवस्था में रहता है .एक बाइक  पर चार-से पांच लफंगें हूँ-हा-हा का शोर मचाते दिन भर सड़कों पर घूमते  रहते हैं   और उन पर किसी कि पाबन्दी नहीं -न घरवालों की और न प्रशासन की .लड़कियों के स्कूल-कॉलेज की छुट्टी का समय हो अथवा ट्यूशन पर जाने-लौटने  का समय , महिला शिक्षिकाओं के आने-जाने का समय चौराहों-गलियों में लफंगों की भीड़ इकट्ठा रहती है .न समाज इस ओर ध्यान दे रहा और न प्रशासन .
    इस एक तेजाबी घटना ने यदि समाज व् प्रशासन को कुम्भकर्णी  नींद से नहीं जगाया तो आने वाले दिनों में ऐसी घटनाओं के  फिर से  होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता .

     शिखा कौशिक 'नूतन'

गुरुवार, 4 अप्रैल 2013

बेटियों घर से निकलना देख-भाल कर !


आज घर से  निकलते समय परसों हुई तेजाबी घटना की दहशत ने दिल को दहला दिया . मैंने आस-पास आज ज्यादा ध्यान दिया .कौन पास से गुजर  रहा है ? इस पर ध्यान स्वयं ही चला गया .हमारे कस्बे में हुई तेजाबी घटना ने इस धारणा  को तोड़ दिया कि हमारा क़स्बा इस तेजाबी आग से बचा हुआ है .तेजाबी हमले की शिकार बहने बहुत कर्मशील हैं और अपने परिवार के भरण-पोषण हेतु शिक्षिका का कार्य कर रही हैं .सात वर्ष पूर्व पिता के निधन के बाद से अपनी माता जी के साथ जीवन की विषमताओं को झेलती हुई इन बहनों पर तेजाबी हमला करते समय क्या कायर हमलावरों के हाथ नहीं कांपे ?किस माँ की कोख से पैदा होते हैं ये हैवान जो न तो किसी की जिंदगी  का दर्द तो महसूस कर सकते नहीं बल्कि घर से काम के लिए निकली लड़कियों की राह का रोड़ा बन जाते हैं .किन बहनों के होते हैं ये भाई  जो अपनी बहन   की ओर  उठी  नज़र  को तो फोड़ डालना चाहते  हैं पर गैर  लड़की  को सबक  सिखाने  के लिए तेजाब  से झुलसा  डालते  हैं उसकी  जिंदगी .निश्चित रूप  से अब  बेटियों   को बहुत सतर्क रहना होगा .बार बार मेरा ह्रदय उस माँ के दिल के दर्द का अंदाज़ा लगाकर रो पड़ता है जो घर से बाहर जाती बेटियों को लाखों हिदायते देकर भेजती है और जब बेटियां उन सब का पालन करने पर भी वहशियों का निशाना बनें तो माँ किस तरह अपने दिल को समझाए ! -

हवाएं शहर की अब महफूज़ नहीं हैं ,
रख दिया कलेजा माँ का चीरकर ,
बेटियों घर से निकलना देख-भाल कर !

घूमते हैं शख्स कई तेजाब लिए हाथ ,
तुमसे उलझ जायेंगे ये जान-बूझकर , 
बेटियों घर से निकलना देख-भाल कर !

 बेटे नहीं किसी के न भाई किसी के ,
ये पले शैतान की गोद खेलकर ,
बेटियों घर से निकलना देख-भाल कर !

 ज़िस्म है इन्सान का हैवान की है रूह ,
काँपती इंसानियत इनके गुनाह सुनकर ,
 बेटियों घर से निकलना देख-भाल कर !

 किस जगह मिल जाएँ कोई न ठिकाना ,
हर कदम बढ़ाना ज़रा दिल को थाम कर ,
बेटियों घर से निकलना देख-भाल कर !

 मुंह अपना छिपाते मनहूस हमलावर ,
पहचाने कैसे कौन भागे तेजाब फेंककर ,
बेटियों घर से निकलना देख-भाल कर !

 आँहे,  आंसू ,चीखें ,  दर्द बाँटते हैं ये ,
आता मज़ा इनको है खुनी खेल खेलकर ,
बेटियों घर से निकलना देख-भाल कर !

हिफाज़त न छोड़ना मुकद्दर के भरोसे ,
ये घूमते हैं अपना ईमान बेचकर ,
बेटियों घर से निकलना देख-भाल कर !

हे ईश्वर !पीड़ित परिवार  को इस सदमे से उबरने की शक्ति प्रदान कर और ऐसे वहशियों को फांसी  पर लटकाने
का रास्ता साफ कर !

      शिखा कौशिक 'नूतन'