हर नारी व्यक्तित्व महत्वपूर्ण है और प्रभावित करती है, जब तक घर की नारी प्रभावित नहीं करती क्या लाभ.... charity begins from home........
प्रिये !
प्रिये !
सूरज की महत्ता, भादों में-
धूप का अकाल पड़ने पर
सामने आती है |
इसी तरह-
तुम्हारे बिना, आज-
मन का कोना कोना गीला है ;
जैसे बरसात में,
सूरज के बिना,
कपडे गीले रह जाते हैं |
वस्तु की महत्ता का बोध, उसकी-
अनुपस्थिति से बढ़ जाता है |
इसीलिये तुम्हारी अनुपस्थिति में ,
हर बार-
तुम्हारे आकर्षण का ,
एक नया आयाम मिल जाता है |
लहरों और कूलों के आपसी सम्बन्ध में ,
अणु-कणों के आतंरिक द्वंद्व में ,
सर्वत्र संयोग व वियोग का क्रंदन है |
संयोग और वियोग,
वियोग और संयोग,
सभी में इसी का स्पंदन है,
यही जीवन है ||