मंगलवार, 19 फ़रवरी 2013

श्याम स्मृति....दुर्गा देवी रहस्य ....एवं दशशीश रावण की हार के तत्वार्थ.....डा श्याम गुप्त




          महादेवी दुर्गा  को तीन महा-शक्तियों --महाकाली, शक्ति की देवी...महालक्ष्मी ,धन-संमृद्धि की देवी तथा महासरस्वती, विद्या व ज्ञान की देवी ....का  सम्मिलित अवतार कहा जाता है  |
          महादेवी दुर्गा समस्त दानवों, असुरों व दुष्टों व दुष्टता के विनाश का कारण बनती हैं...| इस तथ्य का तात्विक अर्थ है कि जब जब समाज में फैले अनाचार, असुरता आदि के विनाश की आवश्यकता होती है तो वे सभी व्यक्ति व विद्वान् जिनके पास धन बल है...शक्ति है एवं वुद्धि व ज्ञान का बल है सभी को  समाज से बुराई को दूर करने हेतु संगठित होकर कार्य करना चाहिए |
          भगवान राम ने रावण पर विजय से पूर्व इसी महाशक्ति की आराधना की थी | इसका तत्वार्थ है कि सर्व-शक्तिमान भी जब तक प्रकृति -शक्ति से नहीं जुड़ते ..विजयश्री उन्हें प्राप्त नहीं होती |

6 टिप्‍पणियां:

virendra sharma ने कहा…

सार्थक सामयिक आलेख .

Tamasha-E-Zindagi ने कहा…

आपकी यह पोस्ट आज के (२० फ़रवरी २०१३) Bulletinofblog पर प्रस्तुत की जा रही है | बधाई

डा श्याम गुप्त ने कहा…

धन्यवाद शर्मा जी एवं तुषार जी ....

कालीपद "प्रसाद" ने कहा…

जय बोलो दुगा माँ की
latest post पिंजड़े की पंछी

Kavita Rawat ने कहा…

बहुत बढ़िया सार्थक सार प्रस्तुति ...

डा श्याम गुप्त ने कहा…

जय दुर्गे के काली जी ...