प्रिय तुमको दूं क्या उपहार ।
मैं तो कवि हूँ मुझ पर क्या है ,
कविता गीतों की झंकार ।
प्रिय तुमको दूं क्या उपहार ।।
कवि के पास यही कुछ होता ,
कवि का धन तो बस यह ही है;
कविता गीतों का संसार ।
प्रिय तुमको दूं क्या उपहार ।।
गीत रचूँ तो तुम ये समझना,
पायल कंगन चूड़ी खन-खन ।
छंद कहूं तो यही समझना ,
कर्णफूल बिझुओं की रुनझुन ।।
मुक्तक रूपी बिंदिया लाऊँ ,
या नगमों से होठ रचाऊँ ।
ग़ज़ल कहूं तो उर में हे प्रिय,
पहनाया हीरों का हार ।।............प्रिय तुमको...।।
दोहे बरवै-छंद सवैया ,
अलंकार रस छंद-विधान ।
लाया तेरे अंग-अंग को,
विविध रूप के प्रिय परिधान ।।
भाव ताल लय भाषा वाणी,
अभिधा, लक्षणा और व्यंजना ।
तेरे प्रीति-गान कल्याणी,
तेरे रूप की प्रीति वन्दना ।।
नव-गीतों की बने अंगूठी,
नव-अगीत की मेहंदी भाये ।
जो घनाक्षरी सुनो तो समझो,
नकबेसर छलकाए प्यार ।।.............प्रिय तुमको...।।
नज्मों की करधनी मंगालो,
साड़ी छप्पय कुंडलियों की ।
चौपाई की मुक्ता-मणि से ,
प्रिय तुम अपनी मांग सजालो ।।
शेर समीक्षा मस्तक-टीका,
बाजूबंद तुकांत-छंद हों ।
कज़रा-अलता, कथा-कहानी ,
पद, पदफूल व हाथफूल हों ।।
उपन्यास केशों की वेणी ,
और अगीत फूलों का हार ।
मंगल-सूत्र सी वाणी वन्दना,
काव्य-शास्त्र दूं तुझपर वार ।।.
प्रिय तुमको दूं क्या उपहार ।।
मैं तो कवि हूँ मुझ पर क्या है ,
कविता गीतों की झंकार ।
प्रिय तुमको दूं क्या उपहार ।।
कवि के पास यही कुछ होता ,
कवि का धन तो बस यह ही है;
कविता गीतों का संसार ।
प्रिय तुमको दूं क्या उपहार ।।
गीत रचूँ तो तुम ये समझना,
पायल कंगन चूड़ी खन-खन ।
छंद कहूं तो यही समझना ,
कर्णफूल बिझुओं की रुनझुन ।।
मुक्तक रूपी बिंदिया लाऊँ ,
या नगमों से होठ रचाऊँ ।
ग़ज़ल कहूं तो उर में हे प्रिय,
पहनाया हीरों का हार ।।............प्रिय तुमको...।।
दोहे बरवै-छंद सवैया ,
अलंकार रस छंद-विधान ।
लाया तेरे अंग-अंग को,
विविध रूप के प्रिय परिधान ।।
भाव ताल लय भाषा वाणी,
अभिधा, लक्षणा और व्यंजना ।
तेरे प्रीति-गान कल्याणी,
तेरे रूप की प्रीति वन्दना ।।
नव-गीतों की बने अंगूठी,
नव-अगीत की मेहंदी भाये ।
जो घनाक्षरी सुनो तो समझो,
नकबेसर छलकाए प्यार ।।.............प्रिय तुमको...।।
नज्मों की करधनी मंगालो,
साड़ी छप्पय कुंडलियों की ।
चौपाई की मुक्ता-मणि से ,
प्रिय तुम अपनी मांग सजालो ।।
शेर समीक्षा मस्तक-टीका,
बाजूबंद तुकांत-छंद हों ।
कज़रा-अलता, कथा-कहानी ,
पद, पदफूल व हाथफूल हों ।।
उपन्यास केशों की वेणी ,
और अगीत फूलों का हार ।
मंगल-सूत्र सी वाणी वन्दना,
काव्य-शास्त्र दूं तुझपर वार ।।.
प्रिय तुमको दूं क्या उपहार ।।
