रविवार, 16 फ़रवरी 2014

अंतर -लघु कथा

'अरे वाह सिम्मी तुम तो बिलकुल भैय्या की तरह साइकिल चलाने लगी हो ...शाबास बिटिया !'' छह वर्षीय बेटी सिम्मी की तारीफ करते हुए उसके पापा ने उसकी पीठ थपथपाई तभी सिम्मी से तीन साल बड़ा उसका भाई सन्नी वहीँ गॉर्डन में आ पहुंचा और वहाँ खिला एक गुलाब का फूल तोड़कर बालों में अटकाने का प्रयास करने लगा .उसे ऐसा करते देखकर उसके पापा गुस्से में बोले -'' व्हाट नॉनसेंस ..क्या कर रहे हो ..तुम सिम्मी की तरह लड़की हो क्या जो फूल सजाओगे बालों में ..!'' ये सुनते ही सन्नी के हाथ से फूल छूट कर नीचे गिर पड़ा और सिम्मी साइकिल छोड़कर पापा के पास आकर बोली -'' पप्पा जब मैं भैया जैसा काम करती हूँ तब आप मुझे शाबाशी देते हो पर जब भैय्या मुझ जैसा कोई काम करता है तब आप उसे डांट देते हो ..ऐसा क्यूँ पप्पा ?'' पापा उसकी नन्ही हथेलियों को अपनी हथेली में कसते हुए बोले -'' बेटा जी आप अभी छोटी हो जब बड़ी हो जाओगी तब सब समझ जाओगी !'' ये कहकर पापा ने नीचे गिरा गुलाब का फूल उठाया और सिम्मी की चुटिया में सजा दिया .
शिखा कौशिक 'नूतन'

5 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (17-02-2014) को "पथिक गलत न था " (चर्चा मंच 1526) पर भी होगी!
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Roshi ने कहा…

sunder.........

Rachana ने कहा…

sunder laghukatha
rachana

savan kumar ने कहा…

चलों फूल को तो खराब होने से बचा लिया जवाब नहीं दिया तो ....

savan kumar ने कहा…

चलों फूल को तो खराब होने से बचा लिया जवाब नहीं दिया तो ....