--- यद्यपि आसमान में श्यामल घन छाये रहते हैं ..परन्तु वे जल वर्षा में संकुचित भाव अपनाए हुए हैं---तो क्यों न गीत में ही झना जहाँ वर्षा का आनंद उठा लिया जाय ......
छाये श्यामल घन चहुँ
ओर
छाये श्यामल घन चहुँ
ओर
झनन झन बरसे पानी |
छाई श्याम घटा घनघोर
झनन झन बरसे पानी
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आये दूर देस ते आली
झनन झन बरसे पानी ||
भीजें खेत बाग़ घर
आँगन
भीजें तरु उपवन मग
कानन |
अलि! भीजे डाली डाली
झनन झन बरसे पानी |
सखि! भीजे छप्पर
छानी
झनन झन बरसे पानी ||
प्यासी धरती प्यास
बुझाए
खेतों में अंकुर
हरियाये |
सखि! फहरे चूनर धानी
झनन झन बरसे पानी |
कहै मुरिला प्रीति
के बानी
झनन झन बरसे पानी ||
अम्बर बरसे सब जग
हरसे
तन तरसे अंतरमन सरसे
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बहे शीतल पवन सुहानी
झनन झन बरसे पानी|
जिया धड धड धड़के
आली
झनन झन बरसे पानी ||
सजनी भीजे साजन भीजे
मन भीजे मनभावन भीजे
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अलि ! छलके प्रीति
पुरानी
झनन झन बरसे पानी |
मन चाहे करन मनमानी
झनन झन बरसे पानी ||