IS THIS VALID IN ISLAM ?क्या इस्लाम जायज़ मानता है ?
क्या इस्लाम ऐसे विज्ञापन को जायज़ मानता है ?जब मुस्लिम समाज को वैवाहिक विज्ञापनों से परहेज नहीं तब ''परगाश ''जैसे बैंड पर आपत्ति क्यों ?परिवर्तन प्रकृति का नियम है !सोचिये जरा !
IS THIS VALID IN ISLAM ? IF MUSLIMS HAVE NO OBJECTION ON THIS... WHY HAVE THEY OPPOSED A BAND LIKE 'PARGASH ' CHANGE IS THE RULE OF NATURE .
THINK !THINK !THINK !
SHIKHA KAUSHIK 'NUTAN'
