शनिवार, 6 दिसंबर 2014

माँ ...........तेरे जाने के बाद

जब मै जन्मा तो मेरे लबो सबसे पहले तेरा नाम आया,
बचपन से जवानी तक हर पल तेरे साथ बिताया.
लेकिन पता नहीं तू कहा चली गयी रुशवा होकर,
की आज तक तेरा कोई पौगाम ना आया.
मै तो सोया हुआ था बेफिक्र होकर,
और जब जागा तो न तेरी ममता, ना तुझे पाया.
मुझसे क्या ऐसी खता हो गयी,
जिसकी सजा दी तूने ऐसी की मै सह ना पाया.
तू छोड़ गयी मुझे यु अकेला,
मै तो तुझे आखरी बार देख भी ना पाया.
तू तो मुझे एक पल भी छोड़ती नहीं थी,
फिर तूने इतना लम्बा अरसा कैसे बिताया.
तू इक बार आ जा मुझसे मिलने,
देखना चाहता हूँ माँ तेरी एक बार काया.

5 टिप्‍पणियां:

Shalini Kaushik ने कहा…

bhavnatmak prastuti .aabhar

shikha kaushik ने कहा…

MANOBHAVON KEE SARTHAK PRASTUTI .AABHAR

shikha kaushik ने कहा…

MANOBHAVON KEE SARTHAK PRASTUTI .AABHAR

नीरज पाल ने कहा…

सुन्दर, आभार.

ऋषभ शुक्ला ने कहा…

Aap sabhi ka bahoot-bahoot aabhar.