बुधवार, 24 दिसंबर 2014

माँ का चुम्बन !



 मेरे माथे पर 
नरम -गरम 
दो अधरों की छुअन ,
कितना पावन !
कितना पवित्र !
माँ का चुम्बन !
........................................

फैलाकर बाहें 
माँ का घुटनों 
तक झुक जाना ,
दौड़कर मेरा 
माँ से लिपट जाना !
मातृत्व का अभिनन्दन !
कितना पावन !
कितना पवित्र !
माँ का चुम्बन !
.............................................


ढिठाई पर पिटाई ,
मेरा रूठ जाना ,
माँ का मनाना ,
माँ का दुलार ,
ममता की फुहार !
माँ से शुरू 
माँ पर ख़त्म !
मेरा बचपन !
कितना पावन !
कितना पवित्र !
माँ का चुम्बन !

शिखा कौशिक 'नूतन '

3 टिप्‍पणियां:

Roshi ने कहा…

मआ का प्यार तो अनमोल होता है......

कालीपद "प्रसाद" ने कहा…

अनमोल है माँ का चुम्बन !
नारी !
पुरुष ,नारी ,दलित और शास्त्र

Shalini Kaushik ने कहा…

very nice .