शुक्रवार, 22 जून 2012

आश्रित कुल परिवार, चलाती कुशल स्त्रियाँ-

त्याग प्रेम बलिदान की, नारी सच प्रतिमूर्ति ।
दफनाती सारे सपन, सरल समस्या-पूर्ति ।


सरल समस्या-पूर्ति
, पाल पति-पुत्र-पुत्रियाँ ।
आश्रित कुल परिवार, चलाती कुशल स्त्रियाँ ।

 
निभा रही दायित्व, किन्तु अधिकार घटे हैं ।
  हरते जो अधिकार, पुरुष वे बड़े लटे हैं ।।

6 टिप्‍पणियां:

निवेदिता श्रीवास्तव ने कहा…

सच कह दिया आपने ....-:)

शिखा कौशिक ने कहा…

bilkul sahi kaha hai aapne .aabhar

शिखा कौशिक ने कहा…

bilkul sahi kaha hai aapne .aabhar

M VERMA ने कहा…

नारी की दशा और शायद समाज में यही दिशा है

bhuneshwari malot ने कहा…

true, aabhar

रविकर फैजाबादी ने कहा…

आभार आपका ||