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मंगलवार, 14 मई 2013

भारतीय नारी ब्लॉग प्रतियोगिता -२ ,प्रविष्टि -४]सुश्री शालिनी कौशिक [ एडवोकेट ]



जीवन में किस नारी ने आपको सर्वाधित प्रभावित किया है इसका कोई मुश्किल जवाब  नहीं है ,''माँ''इससे ऊपर इस पायदान पर कोई हो ही नहीं सकता .वैसे भी  माँ को भगवान ने अपना रूप दिया है और संतान के लिए प्रथम प्रेरणा के रूप में इस धरती पर उतारा है किन्तु मेरे जीवन में मैं अपनी माँ के बाद यह स्थान अपनी छोटी बहन ''डॉ.शिखा कौशिक ''को दूँगी
व्यवस्थापक
डॉ.शिखा कौशिक
       जो मेरी नज़रों में बहुत शर्मीली ,संकोची व् भोली बालिका की श्रेणी में रही ,नहीं सोच सकती थी मैं कि घर पर आने वाले किसी भी मेहमान या बाहरी व्यक्ति को देख छिप जाने वाली ये लड़की इतनी मजबूत होगी कि कोई भी प्रलोभन उसे उसके दृढ इरादों से डिगा नहीं पायेगा ,,नहीं सोचती थी कि समस्त प्रतियोगिताओं में भाग लेने की समस्त योग्यता रखते हुए भी कॉलेज प्रशासन के पक्षपात भरे रवैये को देखकर वह स्वयं को ऐसे उन सबसे अलग कर लेगी कि अपने आलोचकों से अपनी [मिथ्या] आलोचना का ,अपनी स्वार्थ पूर्ति के लिए उसे हराने का एकमात्र हथियार भी छीन उनमे खलबली मचा सकती है , शोध में आ रही कठिनाइयों को इतनी सहजता से झेलकर विपरीत परिस्थितियों का मुकाबला कर अपने दम पर पी.एच-डी.डिग्री हासिल करने वाली मेरी छोटी बहन मेरे जीवन के लिए मात्र एक आदर्श ही नहीं उससे भी बढ़कर है कि उसे देखकर मन यही कहता है कि ''भगवान् अगर अगला जन्म भी मुझे इन्सान का मिले तो मेरी बहन का साथ मुझे अवश्य देना .''
          शालिनी कौशिक
                    [एडवोकेट]